रियासत के गर्वनर की कुर्सी पर छाया संकट टला
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा को हटाए जाने की चर्चाओं पर फिलहाल पूर्ण विराम लग गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजभवन को इस आशय के संकेत दे दिए हैं। इससे पहले वोहरा को हटाने और उनकी जगह पूर्व आर्मी कमांडर हसनैन की नियुक्ति को हरी झंडी दिए जाने के आसार थे।
फिलहाल वोहरा को केंद्र की ओर से राहत मिल गई है। वोहरा की नियुक्ति यूपीए कार्यकाल में हुई थी और उन्हें एक बार कार्य विस्तार भी मिल चुका है। अमरनाथ यात्रा संपन्न होने के बाद से ही उन्हें हटाए जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था।
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक वोहरा को अपना कार्यकाल पूरा करने तक पद पर बने रहने के संकेत दे दिए गए हैं। उनके दूसरे कार्यकाल को पूरा होने में अभी लगभग साढ़े तीन साल बाकी है।
बदलने की चर्चाओं पर लगा विराम
मोदी सरकार के सत्तासीन होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कुछ राज्यपालों से इस्तीफे मांगे गए थे। तब वोहरा ने खुद पहल करते हुए दिल्ली में इस्तीफे की पेशकश की थी।
जम्मू कश्मीर की संवेदनशील स्थिति के मद्देनजर केंद्र सरकार इस मामले में जल्दीबाजी नहीं करना चाहती थी। लिहाजा तब वोहरा की पेशकश को ठुकरा दिया गया था। लेकिन विकल्प की तलाश भी जारी रही।
सितम्बर महीने के आखिरी सप्ताह तक सैयद अता हसनैन के रूप में यह विकल्प तलाश लिया गया था। हसनैन श्रीनगर में 15वीं कोर के कमांडर और लेफिटनेंट जनरल रहे हैं। 2010 में उन्होंने सेना को कश्मीरियों के करीब लाने और सेना की ओर से कई कार्यक्रम शुरू करने में अहम भूमिका निभाई थी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजभवन को दिए संकेत
इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जम्मू कश्मीर में लगातार दौरे हुए। इन दौरों में मोदी की वोहरा से कई मुलाकातों ने नजदीकियां बढ़ाईं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रवक्ता और भाजपा के महासचिव राम माधव की भी इस बीच गर्वनर से मुलाकात हुई।
इन मुलाकातों ने वोहरा के लिए कश्मीर में नई जमीन की पृष्ठभूमि तैयार की। अमरनाथ यात्रा के बाद बाढ़ के दौरान भी राज्यपाल की सक्रियता को मोदी ने पसंद किया है।
अब विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। ऐसे में एन चुनाव के बीच राज्यपाल को हटाना ऐसे भी ठीक कदम नहीं होता। लिहाजा वोहरा को पूरे कार्यकाल के लिए बने रहने के संकेत मिल चुके हैं।