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तमाम कोशिशों के बावजूद मरीजों तक नहीं पहुंच पा रही हैं जेनेरिक दवाएं
amarujala.com- Presented by: श्रेयांश त्रिपाठी
Updated Tue, 25 Apr 2017 04:31 PM IST
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मजबूरन खरीदनी पड़ रही है महंगी दवाएं
- फोटो : डेमो फोटो
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राज्य सरकार के दावों के बावजूद मरीजों तक सस्ती जेनेरिक दवाइयां नहीं पहुंच रही हैं। उन्हें डाक्टरों द्वारा चिकित्सा पर्ची पर लिखी ब्रांडेड कंपनी की ही महंगी दवाई को मजबूरन बाजार से खरीदना पड़ रहा है। बाजार में सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों की जेब पर इलाज का बोझ बढ़ रहा है। पर्ची में कैपिटल लेटर में चिकित्सा सलाह लिखने को भी तवज्जो नहीं दी जा रही है।
मरीजों की जेब पर बोझ कम करने के उद्देश्य से जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा दिया गया है, लेकिन कमीशन के चक्कर में अभी भी ब्रांडेड कंपनियों का ही दबदबा बना हुआ है। डाक्टर को पर्ची पर जेनेरिक दवाई में उसका साल्ट लिखकर देना होता है। इस साल्ट से बाजार में विभिन्न किस्म की कंपनियों की सस्ती दवाएं उपलब्ध हो जाती हैं, लेकिन अगर यही साल्ट किसी ब्रांडेड कंपनी के नाम से लिखकर दिया जाता है तो उस दवा की कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
डाक्टरों का तर्क है कि कई मरीजों को मल्टी कंबिनेशन दवाओं की जरूरत पड़ती है। इसमें गंभीर मरीजों के लिए जेनेरिक दवाओं में उन्हें बड़ी संख्या में साल्ट संबंधी दवाइयां लेनी पड़ती हैं, लेकिन कई कंपनियां वही दवाई एक ही दवा में मिश्रण के तौर पर बनाती हैं। मरीज को कम दवाइयां देना प्राथमिकता में रहता है।
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जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के अधीन तीन सौ से अधिक जेनेरिक दवाओं को मंजूरी दी गई है। इन्हें रियासत के चिकित्सा केंद्रों में सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन मरीजों की अक्सर शिकायत रही है कि उन्हें डाक्टर द्वारा बाजार से ही अधिकांश दवाई लिखकर दी जाती हैं।
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मरीजों की जेब पर बोझ कम करने के उद्देश्य से जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा दिया गया है, लेकिन कमीशन के चक्कर में अभी भी ब्रांडेड कंपनियों का ही दबदबा बना हुआ है। डाक्टर को पर्ची पर जेनेरिक दवाई में उसका साल्ट लिखकर देना होता है। इस साल्ट से बाजार में विभिन्न किस्म की कंपनियों की सस्ती दवाएं उपलब्ध हो जाती हैं, लेकिन अगर यही साल्ट किसी ब्रांडेड कंपनी के नाम से लिखकर दिया जाता है तो उस दवा की कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
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डाक्टरों का तर्क है कि कई मरीजों को मल्टी कंबिनेशन दवाओं की जरूरत पड़ती है। इसमें गंभीर मरीजों के लिए जेनेरिक दवाओं में उन्हें बड़ी संख्या में साल्ट संबंधी दवाइयां लेनी पड़ती हैं, लेकिन कई कंपनियां वही दवाई एक ही दवा में मिश्रण के तौर पर बनाती हैं। मरीज को कम दवाइयां देना प्राथमिकता में रहता है।
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जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के अधीन तीन सौ से अधिक जेनेरिक दवाओं को मंजूरी दी गई है। इन्हें रियासत के चिकित्सा केंद्रों में सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन मरीजों की अक्सर शिकायत रही है कि उन्हें डाक्टर द्वारा बाजार से ही अधिकांश दवाई लिखकर दी जाती हैं।