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विधानसभा सत्र: विपक्ष के विरोध पर कई मामलों में बचाव की मुद्रा में रही सरकार
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Thu, 30 Jun 2016 08:24 PM IST
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विधानसभा
- फोटो : Amar Ujala
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कुल मिलाकर 32 दिन के कामकाज के बाद विधानसभा सत्र 2016 वीरवार को संपन्न हो गया। सत्र के दौरान एसआरओ 105 (खनन मामले) में सरकार को किरकिरी का सामना करना पड़ा। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से बनाए विधानसभा पैनल ने भी खनन के एसआरओ को विशेषाधिकार का उल्लंघन बताया।
कई दिन तक चले खनन मामले में हंगामे के बाद 25 जून को उद्योग मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा को जियोलाजी एंड माइनिंग निदेशक को भी निलंबन करने की घोषणा करनी पड़ी। 21 जून को सरकार को विपक्ष के कड़े विरोध के बाद अपनी नई औद्योगिक नीति में भी बदलाव करना पड़ा।
विधानसभा सत्र के दौरान 21 जून को विधानसभा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता ने रोशनी एक्ट की जांच के लिए सरकार को कमेटी बनाने के निर्देश जारी किए। वहीं कश्मीर में सैनिक कालोनी के मुद्दे पर विधानसभा में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच जमकर बहस हुई।
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विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने कश्मीर में सैनिक कालोनी के लिए किसी तरह की जमीन देने से इंकार किया। कुल मिलाकर विधानसभा सत्र में सरकार की ओर से 14 बिल पेश किए गए। इनमें 13 बिल पारित हो गए। एक बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया। निजी सदस्य बिल 16 सदन में पेश हुए।
सत्र के दौरान कश्मीर में हिंसा में बढ़ोतरी पर भी जमकर हंगामा हुआ। वहीं भाजपा विधायकों के पीओके में आतंकी शिविरों पर हमले के बयान पर भी खासा हंगामा हुआ। सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विधायक के रूप में शपथ भी ग्रहण की।
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कई दिन तक चले खनन मामले में हंगामे के बाद 25 जून को उद्योग मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा को जियोलाजी एंड माइनिंग निदेशक को भी निलंबन करने की घोषणा करनी पड़ी। 21 जून को सरकार को विपक्ष के कड़े विरोध के बाद अपनी नई औद्योगिक नीति में भी बदलाव करना पड़ा।
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विधानसभा सत्र के दौरान 21 जून को विधानसभा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता ने रोशनी एक्ट की जांच के लिए सरकार को कमेटी बनाने के निर्देश जारी किए। वहीं कश्मीर में सैनिक कालोनी के मुद्दे पर विधानसभा में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच जमकर बहस हुई।
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विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने कश्मीर में सैनिक कालोनी के लिए किसी तरह की जमीन देने से इंकार किया। कुल मिलाकर विधानसभा सत्र में सरकार की ओर से 14 बिल पेश किए गए। इनमें 13 बिल पारित हो गए। एक बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया। निजी सदस्य बिल 16 सदन में पेश हुए।
सत्र के दौरान कश्मीर में हिंसा में बढ़ोतरी पर भी जमकर हंगामा हुआ। वहीं भाजपा विधायकों के पीओके में आतंकी शिविरों पर हमले के बयान पर भी खासा हंगामा हुआ। सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विधायक के रूप में शपथ भी ग्रहण की।