मुफ्ती के पुराने फॉर्मूले पर ही सरकार के गठन के आसार
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जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन के मुद्दे पर कायम अनिश्चितता जल्द खत्म हो सकती है। यह लगभग साफ हो गया है कि राज्य में भाजपा और पीडीपी का गठबंधन बना रहेगा।
भाजपा भी अब मोल-तोल के मूड में नहीं है। नई सरकार के गठन के लिए परस्पर शर्तें थोपने की स्थिति भी अब वजूद में नहीं रह गई है।
पीडीपी सूत्रों के मुताबिक मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद पार्टी ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहती, जिससे उनके विजन कश्मीर की भावना को कहीं से भी ठेस पहुंचे।
पार्टी ने पूरी तरह एकजुट होकर महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में आस्था जताई है और महबूबा ने अपने पिता के पथ पर ही चलने का संकेत दिया है। शोक के माहौल के कारण सियासी गतिविधियां आगे नहीं बढ़ सकी हैं।
अब राज्यपाल शासन लग चुका है इसलिए महबूबा किसी तरह की जल्दबाजी में भी नहीं हैं। दो-तीन दिन बाद जम्मू में भाजपा और पीडीपी के बीच बातचीत के बाद सरकार बनाने का दावा पेश किया जा सकता है।
मुफ्ती के विजन पर ही आगे बढ़ने के संकल्प पर कायम
महबूबा की अपने सभी विधायकों और सांसदों के साथ मुलाकात हो चुकी है। उन्होंने विधायकों, सांसदों और पार्टी पदाधिकारियों से भर्राये गले से कहा कि उन्हें पहले से अधिक सबके सहयोग की जरूरत होगी।
पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं ने उनके नेतृत्व में आस्था जताई। दरअसल, महबूबा और पूरी पार्टी मुफ्ती के विजन पर ही आगे बढ़ने के संकल्प पर कायम है।
जम्मू में भाजपा को और कश्मीर में पीडीपी को जनादेश मिलने के बाद मुफ्ती ने जनादेश के पालन के लिए भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने का निर्णय लिया था।
पीडीपी और भाजपा के समक्ष साथ चलने के अलावा फिलहाल कोई दूसरा सशक्त विकल्प भी नहीं है। पीडीपी नेतृत्व को पता है कि कांग्रेस के साथ सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ा तो हासिल किया जा सकता है लेकिन उससे बनी सरकार स्थायी नहीं हो सकती।