Ground Zero : जम्मू-कश्मीर के आधे सीमावर्ती गांवों में बंकर की दरकार, विस्तार करने की जरूरत; बजट भी चाहिए
जिस तरह से पाकिस्तान ने नापाक हरकतें कीं, रिहायशी इलाकों को ड्रोन और तोपों से निशाना बनाने की कोशिश की, उसका संदेश यही है कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। ग्राउंड जीरो से विनोद शर्मा (नौशेरा), प्रीत चौधरी (सांबा), राजीव लंगेह (अरनिया), जितेंद्र सिंह (परगवाल), राजन चौधरी (रामगढ़), मुनीश शर्मा पुंछ और कठुआ से साहिल खजूरिया
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विस्तार
भले ही भारत-पाकिस्तान में यह कोई घोषित युद्ध नहीं था, पर किसी युद्ध से कम भी नहीं था। मिसाइलें चलीं। ड्रोनों से हमले किए गए, तो तोपों का भी इस्तेमाल हुआ। यानी पारंपरिक से लेकर नए वारफेयर की झलक थी इस लड़ाई में। जिस तरह से पाकिस्तान ने नापाक हरकतें कीं, रिहायशी इलाकों को ड्रोन और तोपों से निशाना बनाने की कोशिश की, उसका संदेश यही है कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।
सबसे बड़ी जरूरत बंकरों की है। इन बंकरों की उपयोगिता भी साबित हुई है। बंकरों से लोगों की जान बचाने में मदद मिली। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में बंकर महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन अब भी 50 फीसदी गांवों में बंकरों का निर्माण नहीं हो पाया है। लोगों का कहना है कि सामुदायिक बंकरों में से ज्यादातर रहने लायक नहीं हैं और हर घर में बंकर की जरूरत है।
सांबा में भी 400 की कमी
सांबा में भारत पाक सीमा पर 2,400 बंकर बनाने की योजना थी, जिसमें से 2,000 बनकर तैयार हंै। इन्हें लोक निर्माण विभाग व ग्रामीण विकास विभाग ने बनाया है। कई लोगों के पास बंकर बनाने के लिए भूमि ही नहीं है। इस वजह से बाकी बंकरों का काम रुका हुआ है।
नौशेरा का 80 फीसदी हिस्सा सीमा पर
नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान के हमले में कई लोगों के घर ध्वस्त हो गए। पूर्व सरपंच सुनील चौधरी व अशोक कलसिया बताते हैं कि नौशेरा का 80 फीसदी हिस्सा एलओसी से लगता है। ऐसे में यहां हर घर में बंकर चाहिए। रमेश केसर भी कहते हैं कि क्षेत्र के बरेरी, गगरोट, सेरी क्षेत्र में बंकर बनाने की सख्त जरूरत है। अरनिया ब्लॉक में कुल 280 बंकर हैं, जिसमें 40 सामुदायिक हैं। ज्यादातर सामुदायिक बंकर रहने लायक नहीं हैं। इनका निर्माण भी अधूरा है। वहीं, परगवाल के 20 गांवों में से सिर्फ 11 में ही बंकरों का निर्माण हो पाया है।
बंकर निर्माण के ये हैं मानक
बंकर की छत एक फुट मोटी होनी चाहिए। इसमें 12 से 14 मिमी के सरिये लगने चाहिए। बंकर की छत पूरी तरह से मिट्टी से ढकी होनी चाहिए, मगर अधिकतर बंकर इस मानक पर फिट नहीं बैठते।
निर्माण के लिए बजट बढ़ाने की भी जरूरत
सांबा में 2014 में जब बंकरों के निर्माण की योजना शुरू की गई थी, तब एक सामुदायिक बंकर का बजट छह लाख रुपये और निजी के लिए ढाई लाख होता था। महंगाई के कारण अब बजट बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
गोलाबारी प्रभावित हर क्षेत्र में बनेंगे बंकर : उमर
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बंकर के लिए नई नीति बनाने की बात कही है। उड़ी और बारामुला का दौरा कर रहे सीएम ने कहा, बंकर फिर से चर्चा का विषय बन गए हैं। कई वर्षों तक हमें बंकरों की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन अब लोगों ने व्यक्तिगत बंकरों की मांग की है, न कि सामुदायिक बंकरों की। हम गोलाबारी से प्रभावित सभी क्षेत्रों के लिए बंकरों की व्यवस्था करेंगे। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिलों को निर्देश दे दिए हैं कि वे अपनी आवश्यकता के मुताबिक बंकरों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार करें। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कठुआ में आधुनिक बंकरों की सराहना की थी।
बंकर निर्माण का दायरा बढ़ाने की मांग
सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बंकर निर्माण का दायरा दो किमी से बढ़ाकर दस किमी तक करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि अब मोर्टार शेल से हमले हो रहे हैं, जिनकी मारक रेंज पांच से 10 किलोमीटर तक है।
पुंछ में 1,500 की मंजूरी बने 1,303 कवच
पुंछ जिले में 623 सामुदायिक व 680 निजी बंकर बने हैं, जबकि केंद्र सरकार ने करीब 1,500 बंकरों को मंजूरी दी थी। नियंत्रण रेखा पर बसे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में बंकर अभी भी अध्ूूरे हैं। कई में पानी भरा हुआ है। वहीं रामगढ़ क्षेत्र के सीमावर्ती गांव रंगूर, नंगा, केसों, एसएम पूरा, अवताल, नथबाल, जेडरा, दंग छन्नी फतबाल में सामुदायिक बंकर बने हैं, पर लोग चाहते हैं कि हर घर में एक बंकर बनाया जाए।
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इस्राइल की तरह बनाए जाएं सीमावर्ती क्षेत्रों के बंकर
कैप्टन (सेवानिवृत्त) बाज सिंह का कहना है कि एलओसी पर जितने भी गांव-स्कूल हैं, वहां अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप बंकरों का निर्माण किया जाना चाहिए। इस्राइल ने इस काम के लिए एक कंपनी बनाई है। कंपनी ने विस्फोटरोधी खिड़कियां और दरवाजे बनाने के साथ-साथ पूर्ण बमरोधी आश्रयों के निर्माण की तकनीक विकसित की है। सेवानिवृत्त कैप्टन सिंह के मुताबिक, कंपनी ने निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ऐसी सामग्री विकसित की है, जो विस्फोट के प्रहार, विखंडन, बैलिस्टिक और जबरन प्रवेश से सुरक्षा करती है।
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