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कश्मीरः संसद सत्र तीन-चार दिन और चलना है, इंतजार कीजिए कुछ भी छिपाकर नहीं होगा- राज्यपाल

Mon, 05 Aug 2019 02:18 AM IST
प्रशांत कुमार बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 05 Aug 2019 02:18 AM IST
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Governor Satyapal malik statement about kashmir current issue, amar ujala exclusive
राज्यपाल सत्यपाल मलिक - फोटो : अमर उजाला

राज्यपाल सत्यपाल मलिक के बयान से कश्मीर में ‘कुछ बड़ा होने वाला है’ संबंधी अफवाहों को और हवा मिली है। इस बयान के मायने निकाले जाने लगे हैं। कश्मीर केंद्रित पार्टियों नेकां और पीडीपी ने इस बयान को 35-ए से छेड़छाड़ किए जाने से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।

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कांग्रेस ने केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा ताकि घाटी में पैदा हुए डर और खौफ के माहौल का पटाक्षेप हो सके। दरअसल मलिक ने शनिवार को पत्रकारों से कहा था कि कुछ भी छिपाकर नहीं होगा, संसद सत्र तीन-चार दिन और चलना है, तब तक इंतजार कीजिए। मुझे कल का तो पता नहीं पर आज सब कुछ सुरक्षित है।
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जम्मू-कश्मीर में पिछले एक पखवाड़े से सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती से अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। अतिरिक्त तैनाती के साथ ही अमरनाथ यात्रा को रोके जाने, घाटी से पर्यटकों को वापस भेजने, एनआईटी को बंद करने, जम्मू संभाग में मचैल तथा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा को स्थगित किए जाने जैसे फैसलों ने डर और खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।
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राज्यपाल खुद चार बार लोगों को आश्वस्त कर चुके हैं कि डरने जैसी कोई बात नहीं है। केवल सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त बलों की तैनाती की जा रही है जो नियमित प्रक्रिया है। लेकिन पाकिस्तान की ओर से अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाए जाने की साजिश का खुलासा होने के बाद यात्रा स्थगित किए जाने का फैसला लोगों को हजम नहीं हो रहा है। क्योंकि पहले भी अमरनाथ यात्रियों पर आतंकियों ने हमले किए हैं और उसके बावजूद यात्रा चलती रही थी।

एलओसी पर सेना की सक्रियता

एलओसी पर सेना की सक्रियता को भी लोग इन आशंकाओं से जोड़कर देख रहे हैं। लोगों का मानना है कि कुछ ऐसा होने वाला है जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस वजह से इतने व्यापक पैमाने पर अर्धसैनिक बलों को बुलाया गया है ताकि आतंरिक सुरक्षा की स्थिति न बिगड़ने पाए। आरएएफ की ओर से पुंछ समेत कई जिलों में फ्लैग मार्च ने चर्चाओं को और बल दिया है। हालांकि, यह सबकुछ कयासबाजी ही हैं।

नेकां और पीडीपी ने अलग-अलग बैठकें कर अनुच्छेद 35-ए से छेड़छाड़ पर विरोध का फैसला किया है। नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला केंद्र सरकार से संसद में स्थिति को लेकर बयान देने की मांग कर चुके हैं। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मुख्यधारा की पार्टियों से ऐसी किसी साजिश को नाकाम करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है।

कांग्रेस अध्यक्ष जीए मीर ने पूरे मामले में केंद्र सरकार से रुख साफ करने की मांग की है ताकि डर और भय का माहौल समाप्त हो सके। हालांकि, भाजपा इस पूरे मामले पर चुप्प है। पार्टी अध्यक्ष रवींद्र रैना का कहना है कि नेकां और पीडीपी अतिरिक्त बलों की तैनाती का हौव्वा खड़ा कर माहौल खराब करने पर तुली हुई हैं जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।
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