अब बाड़ काटकर सीमा में नहीं घुस पाएंगे आंतकी, भारत सरकार करने जा रही यह व्यवस्था
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत सरकार, पाकिस्तान सीमा सहित अन्य सीमाओं पर अधिक प्रभावी बाड़ लगाने जा रही है। पुरानी बाड़ को हटाकर नई बाड़ लगाने का कार्य जारी है। यह बाड़ ऐसी होगी जिसे आतंकी काट नहीं पाएंगे। अक्सर आतंकी घुसपैठ के दौरान बाड़ को काटकर सीमा में प्रवेश करते हैं।
लेकिन अब जो बाड़ या तार लगाई जा रही है, उसे काटना आसान नहीं है। खासतौर पर, कोई भी घुसपैठिया सामान्य औजारों की मदद से उस तार को नहीं काट सकता। एक किलोमीटर में इस बाड़ को लगाने का खर्च 3.50 करोड़ रुपये आ रहा है।
बता दें कि अभी तक बॉर्डर के ज्यादातर हिस्से में जो कंटीली तार लगी है, उसे घुसपैठिये नुकसान पहुंचा देते हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगी सीमा पर ऐसी ही तार लगी है। दोनों ही देशों की सीमाओं पर अनेक घुसपैठिये पकड़े जाते हैं या मारे जाते हैं। बीएसएफ सूत्रों के अनुसार, अब बॉर्डर को पूरी तरह सील करने की योजना पर काम हो रहा है। अभी तक कई हिस्सों में वह तार लगाई जा रही है, जिसे काटना आसान नहीं है।
कम से कम एक-दो आदमी सामान्य औजारों की मदद से उसे नहीं काट सकते। वजह, इस तार से जो बाड़ तैयार की गई है, वह ऐसी है कि जिस पर सामान्य औजार काम नहीं करेगा। तार के बीच जो अंतर रखा गया है, वह इतना कम है कि वहां तक औजार का जाना मुश्किल है। दूसरा तार की क्वालिटी इतनी मजबूत कर दी गई है कि चाह कर भी कोई घुसपैठिया उसे नहीं काट सकेगा।
इसके लिए इजरायली सिस्टम की मदद ली जा रही है
बॉर्डर पर घुसपैठ रोकने के लिए बाड़ लगाने के अलावा स्मार्ट फेंसिंग पर भी काम चल रहा है। इसके लिए इजरायली सिस्टम की मदद ली जा रही है। तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह खुद इजरायल जाकर इस सिस्टम की खूबियां जानकर आए थे। उसके बाद असम के धुबरी जिले में व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआईबीएमएस) लगाने की शुरुआत की गई।
सीआईबीएमएस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिकली क्यूआरटी इंटरसेप्शन टेक्नोलॉजी के जरिए बॉर्डर की सुरक्षा को पुख्ता बनाता है। यह सिस्टम उन जगहों पर लगता है, जहां बाड़ आदि लगाना संभव नहीं होता। बांग्लादेश के साथ लगती 4,096 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपी गई है। इस बॉर्डर पर कई इलाके ऐसे हैं, जहां भौगोलिक बाधाओं के कारण फेंसिंग (बाड़) लगाना संभव नहीं है।
खासतौर पर असम के धुबड़ी जिले का वह 61 किलोमीटर लंबा सीमा क्षेत्र, जहां से ब्रह्मपुत्र नदी बांग्लादेश में प्रवेश करना आरंभ करती है। ब्रह्मपुत्र और उसकी कई सहायक नदियों का विषम परिक्षेत्र सीमा निगरानी को एक मुश्किल और चुनौती भरा कार्य बना देता है। विशेष रूप से बरसात के मौसम में बीएसएफ को घुसपैठ रोकने के लिए बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
असम के अलावा जम्मू में भी इसका ट्रायल शुरू किया गया था
साथ ही पशु तस्कर और दूसरे घुसपैठिये भी बरसात का इंतजार करते रहते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए गृह मंत्रालय ने तीन साल पहले इस तकनीक की मदद लेने का फैसला लिया था। असम के अलावा जम्मू में भी इसका ट्रायल शुरू किया गया था।
बीएसएफ के एक अधिकारी के अनुसार, यह सिस्टम ट्रायल में पास हो गया है। अब इसे बॉर्डर के दूसरे हिस्सों पर भी लगाया जाएगा। पहले यह योजना दस साल में पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे लगाने की समयावधि घटाकर पांच साल कर दी गई है।