फारूक अब्दुल्ला को गुलाम नबी आजाद ने दिया ये सुझाव, बोले- ऐसे तो भाजपा को फ्री हैंड दे रहे हैं
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने नेकां(नेशनल कांफ्रेंस) को परिसीमन आयोग की बैठक में शामिल होकर जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व करने का सुझाव दिया है। हाल ही में हुई आयोग की पहली बैठक में नेकां सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला, मोहम्मद अकबर लोन और हसनैन मसूदी ने बहिष्कार किया था।
आजाद ने कहा कि एक अच्छे संकेत के साथ नेकां सांसदों को परिसीमन आयोग की बैठक में प्रभावी ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए। डॉ. फारूक अब्दुल्ला आयोग की बैठक का हिस्सा बनें। वह बैठक में शामिल न होकर भाजपा को फ्री हैंड दे रहे हैं।
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नेकां के वरिष्ठ नेता हसनैन मसूदी परिसीमन प्रक्रिया को अवैध बता चुके हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को संविधान के प्रावधानों के खिलाफ बताया है। गुरुवार को आयोग की हुई पहली बैठक में जम्मू-कश्मीर के सांसदों और अन्य संबंधित अधिकारियों से परिसीमन पर सुझाव और विचार लिए गए थे। पिछले साल केंद्र ने परिमीसन आयोग का गठन किया था। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद परिसीमन प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।
पूरे देश में परिसीमन होता तो खुशी-खुशी शामिल होती नेशनल कांफ्रेंस- फारुक अब्दुल्ला
बता दें कि परिसीमन आयोग की बैठक में शामिल न होने पर फारुक अब्दुल्ला कह चुके हैं पांच अगस्त 2019 को जो कुछ भी किया गया उसे हम स्वीकार नहीं करते हैं। यदि वह स्वीकार नहीं तो परिसीमन आयोग को कैसे स्वीकार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने 2026 तक परिसीमन स्थगित किया था तो आखिर क्या कारण है कि पूरे देश की बजाय कुछ राज्यों को इसके लिए चुना गया। यदि पूरे देश में परिसीमन होता तो नेशनल कांफ्रेंस खुशी-खुशी इसका हिस्सा बनती लेकिन जानबूझकर जम्मू-कश्मीर को चुना गया। इस वजह से वे साथ नहीं हैं।
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