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39 फुट ऊंचे पंडाल में विराजेंगे बप्पा, मुंबई से आज पहुंचेगी 16 फुट की प्रतिमा
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जम्मू। 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत 31 अगस्त से होगी। कोविड के चलते दो साल बाद बड़े स्तर गणेशोत्सव मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां मंदिरों में शहरों में जोरशोर से जारी हैं। शहर में मुख्य कार्यक्रम गोल मार्केट गांधीनगर में होगा। यहां पर 39 फुट ऊंचे पंडाल में गणपति बप्पा विराजेंगे। पंडाल सोमवार तक तैयार हो जाएगा। मंगलवार को बप्पा पंडाल में विराजेंगे और 31 अगस्त से नौ सितंबर तक गणेशोत्सव होगा।
बप्पा की 16 फुट ऊंची प्रतिमा मुंबई से मंगवाई है, जो सोमवार शाम को जम्मू पहुंचेगी। 31 अगस्त बुधवार को मूर्ति की स्थापना सुबह 10 से 12:45 बजे तक होगी। इसके बाद गणेश पुराण कथा और यज्ञ होगा, जिसमें आठ सितंबर को पूर्णाहुति डाली जाएगी। नौ सितंबर को प्रात 10:30 बजे गणेश मूर्ति विजर्सन होगा। इसी दिन शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। गणेशोत्सव में प्रतिदिन रात आठ से 11 बजे तक गणेश लीला, भजन संध्या होगी, जबकि प्रतिदिन सुबह आठ से शाम आठ बजे तक गणेश आरती की जाएगी। भारतीय वैदिक संस्थान द्वारा गणोशोत्सव का आयोजन करवाया जा रहा है। संस्था के सदस्य संजय शास्त्री ने बताया कि कोविड के दो साल बाद गणेशोत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाएगा, जिसको लेकर लोगों में उत्साह है। गोल मार्केट गांधीनगर में विशाल पंडाल तैयार हो रहा है। इसमें प्रदेश की सबसे बड़ी 16 फुट की गणेश प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
मराठा समाज 2004 से मना रहा है गणेशोत्सव
पुराने शहर स्थित लक्ष्मी नरायण मंदिर में भी 10 दिवसीय गणेशोत्सव का आयोजन होगा। यहां पर छह फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मूर्ति महाराष्ट्र से लाई गई है। इसमें गणेश कथा व अन्य धार्मिक कार्यक्रम होंगे। जय महाराष्ट्र गणेश मंडल गणेशोत्सव आयोजित करवाते है। मंडल सदस्य सन्नी शिंदे ने बताया कि 2004 से गणेशोत्सव मन रहे है। जम्मू में बड़ी संख्या में मराठा समुदाय के लोग रहते हैं। हमने जम्मू में गणेशोत्सव मनाने की परंपरा शुरू की थी, जिसके बाद शहर में विभिन्न स्थानों पर गणेशोत्सव मनाया जाता है।
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श्री गणेशोत्सव 31 से, शुभ मुहूर्त में करें पूजन
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को कलंक चतुर्थी, पत्थर चौथ एवं अन्य नामों से जाना जाता है। महंत रोहित शास्त्री के अनुसार इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी और सिद्धि विनायक का व्रत 31 अगस्त बुधवार को है। शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्र पद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न काल में हुआ था। इसीलिए दोपहर का समय गणेश पूजा के लिए उपयुक्त है। 31 अगस्त को दोपहर 03:23 मिनट बजे तक भद्रा काल रहेगा। धर्मग्रंथों के अनुसार जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु और मकर राशि में रहे तो भद्रा पाताल लोक की होती है। इस दौरान शुभ कार्य कर सकते हैं। 31 अगस्त बुधवार को भद्रा तुला और कन्या राशि में है इसलिए गणेश चतुर्थी पर भद्रा का गणपति के पूजन एवं स्थापना पर कोई प्रभाव नहीं रहेगा। अगर मध्याह्न काल में पूजन करना चाहते हैं तो सुबह 11:04 मिनट बजे से दोपहर 01:43 मिनट के मध्य का समय उचित है। श्री गणेश चतुर्थी का त्योहार देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। श्रीगणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेशोत्सव मनाया जाता है। कुछ भक्त तीन या पांच दिन के लिए गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं। लेकिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की श्रीगणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक यह उत्सव मनाना चाहिए।
