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कश्मीरी पंडितों की घर वापसी पर महबूबा सरकार अलगाववादियों से डिबेट को तैयार
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Fri, 20 May 2016 11:57 AM IST
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सीएम महबूबा मुफ्ती और डिप्टी सीएम निर्मल सिंह
- फोटो : Amar Ujala
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रियासत की पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने कहा है कि वह कश्मीरी पंडितों की घाटी में ससम्मान वापसी के लिए संकल्पित है। यदि अलगाववादियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों को इसमें किसी प्रकार की आपत्ति है तो वह उनसे डिबेट करने को तैयार है।
सरकार ने अपील की है कि यदि अलगाववादियों तथा अन्य राजनीतिक दलों को उनकी वापसी के संबंध में किसी प्रकार की आपत्ति है तो वह अपने सुझाव दे सकते हैं कि इस दिशा में कैसे आगे बढ़ा जाए।
सरकार के प्रवक्ता तथा शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर खुली बहस को तैयार है। वह कश्मीरी पंडितों की वापसी के संबंध में सर्वसम्मति बनाना चाहती है। कश्मीरी पंडितों के लिए कंपोजिट टाउनशिप को लेकर कहा कि हमें तो कश्मीरी पंडितों को वापस बसाने को लेकर खुश होना चाहिए। हमारा भी वही मुद्दा है जो गिलानी साहब का है।
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जैसे वह कश्मीरी पंडितों को समाज का हिस्सा मानते हैं वैसे ही हम भी मानते हैं। अगर वह 20-25 वर्षों के बाद लौटते हैं तो आखिर कहां जाएंगे ? नईम के अनुसार वे पूरी तरह से बदले हुए परिदृश्य में वापस आ रहे हैं। हम केवल उन्हें जमीन उपलब्ध करवाएंगे जहां न केवल कश्मीरी पंडित बल्कि राज्य का कोई भी शख्स आकर रह सकेगा।
एक्सक्लूसिव कॉलोनियां हमारे एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अलगाववादियों के पास अगर कोई सुझाव है तो वह सामने रखें। हमने अपने पत्ते खोल दिए हैं वह अपने पत्ते खोलें। वह खुद कश्मीरी पंडितों के लिए कश्मीर वापसी के अभियान का नेतृत्व करें।
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सरकार ने अपील की है कि यदि अलगाववादियों तथा अन्य राजनीतिक दलों को उनकी वापसी के संबंध में किसी प्रकार की आपत्ति है तो वह अपने सुझाव दे सकते हैं कि इस दिशा में कैसे आगे बढ़ा जाए।
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सरकार के प्रवक्ता तथा शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर खुली बहस को तैयार है। वह कश्मीरी पंडितों की वापसी के संबंध में सर्वसम्मति बनाना चाहती है। कश्मीरी पंडितों के लिए कंपोजिट टाउनशिप को लेकर कहा कि हमें तो कश्मीरी पंडितों को वापस बसाने को लेकर खुश होना चाहिए। हमारा भी वही मुद्दा है जो गिलानी साहब का है।
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जैसे वह कश्मीरी पंडितों को समाज का हिस्सा मानते हैं वैसे ही हम भी मानते हैं। अगर वह 20-25 वर्षों के बाद लौटते हैं तो आखिर कहां जाएंगे ? नईम के अनुसार वे पूरी तरह से बदले हुए परिदृश्य में वापस आ रहे हैं। हम केवल उन्हें जमीन उपलब्ध करवाएंगे जहां न केवल कश्मीरी पंडित बल्कि राज्य का कोई भी शख्स आकर रह सकेगा।
एक्सक्लूसिव कॉलोनियां हमारे एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अलगाववादियों के पास अगर कोई सुझाव है तो वह सामने रखें। हमने अपने पत्ते खोल दिए हैं वह अपने पत्ते खोलें। वह खुद कश्मीरी पंडितों के लिए कश्मीर वापसी के अभियान का नेतृत्व करें।
कौन भरोसा करेगा आप पर
शिक्षा मंत्री नईम अख्तर
- फोटो : File Photo
सैनिक कॉलोनी पर कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है। इसको लेकर पिछले करीब 6 वर्षों से कार्य चल रहा है लेकिन अभी यह किसी अंजाम तक नहीं पहुंचा। सैनिक कॉलोनी बनाने का प्रस्ताव वर्तमान सरकार का नहीं है। सैनिक कॉलोनी बनाने को लेकर राज्य के ही सिपाहियों द्वारा दरख्वास्त दी गई है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि कालोनी बनने से किसी प्रकार से भी स्टेट सब्जेक्ट लॉ का उल्लंघन नहीं होगा। इसके उल्लंघन को लेकर हम कभी सोच भी नहीं सकते। कहा कि अलगाववादी कहते हैं कि अगर ऐसा होता है तो वह राज्य में एक बार फिर से वर्ष 2008 वाली स्थिति पैदा करेंगे। क्या वैसी स्थिति पैदा करना किसी बात का हल है ? उन्होंने कहा कि राज्य को जो विशेष दर्जा हासिल है उसके साथ कभी भी समझौता नहीं होगा।
कहा कि इस मुद्दे पर खुली बहस को तैयार हैं। अलगाववादी बताएं कि हम कहां गलत हैं। उनके पास कोई सुझाव है तो वह हमें दे सकते हैं। नई औद्योगिक नीति पर नईम ने एक बार फिर दोहराया कि हम इसे फाइनल करने से पहले एक इसकी समीक्षा करेंगे। सबकी राय ली जाएगी।
यह पूछे जाने पर कि आप पर कौन भरोसा करेगा ? 2008 में अमरनाथ जमीन विवाद के दौरान पीडीपी ने ही जमीन अलॉट की थी फिर आर्डर वापस लिया था। भाजपा के खिलाफ चुनावों के दौरान प्रचार किया फिर सरकार भी उन्हीं के साथ बनाई। इस पर नईम ने सिर्फ इतना कहा कि राजनीति संभव करने की कला है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि कालोनी बनने से किसी प्रकार से भी स्टेट सब्जेक्ट लॉ का उल्लंघन नहीं होगा। इसके उल्लंघन को लेकर हम कभी सोच भी नहीं सकते। कहा कि अलगाववादी कहते हैं कि अगर ऐसा होता है तो वह राज्य में एक बार फिर से वर्ष 2008 वाली स्थिति पैदा करेंगे। क्या वैसी स्थिति पैदा करना किसी बात का हल है ? उन्होंने कहा कि राज्य को जो विशेष दर्जा हासिल है उसके साथ कभी भी समझौता नहीं होगा।
कहा कि इस मुद्दे पर खुली बहस को तैयार हैं। अलगाववादी बताएं कि हम कहां गलत हैं। उनके पास कोई सुझाव है तो वह हमें दे सकते हैं। नई औद्योगिक नीति पर नईम ने एक बार फिर दोहराया कि हम इसे फाइनल करने से पहले एक इसकी समीक्षा करेंगे। सबकी राय ली जाएगी।
यह पूछे जाने पर कि आप पर कौन भरोसा करेगा ? 2008 में अमरनाथ जमीन विवाद के दौरान पीडीपी ने ही जमीन अलॉट की थी फिर आर्डर वापस लिया था। भाजपा के खिलाफ चुनावों के दौरान प्रचार किया फिर सरकार भी उन्हीं के साथ बनाई। इस पर नईम ने सिर्फ इतना कहा कि राजनीति संभव करने की कला है।