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Jammu News: प्लाज्मा, आरबीसी व प्लेटलेट्स के लिए जल्द एक और मशीन लगेगी
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मेडिकल कालेज में लगी मशीन,जिसमें एक बार में दो हजार रक्त के नमूनों की जांच की जा सकती है। अमर उ
- जीएमसी जम्मू में रक्त की कमी दूर करने के लिए किए जा रहे प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजकीय मेडिकल काॅलेज (जीएमसी) जम्मू के ब्लड बैंक को जल्द एक नई सेपरेशन मशीन मिल जाएगी। इससे रक्तदान के बाद मिले रक्त से आसानी व कम समय में प्लाज्मा, आरबीसी और प्लेटलेट्स को निकाला जा सकेगा।
अभी ब्लड बैंक को एक मशीन से काम चलाना पड़ रहा है। नई मशीन के लग जाने के बाद प्लाज्मा, आरबीसी व प्लेटलेट्स को निकालने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। यहां पर एक बार में 2,000 तक रक्त के नमूनों की जांच करने की भी सुविधा है।
जीएमसी में ब्लड बैंक की इंचार्ज मीना सिद्धू ने बताया कि कैंसर, थैलसीमिया व स्नोफीलिया के मरीजों को प्राथमिकता के साथ रक्त की जरूरत को पूरा करने का प्रयास किया जाता है। आपातकालीन स्थिति में भी जरूरतमंद मरीजों को रक्त दिए जाने की व्यवस्था है। मरीजों के साथ आए तीमारदारोंं को भी रक्तदान के प्रति जागरूक किया जाता है। वाॅलंटियर्स, सामाजिक संगठनों, एनएसएस, एनसीसी, सेना व बीएसएफ के जवानों की तरफ से लगातार सहयोग मिल रहा है।
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जितनी जरूरत, उतना ही यूनिट रक्त उपलब्ध
एक यूनिट रक्त चार मरीजों की जान बचा सकता है। इसके बाद भी शहर में आमजन के बीच रक्तदान के लिए जागरूकता की कमी है। जीएमसी जम्मू के ब्लड बैंक की क्षमता 2000 यूनिट की है। इसमें रोज मात्र 250 यूनिट रक्त ही रहता है। ऐसे में वाॅलंटियर्स, स्वयंसेवी सहायता समूहों व अन्य संगठनों पर निर्भर रहना मजबूरी है। जीएमसी व इससे संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी, श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) अस्पताल में सभी के पास ब्लड बैंक हैं। सुपर स्पेशियलिटी में 50 यूनिट व एसएमजीएस अस्पताल में 1000 यूनिट रक्त को भंडारित किया जा सकता है। जितनी इन ब्लड बैंक की क्षमता है उतना यूनिट रक्त रोज मिल पाना संभव नहीं होता। ऐसे में स्वयंसेवी संस्थाओं पर मेडिकल काॅलेज व संबंधित अस्पतालों को निर्भर रहना पड़ता है। बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की यूनिट भी रक्तदान में सहयोग करती हैं। इससे काफी हद तक ब्लड की कमी को पूरा कर पाना संभव हो पाता है।
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लोग इसलिए नहीं कर रहे रक्तदान
- रक्तदान किया तो शरीर में कमजोरी आ जाएगी, जल्दी खून नहीं बनेगा।
- खून पहले ही शरीर में कम है, बीमार हो जाएंगे तो कहीं समस्या न हो जाए।
- एक बार रक्तदान किया तो बार-बार लोग बुलाकर ले जाएंगे।
- कहीं कोई बीमारी न लग जाए।
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रक्तदान के प्रति डाॅक्टर की राय
- रक्तदान से किसी प्रकार की शारीरिक कमजोरी नहीं आती।
- रक्त देने से रक्त संबंधित संक्रमण, बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है।
- महिलाओं व युवतियों को भी रक्तदान करने से कोई हानि नहीं होती।
- 24 घंटे के अंदर शरीर में दोबारा रक्त बन जाता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजकीय मेडिकल काॅलेज (जीएमसी) जम्मू के ब्लड बैंक को जल्द एक नई सेपरेशन मशीन मिल जाएगी। इससे रक्तदान के बाद मिले रक्त से आसानी व कम समय में प्लाज्मा, आरबीसी और प्लेटलेट्स को निकाला जा सकेगा।
अभी ब्लड बैंक को एक मशीन से काम चलाना पड़ रहा है। नई मशीन के लग जाने के बाद प्लाज्मा, आरबीसी व प्लेटलेट्स को निकालने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। यहां पर एक बार में 2,000 तक रक्त के नमूनों की जांच करने की भी सुविधा है।
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जीएमसी में ब्लड बैंक की इंचार्ज मीना सिद्धू ने बताया कि कैंसर, थैलसीमिया व स्नोफीलिया के मरीजों को प्राथमिकता के साथ रक्त की जरूरत को पूरा करने का प्रयास किया जाता है। आपातकालीन स्थिति में भी जरूरतमंद मरीजों को रक्त दिए जाने की व्यवस्था है। मरीजों के साथ आए तीमारदारोंं को भी रक्तदान के प्रति जागरूक किया जाता है। वाॅलंटियर्स, सामाजिक संगठनों, एनएसएस, एनसीसी, सेना व बीएसएफ के जवानों की तरफ से लगातार सहयोग मिल रहा है।
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जितनी जरूरत, उतना ही यूनिट रक्त उपलब्ध
एक यूनिट रक्त चार मरीजों की जान बचा सकता है। इसके बाद भी शहर में आमजन के बीच रक्तदान के लिए जागरूकता की कमी है। जीएमसी जम्मू के ब्लड बैंक की क्षमता 2000 यूनिट की है। इसमें रोज मात्र 250 यूनिट रक्त ही रहता है। ऐसे में वाॅलंटियर्स, स्वयंसेवी सहायता समूहों व अन्य संगठनों पर निर्भर रहना मजबूरी है। जीएमसी व इससे संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी, श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) अस्पताल में सभी के पास ब्लड बैंक हैं। सुपर स्पेशियलिटी में 50 यूनिट व एसएमजीएस अस्पताल में 1000 यूनिट रक्त को भंडारित किया जा सकता है। जितनी इन ब्लड बैंक की क्षमता है उतना यूनिट रक्त रोज मिल पाना संभव नहीं होता। ऐसे में स्वयंसेवी संस्थाओं पर मेडिकल काॅलेज व संबंधित अस्पतालों को निर्भर रहना पड़ता है। बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की यूनिट भी रक्तदान में सहयोग करती हैं। इससे काफी हद तक ब्लड की कमी को पूरा कर पाना संभव हो पाता है।
लोग इसलिए नहीं कर रहे रक्तदान
- रक्तदान किया तो शरीर में कमजोरी आ जाएगी, जल्दी खून नहीं बनेगा।
- खून पहले ही शरीर में कम है, बीमार हो जाएंगे तो कहीं समस्या न हो जाए।
- एक बार रक्तदान किया तो बार-बार लोग बुलाकर ले जाएंगे।
- कहीं कोई बीमारी न लग जाए।
रक्तदान के प्रति डाॅक्टर की राय
- रक्तदान से किसी प्रकार की शारीरिक कमजोरी नहीं आती।
- रक्त देने से रक्त संबंधित संक्रमण, बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है।
- महिलाओं व युवतियों को भी रक्तदान करने से कोई हानि नहीं होती।
- 24 घंटे के अंदर शरीर में दोबारा रक्त बन जाता है।