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बप्पा की 16 फुट ऊंची प्रतिमा मुंबई से मंगवाई है, जो सोमवार शाम को जम्मू पहुंचेगी। 31 अगस्त बुधवार को मूर्ति की स्थापना सुबह 10 से 12:45 बजे तक होगी। इसके बाद गणेश पुराण कथा और यज्ञ होगा, जिसमें आठ सितंबर को पूर्णाहुति डाली जाएगी। नौ सितंबर को प्रात 10:30 बजे गणेश मूर्ति विजर्सन होगा। इसी दिन शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। गणेशोत्सव में प्रतिदिन रात आठ से 11 बजे तक गणेश लीला, भजन संध्या होगी, जबकि प्रतिदिन सुबह आठ से शाम आठ बजे तक गणेश आरती की जाएगी। भारतीय वैदिक संस्थान द्वारा गणोशोत्सव का आयोजन करवाया जा रहा है। संस्था के सदस्य संजय शास्त्री ने बताया कि कोविड के दो साल बाद गणेशोत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाएगा, जिसको लेकर लोगों में उत्साह है। गोल मार्केट गांधीनगर में विशाल पंडाल तैयार हो रहा है। इसमें प्रदेश की सबसे बड़ी 16 फुट की गणेश प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
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मराठा समाज 2004 से मना रहा है गणेशोत्सव
पुराने शहर स्थित लक्ष्मी नरायण मंदिर में भी 10 दिवसीय गणेशोत्सव का आयोजन होगा। यहां पर छह फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मूर्ति महाराष्ट्र से लाई गई है। इसमें गणेश कथा व अन्य धार्मिक कार्यक्रम होंगे। जय महाराष्ट्र गणेश मंडल गणेशोत्सव आयोजित करवाते है। मंडल सदस्य सन्नी शिंदे ने बताया कि 2004 से गणेशोत्सव मन रहे है। जम्मू में बड़ी संख्या में मराठा समुदाय के लोग रहते हैं। हमने जम्मू में गणेशोत्सव मनाने की परंपरा शुरू की थी, जिसके बाद शहर में विभिन्न स्थानों पर गणेशोत्सव मनाया जाता है।
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श्री गणेशोत्सव 31 से, शुभ मुहूर्त में करें पूजन
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को कलंक चतुर्थी, पत्थर चौथ एवं अन्य नामों से जाना जाता है। महंत रोहित शास्त्री के अनुसार इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी और सिद्धि विनायक का व्रत 31 अगस्त बुधवार को है। शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्र पद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न काल में हुआ था। इसीलिए दोपहर का समय गणेश पूजा के लिए उपयुक्त है। 31 अगस्त को दोपहर 03:23 मिनट बजे तक भद्रा काल रहेगा। धर्मग्रंथों के अनुसार जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु और मकर राशि में रहे तो भद्रा पाताल लोक की होती है। इस दौरान शुभ कार्य कर सकते हैं। 31 अगस्त बुधवार को भद्रा तुला और कन्या राशि में है इसलिए गणेश चतुर्थी पर भद्रा का गणपति के पूजन एवं स्थापना पर कोई प्रभाव नहीं रहेगा। अगर मध्याह्न काल में पूजन करना चाहते हैं तो सुबह 11:04 मिनट बजे से दोपहर 01:43 मिनट के मध्य का समय उचित है। श्री गणेश चतुर्थी का त्योहार देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। श्रीगणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेशोत्सव मनाया जाता है। कुछ भक्त तीन या पांच दिन के लिए गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं। लेकिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की श्रीगणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक यह उत्सव मनाना चाहिए।