महबूबा सरकार को बड़ा झटका, राज्यपाल ने अध्यक्ष नियुक्ति की फाइल लौटाई
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राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति का मामला एक बार फिर लटक गया है। राज्य सरकार की ओर से तय नाम की फाइल राज्यपाल ने लौटा दी है। अब नए सिरे से चयन समिति की बैठक कर अध्यक्ष के नाम तय करने होंगे।
फाइल लौटाए जाने से राज्य सरकार को तगड़ा झटका लगा है। चयन समिति के सदस्य और विधानसभा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अब नए सिरे से अध्यक्ष के चयन के लिए कवायद करनी होगी। फिलहाल चयन समिति की बैठक के लिए तिथि तय नहीं हुई है।
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अध्यक्षता में 17 जून को हुई चयन समिति की बैठक में सेवानिवृत्त न्यायाधीश हकीम इम्तियाज हुसैन को अध्यक्ष पद पर नियुक्त किए जाने पर सहमति बनी थी। इसके साथ ही चार सदस्यों में से एक जस्टिस जंग बहादुर का नाम भी तय किया गया था।
दो साल से अधिक समय से अध्यक्ष पद रिक्त
राज्य सरकार की ओर से यह फाइल राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजी गई। सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल ने आपत्ति जताते हुए फाइल लौटा दी है। आपत्ति यह है कि चूंकि न्यायाधीश हुसैन राज्य जवाबदेही आयोग के भी अध्यक्ष रहे हैं। इस वजह से मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति नियमानुसार नहीं हो सकती है।
सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष पद के लिए पैनल में दो पूर्व मुख्य न्यायाधीश निसार अहमद काकरू एवं बिलाल नाजकी तथा सेवानिवृत्त जस्टिस हकीम इम्तियाज हुसैन के नाम थे। नामों को तय करने के लिए गठित पैनल में मुख्यमंत्री के अलावा विधानसभा में विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला, विधानसभा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता, विधान परिषद के चेयरमैन अनायत अली तथा विधान परिषद में विपक्ष के नेता अली मोहम्मद डार शामिल थे।
जनू 2014 से आयोग के अध्यक्ष का पद रिक्त है। कार्यकारी चेयरमैन रफीक फिदा हुसैन 2014 में सेवानिवृत्त हो गए थे। मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष के अलावा चार सदस्य होते हैं। पिछले दो साल से मानवाधिकार से जुड़े मामलों पर सुनवाई नहीं हो पा रही थी। हाल ही में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार से आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति में हो रही देरी के बाबत जानकारी मांगी थी। साथ ही छह सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा था।