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Jammu News: अब फेफड़ों के कैंसर और टीबी की जांच होगी आसान
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- जीएमसी जम्मू में ईबीयूएस सेवा की शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं टीबी विभाग में पहली बार एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (ईबीयूएस) शुरू हुई। जीएमसी जम्मू संभाग का ऐसा पहला केंद्र बन गया है जहां आधुनिक जांच तकनीक की सुविधा उपलब्ध है। पहले चरण में तीन मरीजों की जांच की गई।
अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि ईबीयूएस एक उन्नत ब्रोंकोस्कोपिक तकनीक है, जो ब्रोंकोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड को एक साथ जोड़ती है। इससे फेफड़ों, छाती की ग्रंथियों और मडियास्टिनम क्षेत्र में मौजूद गांठों व संदिग्ध ट्यूमर का बेहद सटीकता से सैंपल लिया जा सकता है। यह तकनीक फेफड़ों के कैंसर, टीबी, और सार्कोइडोसिस जैसी बीमारियों के सटीक निदान में क्रांति लाएगी। इससे मरीजों को बड़े और जटिल ऑपरेशनों से राहत मिलेगी।
इस सुविधा के शुरू होने से अब जम्मू संभाग के मरीजों को उन्नत जांच के लिए दिल्ली या अन्य बाहरी राज्यों में नहीं भटकना पड़ेगा। जीएमसी के प्राचार्य डॉ. आशुतोष गुप्ता और चेस्ट डिजीज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश शर्मा के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष डॉ. राहुल गुप्ता की देखरेख में इसे स्थापित किया। शुरुआती प्रक्रियाओं का संचालन जीएमसी श्रीनगर के प्रो. डॉ. नवीद नजीर शाह की देखरेख में एनेस्थीसिया और पैथोलॉजी विभाग के समन्वय से पूरा किया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं टीबी विभाग में पहली बार एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (ईबीयूएस) शुरू हुई। जीएमसी जम्मू संभाग का ऐसा पहला केंद्र बन गया है जहां आधुनिक जांच तकनीक की सुविधा उपलब्ध है। पहले चरण में तीन मरीजों की जांच की गई।
अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि ईबीयूएस एक उन्नत ब्रोंकोस्कोपिक तकनीक है, जो ब्रोंकोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड को एक साथ जोड़ती है। इससे फेफड़ों, छाती की ग्रंथियों और मडियास्टिनम क्षेत्र में मौजूद गांठों व संदिग्ध ट्यूमर का बेहद सटीकता से सैंपल लिया जा सकता है। यह तकनीक फेफड़ों के कैंसर, टीबी, और सार्कोइडोसिस जैसी बीमारियों के सटीक निदान में क्रांति लाएगी। इससे मरीजों को बड़े और जटिल ऑपरेशनों से राहत मिलेगी।
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इस सुविधा के शुरू होने से अब जम्मू संभाग के मरीजों को उन्नत जांच के लिए दिल्ली या अन्य बाहरी राज्यों में नहीं भटकना पड़ेगा। जीएमसी के प्राचार्य डॉ. आशुतोष गुप्ता और चेस्ट डिजीज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश शर्मा के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष डॉ. राहुल गुप्ता की देखरेख में इसे स्थापित किया। शुरुआती प्रक्रियाओं का संचालन जीएमसी श्रीनगर के प्रो. डॉ. नवीद नजीर शाह की देखरेख में एनेस्थीसिया और पैथोलॉजी विभाग के समन्वय से पूरा किया गया।
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