डाक्टरों की हडताल से जम्मू में हाहाकार, इमरजेंसी ठप
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पीजी डाक्टरों और रजिस्ट्रारों की वीरवार दूसरे दिन भी हड़ताल से जीएमसी में हाहाकार रहा। इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे मरीज बेहाल रहे। इमरजेंसी में डाक्टरों की कमी से जीएमसी में सब्जी मंडी जैसा माहौल रहा। जनरल वार्डों और इमरजेंसी से कई तीमारदारों को इलाज के लिए अपने मरीजों को निजी क्लीनिकों में ले जाना पड़ा।
हड़ताल का शहर के दूसरे बड़े जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस पर भी असर दिखा। यहां ओपीडी के बाद पीजी डाक्टरों ने कामकाज ठप कर दिया। दो दिन से हड़ताल के दौरान इमरजेंसी में पहुंचे सात से आठ गंभीर मरीजों की मौत हो चुकी है।
इस बीच, जीएमसी प्रशासन और हड़ताली डाक्टरों के बीच वीरवार को हुई दो राउंड वार्ता विफल रही। हड़ताली डाक्टरों का प्रतिनिधित्व कर रहे डॉ. नीरज शर्मा ने साफ किया है कि उनकी मांगें न माने जाने तक हड़ताल जारी रहेगी।
पीजी डाक्टरों और रजिस्ट्रारों की हड़ताल से दूसरे दिन जीएमसी में हालात ज्यादा खराब हो गए। सीनियर कंसलटेंटों और अन्य फैकल्टी सदस्यों ने इमरजेंसी सहित अन्य यूनिटों में मोर्चा जरूर संभाला था, मगर डाक्टरों की कमी का असर साफ दिखा।
इमरजेंसी में मरीजों की भरमार
इमरजेंसी में मरीजों की भरमार थी। सभी को तत्काल इलाज देने के लिए डाक्टरों की संख्या कम पड़ गई। सीनियर डाक्टरों को दिखाने की होड़ में मरीजों और तीमारदारों की भारी भीड़ लगी रही। जनरल वार्डों में भी हड़ताल का जबरदस्त असर दिखा।
अमूमन सीनियर फैकल्टी के साथ पीजी डाक्टर राउंड पर रहते हैं। लेकिन, हड़ताल के कारण मार्निंग और वेट में कंसलटेंटों के व्यस्त रहने से वार्डों में मरीजों को ज्यादा समय नहीं दिया जा रहा है। इक्का दुक्का रुटीन आपरेशन छोड़कर बाकी सभी आपरेशन स्थगित कर दिए गए।
यही हाल ओपीडी का रहा। इस बीच, एसएमजीएस अस्पताल में भी पीजी डाक्टरों और रजिस्ट्रारों ने कामकाज ठप रखा। एसएमजीएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. दारा सिंह का कहना है कि ओपीडी के बाद पीजी डाक्टरों ने कामकाज बंद किया था।
लेकिन, शाम को कुछ लौट आए। डाक्टरों की हड़ताल पर जीएमसी प्रशासन भी सख्ती पर आ गया है। सभी एचओडी से ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहे डाक्टरों की सूची मांगी गई है।