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Azad Resignation: डोडा के ब्लॉक से दिल्ली की दहलीज तक बजाया डंका, पांच दशक तक की कांग्रेस की सक्रिय राजनीति

Sat, 27 Aug 2022 03:00 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 27 Aug 2022 03:00 AM IST
सार

गुलाम नबी आजाद ने 1973 में डोडा जिले के भलेसा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद उनकी सक्रियता और शैली को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें युवा कांग्रेस का अध्यक्ष चुना। उन्होंने महाराष्ट्र से 1980 में पहला संसदीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

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Ghulam Navi Azad did active politics of Congress for five decades
गुलाम नबी आजाद - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अटकलों के बीच गांधी परिवार के बेहद करीबी दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। समय के साथ कांग्रेस में बदलावों के बाद वह पार्टी में जी-23 गुट के प्रमुख नेता के रूप में उभरे। राजनीति में उनके अनुभव और कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जम्मू-कश्मीर सहित देश के करीब सभी राज्यों में उनकी सक्रियता रही है।

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मार्च 2022 में गुलाम नबी आजाद को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद्मभूषण मिला। 1973 में गुलाम नबी आजाद ने डोडा जिले के भलेसा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद उनकी सक्रियता और शैली को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें युवा कांग्रेस का अध्यक्ष चुना।
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उन्होंने महाराष्ट्र से 1980 में पहला संसदीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 1982 में उन्हें केंद्रीय मंत्री के रूप में कैबिनेट में शामिल किया गया। डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली दूसरी यूपीए सरकार में आजाद ने देश के स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभाला था।
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इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का विस्तार किया। साथ ही झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले शहरी गरीबों की सेवा के लिए एक राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन भी शुरू किया। आजाद ने कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले हैं। नरसिंह राव की सरकार में संसदीय कार्य और नागरिक उड्डयन मंत्री भी रहे। 

2005 में बने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री

गुलाम नबी आजाद के राजनीतिक जीवन में 2005 में वह स्वर्णिम समय भी आया जब उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री जम्मू-कश्मीर की सेवा की। आजाद के जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में 21 सीटों पर जीत का परचम लहराया था। इसके परिणाम स्वरूप कांग्रेस प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी थी। 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन के चलते उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था। 

सियासी सफर

  • 2008: भद्रवाह से जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। दया कृष्ण को 29936 मतों के अंतर से हराया
  • 2009: चौथे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए चुने गए और बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के रूप में नियुक्ति मिली
  • 2014: राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे
  • 2015: पांचवीं बार राज्यसभा के लिए फि र से चुने गए 
  • 1980: गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर राज्य की यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए
  • 1982: गुलाम नबी आजाद विधि मंत्रालय में उप मंत्री के पद पर चुने गए
  • 1984: आठवीं लोकसभा के लिए भी चुने गए
  • 1985-89: केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय में उप मंत्री रहे
  • 1990-1996: आजाद राज्यसभा के सदस्य रहे

   

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