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कश्मीर में शांति के लिए अलगाववादियों से हो सकती है बातचीत

Thu, 18 Aug 2016 11:20 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/श्रीनगर
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Thu, 18 Aug 2016 11:20 AM IST
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Government can negotiate with separatists
राजनाथ सिंह - फोटो : File Photo
केंद्र सरकार ने पाकिस्तान को करारा जबाब देने के साथ-साथ कश्मीर में अमन बहाली की कवायद भी तेज कर दी है। आतंकी बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से घाटी में जारी हिंसा के बाद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
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आतंकी गुटों ने आम कश्मीरियों को भड़काना शुरू किया है और इस पूरी साजिश के लिए पाकिस्तान द्वारा फंडिंग किए जाने की बात भी उजागर हुई है। लिहाजा, शांति बहाली के लिए अलगाववादी गुटों से बंद और प्रदर्शनों को वापस लेकर अमन की अपील के लिए प्रयास शुरू हुए हैं। अगर प्रयास सफल हुआ तो केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अलगाववादियों से बातचीत हो सकती है।
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शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक मध्यस्थों के जरिए अलगाववादी गुटों से संपर्क साधा जा रहा है।  मध्यस्थ के जरिए सबसे पहले हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी नेता मीरवाइज उमर फारूक से बातचीत संभव है।
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वाजपेयी के शासनकाल में अलगावववादियों से हुई थी बातचीत

Government can negotiate with separatists
घाटी में हिंसा - फोटो : PTI
सैयद अली शाह गिलानी ज्यादा कट्टर माने जाते हैं लिहाजा, उनसे सबसे अंत में संपर्क किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कश्मीर नीति पर चलने का एलान किया है जिसमें इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत की नीति को कश्मीर मसले के समाधान का आधार बनाया गया है। वाजपेयी के शासनकाल में केंद्र ने अलगाववादियों से बातचीत की थी।  

अलगाववादियों से बातचीत के लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती लगातार केंद्र पर दबाव बना रहीं हैं। महबूबा के  दिल्ली दौरे में यह मुद्दा केंद्र से बातचीत के प्रमुख एजेंडे में शुमार रहा। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत को संविधान के दायरे में ही करने पर ही सहमति जताई है। लिहाजा, कश्मीर में अमन बहाली के लिए अपील पर यह बातचीत केंद्रित हो सकती है।

विपक्षी दल भी बातचीत के पक्ष में

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घाटी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम - फोटो : PTI
अलगाववादी गुट कश्मीर मुद्दे पर भी बातचीत करना चाहते हैं। केंद्र इस पर सहमत नहीं है।

इस कारण उत्पन्न गतिरोध के बाद मीरवाइज उमर फारूक ने श्रीनगर स्थित संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय तक मार्च की असफल कोशिश की। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर से भी अलगाववादियों से शांति बहाली में सहयोग के लिए बातचीत की जा रही है।

उधर, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों ने भी अलगाववादियों से बातचीत पर जोर दिया है। वामपंथी दल भी इसकी वकालत कर रहे हैं। केंद्र अमन बहाली के लिए वार्ता पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है। 
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