सरकार ने बजट में किए हैं ये प्रावधान पर खाली है खजाना, पढ़ें पूरी खबर
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जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने नए बजट में बेहतर बजटीय प्रबंधन की व्यवस्था तो की है, लेकिन आंतरिक संसाधन बढ़ाने का कोई ठोस इंतजाम नहीं हो पाया है। खाली खजाने के बूते सोने के महल के हसीन सपने को जमीं पर उतारना चुनौतीपूर्ण होगा।
द्राबू के बजट भाषण में भी कश्मीर में अनिश्चितता के माहौल की चिंता नजर आई। बजट में कई नई व्यवस्था है जो अन्य राज्यों और केंद्र सरकार के लिए भी अनुकरणीय हो सकती है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण इन फैसलों को रियासत में पूरी तरह लागू करने में दिक्कतें पेश आएंगी।
द्राबू की सफलता है कि उन्होंने कर्मचारी वर्ग को सातवें वित्त आयोग पर सवा साल के इंतजार के लिए राजी कर लिया है। अब कर्मचारी को केंद्र के समान वेतनमान का फायदा एक अप्रैल 2018 से ही मिल पाएगा।
बजट के नए प्रावधानों की सफलता संसाधनों पर निर्भर
कैजुअल वर्करों को नियमित करने का एलान हुआ है, लेकिन यह निर्णय भी चरणबद्ध तरीके से ही लागू हो सकेगा। बजट में ट्रेजरी सिस्टम को खत्म करने का एलान नया है। वेतन और लेखा विभाग इसकी जगह लेगा। इस बार जनवरी में बजट पेश कर द्राबू ने कहा कि 10 फरवरी तक बजट की आधी राशि जारी कर दी जाएगी और 20 फरवरी तक यह विभागों को मिल जाएगा। मई तक हर प्रोजेक्ट की टेंडरिंग हो जाएगी। इस तरह नए वित्त वर्ष के लिए पहले दिन एक अप्रैल से ही काम हो सकेगा।
बजट के नए प्रावधानों की सफलता संसाधनों पर निर्भर करेगी, लेकिन आंतरिक संसाधन बढ़ाने को कोई ठोस व्यवस्था बजट में नहीं दिखती है। आलम यह है कि जम्मू कश्मीर के बजट का 43 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय अनुदान पर निर्भर है और केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में 13 प्रतिशत को इसमें जोड़ दें तो 56 फीसदी राशि के लिए रियासत को केंद्र का मुंह ताकना पड़ेगा।
राज्य अपने करों और अन्य स्रोतों से सिर्फ 20 प्रतिशत राशि का ही इंतजाम कर सकता है। इस तरह 24 प्रतिशत राशि कर्ज से जुटानी होगी। आमदनी और कर्ज में 4 हजार करोड़ का अंतर है, जिसकी भरपाई के लिए बजट में कोई जिक्र नहीं है।
80 हजार करोड़ के बजट में वेतन और पेंशन पर 31% हिस्सा
कुल 80 हजार करोड़ के बजट में से वेतन और पेंशन पर 31 प्रतिशत हिस्सा चला जाएगा। कर्ज के सूद 6 प्रतिशत लील लेगा। पूंजीगत स्थापना खर्च 39 प्रतिशत और अन्य खर्च 12 प्रतिशत है। रियासत के पास बिजली उत्पादन की भरपूर संभावनाएं हैं, लेकिन इस बार भी बिजली खरीद पर बजट का 12 प्रतिशत धन खर्चना पड़ेगा।
बजट पेश करने के बाद उत्साह में वित्त मंत्री द्राबू ने आंगनबाड़ी और केंद्र के अन्य प्रोजेक्टों के कर्मचारियों को समय पर वेतन देने का भी एलान किया है, लेकिन जरूरी आंतरिक संसाधनों की बढ़ोतरी पर बजट मौन है।