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स्मार्ट सिटी का हाल : ढाई घंटे फंसा रहा पैर, लोगों ने जंगला काटकर निकाला
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- बाजार में सामान लेने आई सरिता जंगले में फंसकर घंटों दर्द से कराहती रही, घुटने में सूजन और पैर में हुआ जख्म
क्षेत्रवासियों ने कहा, पहले भी जंगले में कई बच्चे और राहगीर गिरकर घायल हो चुके
अमित कुमार
जम्मू। स्मार्ट सिटी के तहत पूरे शहर में करोड़ों रुपये की परियोजनाओं पर काम हो रहा है। इनमें खासतौर पर शहर में नालियों में निकासी को सुचारू बनाने के लिए नए ड्रेनेज बनाकर जंगले डाले जा रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं।
कई जगह क्षतिग्रस्त जंगले लोगों की जान पर बन रहे हैं। शहर के सराजा ढक्की स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के सामने शुक्रवार की दोपहर एक जंगले में एक युवती का घुटने तक पैर ढाई घंटे तक फंसा रहा, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने जंगले को काटकर युवती को बाहर निकाला। इससे उसके पैर और घुटने में गंभीर चोट आई। बख्शी नगर निवासी सरिता बाजार में सामान खरीदने के लिए आई थी। वह आम राहगीरों की तरह सड़क पर जा रही थी। सराजा ढक्की के पास स्थापित जंगले को देखकर उसे लगा कि जंगला ठीक है और वह सीधी चलती गई, लेकिन अचानक उसका पैर जंगले में फंस गया।
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शरीर के वजन के साथ वह जंगले में घुटने तक फंस गई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने जंगले से पैर को निकालने की काफी कोशिश की, लेकिन घुटने तक पैर नीचे चले जाने से वह फंस गया था। इस बीच सरिता दर्द से कराहती रही। कुछ लोगों ने उसे पानी लाकर दिया। लेकिन जंगले से उसे बाहर नहीं निकाला जा सका। उस समय बिजली भी बंद थी। फिर पीर मिट्ठा से एक कटर वाले को बुलाया गया, एक जनरेटर सेट का इंतजाम किया गया। जिसके बाद जंगले को काटने की कसरत शुरू की गई। इस बीच बाजार में भारी जमावड़ा लग गया था। हर कोई युवती के फंसे होने पर अव्यवस्था के प्रति रोष जता रहा था।
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दोपहर 1.30 बजे जंगले में फंसे पैर को करीब 4.00 बजे पर बाहर निकाला जा सका। इसमें पहले जंगले के एक हिस्से को काटा गया, जिसके बाद दूसरे हिस्से को भी काटकर पैर को बाहर निकाला गया। बाहर निकालने पर युवती मुश्किल से चल रही थी। उसके पैर में जख्म और घुटने में सूजन आ गई थी। सरिता के साथ आई अन्य युवती पिंकी ने बताया कि यह जंगला उनके लिए आज आफत बन गया है। इस तरह के जंगले आवाजाही के लिए बेहद खतरनाक हैं। जंगले पर अब मलबे की बोरियां रख दी हैं, ताकि उस पर से लोग निकल सकें। स्थानीय दुकानदार विजय पुरी ने बताया उक्त जंगले में पहले भी कई बच्चे और राहगीर गिरकर घायल हो चुके हैं। जंगले के नीचे गहराई अधिक है, जिससे खासतौर पर छोटे बच्चों को अधिक खतरा रहता है।
एक अन्य दुकानदार विक्की ने बताया कि यह सरासर निगम की लापरवाही है। ऐसे जंगले किसी की जान के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं। स्थानीय निवासी अखिल गुप्ता ने कहा कि शहर के अन्य इलाकों में भी दर्जनों जंगले खस्ताहाल और क्षतिग्रस्त हैं। जिसमें आए दिन राहगीरों और जानवरों के गिरने की आशंका बनी रहती है। नगर निगम को तत्काल ऐसे जंगलों की मरम्मत करवाकर उन्हें ऊपर से बंद करवाना चाहिए।
क्षतिग्रस्त जंगलों को बदला जाएगा : सचिव
नगर निगम के सचिव चांद सिंह का कहना है कि अगर उन्हें जंगला खराब होने की शिकायत दी जाती तो उसकी मरम्मत या उसे बदल दिया जाता है।