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एमसीएच में बाल रोगियों का इलाज शुरू
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जम्मू। दो सौ बिस्तर वाले एमसीएच (जच्चा-बच्चा) अस्पताल गांधीनगर में गायनी ओपीडी के बाद बच्चों का इलाज शुरू हो गया है। इसमें एसएमजीएस अस्पताल में पंजीकृत होने वाले बाल रोगियों को यहां शिफ्ट किया जा रहा है। अस्पताल में निकू (न्यूनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू)) और पिकू (पेडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) को भी शुरू किया गया है। पहले इसके लिए एसएमजीएस अस्पताल में गंभीर बाल रोगियों के लिए निकू पिकू यूनिट में जद्दोजहद की स्थिति रहती थी, लेकिन इस व्यवस्था से एसएमजीएस अस्पताल पर मरीजों का लोड कम होने से दोनों अस्पतालों में गुणवत्तायुक्त चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
निकू यूनिट में गंभीर रूप से बीमार नवजात या प्रीमैच्योर (समय से पूर्व होने वाले बच्चे) रखे जाते हैं। इसमें अधिकांश को आईसीयू में वेंटिलेटर या अन्य चिकित्सा पर रखा जाता है। इसके बाद समय के साथ चिकित्सा देने पर उनमें सुधार आता है। एमसीएच में 10-10 बिस्तर वाले निकू व पिकू यूनिट स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में अस्पताल में 17 बाल रोगी हैं, जिसमें दस निकू और पिकू में हैं। इसके अलावा महिला मरीज भी भर्ती हैं। एसएमजीएस अस्पताल में सीजेरियन के बाद कई नवजात रोगियों को एमसीएच में शिफ्ट किया जा रहा है। इससे पहले एसएमजीएस में निकू व पिकू यूनिट के लगभग मरीजों से भरे रहने के कारण मां या अन्य तीमारदार को बिस्तर की सुविधा नहीं मिल पाती थी, लेकिन एमसीएच में इन यूनिट में भर्ती मरीजों के साथ मां को बिस्तर की सुविधा दी जा रही है, ताकि नवजात को स्तनपान या अन्य बेहतर देखभाल दी जा सके। इन यूनिटों में फोटो थैरेपी, वेंटिलेटर, आक्सीजन आदि उपकरण स्थापित किए गए हैं।
अस्पताल में मातृत्व और बाल रोगियों की भर्ती की जा रही है। मरीजों की संख्या को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
- डॉ. अरुण शर्मा, अधीक्षक, अस्पताल, एमसीएच
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निकू यूनिट में गंभीर रूप से बीमार नवजात या प्रीमैच्योर (समय से पूर्व होने वाले बच्चे) रखे जाते हैं। इसमें अधिकांश को आईसीयू में वेंटिलेटर या अन्य चिकित्सा पर रखा जाता है। इसके बाद समय के साथ चिकित्सा देने पर उनमें सुधार आता है। एमसीएच में 10-10 बिस्तर वाले निकू व पिकू यूनिट स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में अस्पताल में 17 बाल रोगी हैं, जिसमें दस निकू और पिकू में हैं। इसके अलावा महिला मरीज भी भर्ती हैं। एसएमजीएस अस्पताल में सीजेरियन के बाद कई नवजात रोगियों को एमसीएच में शिफ्ट किया जा रहा है। इससे पहले एसएमजीएस में निकू व पिकू यूनिट के लगभग मरीजों से भरे रहने के कारण मां या अन्य तीमारदार को बिस्तर की सुविधा नहीं मिल पाती थी, लेकिन एमसीएच में इन यूनिट में भर्ती मरीजों के साथ मां को बिस्तर की सुविधा दी जा रही है, ताकि नवजात को स्तनपान या अन्य बेहतर देखभाल दी जा सके। इन यूनिटों में फोटो थैरेपी, वेंटिलेटर, आक्सीजन आदि उपकरण स्थापित किए गए हैं।
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अस्पताल में मातृत्व और बाल रोगियों की भर्ती की जा रही है। मरीजों की संख्या को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
- डॉ. अरुण शर्मा, अधीक्षक, अस्पताल, एमसीएच