जम्मू श्रीनगर हाइवे पर भूस्खलन रोकने की कवायद
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जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के विस्तारीकरण के लिए भूवैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया हाईवे को फोरलेन करने से पहले भूवैज्ञानिकों के सुझाव लेगी। नेशनल हाईवे को हर साल पस्सियों की चुनौती का सामना करना पड़ता है।
खासकर, उधमपुर और रामबन जिले में बारिश और भूस्खलन से कब यातायात ठप हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इस पर्वतीय इलाके में हाईवे विस्तारीकरण के लिए पहाड़ों को काटने की मजबूरी परेशानी को बढ़ाने का काम कर रही है।
जम्मू से उधमपुर तक हाईवे विस्तारीकरण का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन अब उधमपुर से श्रीनगर तक के विस्तारीकरण बाकी है।
उधमपुर और रामबन जिले भूस्खलन के लिहाज से सबसे संवेदनशील
उधमपुर और रामबन जिले में कई ऐसे स्थान हैं जहां पहले से ही भूस्खलन की चुनौती खड़ी है। विस्तारीकरण की वजह से इस समस्या का बढ़ना तय है।
हाईवे अथॉरिटी के सूत्रों ने बताया कि भूस्खलन को रोकने के लिए हाईवे अथॉरिटी कई तरह के उपाय करती है, लेकिन पहाड़ों की ढलान पर जाल बिछाने सहित अन्य उपायों के बावजूद हाईवे की राह से भूस्खलन का रोड़ा हटने का नाम नहीं ले रहा।
उधमपुर और रामबन जिले में चूंकि भूस्खलन का खतरा सबसे अधिक है, लिहाजा इसमें भूविज्ञान विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
एनएचएआई के जम्मू प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरपी सिंह ने बताया कि हाईवे अथॉरिटी द्वारा किए जाने वाले कृत्रिम उपाय काम नहीं आ रहे हैं।