25 फीसदी ईंधन की जरूरत पूरा करेगी गैस पाइपलाइन
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ईंधन संकट के तुरत-फुरत समाधान और रोजगार की संभावना लेकर आ रही गैस पाइपलाइन परियोजना कठुआ सहित पूरी रियासत के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। जम्मू-कश्मीर में गैस पाइपलाइन का जाल बिछाने के मद में करीब एक हजार करोड़ की भारी भरकम राशि खर्च होगी।
रियासत की ईंधन की कुल मांग का पच्चीस फीसदी हिस्सा सप्लाई करने में सक्षम परियोजना कई मायनों में तकनीक और उपयोगिता के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। पूरी तरह से प्रदूषण रहित और इको फ्रेंडली परियोजना रियासत में मूर्त रूप लेने के बाद गैस सिलेंडर की व्यवस्था को खत्म कर देगी।
सीधा घरों तक जरूरत के मुताबिक गैस पहुंचाने में सक्षम इस परियोजना के तहत किसी भी मौसम में गैस सप्लाई करते रहने का सुविधा है। रियासत के प्रवेश जिला कठुआ से लेकर जम्मू और उसके बाद श्रीनगर तक बिछने जा रही पाइप लाइन पर एक हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
कठुआ में 36.92 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन पर 127 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जिले के निहालपुर गांव में गैस पाइपलाइन का स्टेशन स्थापित होगा, जबकि सांबा जिले के नारन, बढेरी, रख अंब टाली और स्मैलपुर में कुल चार स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके बाद आपूर्ति तंत्र को चरणवार रूप से विकसित किया जाएगा।
गैस पाइपलाइन परियोजना को जल्द पूरा करने पर जोर
पंजाब के भटिंडा से जम्मू तक प्रस्तावित गैस पाइपलाइन परियोजना को मूर्त रूप देने की कवायद तेज हो गई है। बुधवार को गैस पाइपलाइन परियोजना के लिए चल रहे कार्यों पर समीक्षा बैठक हुई। इसमें कार्य को तेजी से निपटाने पर जोर दिया गया। जिला प्रशासन के साथ निर्माण एजेंसी जीएसपीएल के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक में पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से परियोजना के लिए किए जा रहे कार्यों पर चर्चा की गई।
बैठक में गैस पाइप लाइन बिछाने के लिए भूमि अधिग्रहण की ताजा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। जिला प्रशासन की ओर से बैठक का नेतृत्व करते हुए नवनियुक्त असिस्टेंट कमिश्नर रेवेन्यू अतुल गुप्ता ने इस मसले पर राजस्व विभाग की ताजा रिपोर्ट हासिल की। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए कठुआ जिले की हद में आने वाले 51 गांवों की भूमि पाइपलाइन बिछाने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
इसमें से 50 गांवों में भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है। हीरानगर सब डिवीजन के पथवाल गांव में भूमि अधिग्रहण के लिए भी दस्तावेज तैयार कर लिए गए हैं। बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि गैस पाइपलाइन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण जम्मू-कश्मीर के राइट टू यूजर्स एक्ट की धारा 3 के तहत किया जा रहा है। जम्मू तक के फासले में कठुआ और सांबा जिलों के गांव आ रहे हैं।
गौरतलब है कि गैस पाइपलाइन परियोजना के रूट पर कई दफा पेच फंस चुका है। पूर्व में पाइपलाइन का रूट नेशनल हाईवे की ओर शिफ्ट करने का प्रस्ताव लाया गया था, जिसे निर्माण एजेंसी के तकनीकी विंग ने नकार दिया था। वर्तमान में पाइपलाइन के लिए निचले मैदानी इलाके के गांवों को भी चुना गया है।
कठुआ से जम्मू पहुंचेगी पाइपलाइन
निर्माण एजेंसी जीएसपीएल के सूत्रों मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में प्रस्तावित कार्य के तहत गैस पाइपलाइन भटिंडा से कठुआ पहुंचेगी, जिसके बाद इसे सांबा और जम्मू पहुंचाया जाएगा। राज्य के पर्वतीय इलाकों के लिए पाइप लाइन का रूट सांबा से मानसर मार्ग, उधमपुर, रामबन, अनंतनाग और श्रीनगर तक कवर किया जाएगा।
स्काडा सिस्टम संभालेगा मॉनीटरिंग का मोर्चा
गैस पाइपलाइन परियोजना की निगरानी में अव्वल दर्जे की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। स्काडा सिस्टम यानी सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वीजीशन तकनीक से पूरी पाइपलाइन की कड़ी निगरानी होगी। इस सिस्टम के तहत कम्युनिकेशन चैनल पर लगातार कोड सिग्नल प्रदर्शित होते हैं।
आपात स्थिति में वॉल्व लीक होने जैसी घटना की संभावना बनते हुए स्काडा सिस्टम संदेश भेज देगा और समय रहते मरम्मत कार्य को सुनिश्चित कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि गैस पाइपलाइन के लिए भूमि का अधिग्रहण बीस मीटर चौड़ाई में किया जाता है।