विधानसभा में जोरदार हंगामा, यहां पढ़ें खबर
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विधान परिषद में विपक्षी सदस्यों ने वीरवार को प्रश्नकाल शुरू होते ही हंगामा करते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि हाल ही में खराब मौसम से रियासत जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे समेत कई जिलों का सड़क संपर्क कटने से लाखों लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ा, लेकिन सरकार की ओर से राहत पहुंचाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
विपक्षी दलों के सदस्यों ने प्रश्न काल स्थगित कर मामले में चर्चा करवाए जाने की मांग की। हालांकि चेयरमैन अमृत मल्होत्रा ने हंगामा कर रहे सदस्यों को आश्वासन दिया कि प्रश्नकाल के बाद उन्हें बात रखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद हंगामा कर रहे सदस्य सीटों पर बैठ गए।
विपक्षी सदस्यों में नेकां के सज्जाद अहमद किचलू, पीडीपी सदस्य यशपाल शर्मा, नेकां सदस्य शहनाज गनई, कांग्रेस जहांगीर हुसेन मीर, नेकां के डा. बीए वीरी, कांग्रेस जुगल किशोर और शाम लाल भगत और नेकां के अजय कुमार सडोत्रा ने सीटों पर खड़े होकर शोर मचाते हुए कहा कि पीडीपी-भाजपा जनता के हितों की अनदेखी कर रही है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे में लोग कई दिन फंसे रहे। खाने-पीने से लेकर रहने तक के लिए लोग बेहाल रहे, लेकिन सरकार कहीं नजर नहीं आई।
मौसम पर भी हुई बहस
सज्जाद किचलू, नरेश कुमार गुप्ता ने डोडा, भद्रवाह और किश्तवाड़ जिलों में सड़कें बंद होने की वजह से राशन उपलब्ध न होने का मामला भी उठाया। जुगल किशोर शर्मा ने खराग मौसम से नत्थाटॉप के करीब 56 मकानों को हुए नुकसान का मुआवजा दिए जाने की मांग की।
अजय कुमार सडोत्रा ने फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा किसानों को देने की मांग की। कैसर जमशेद लोन ने खराब मौसम और भू स्खलन की वजह से कुपवाड़ा जिले में बिजली गुल होने का मामला भी उठाया।
किसी की जेब में नहीं अपनी
विधान परिषद में वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू और नेकां सदस्य अजय सडोत्रा में वीरवार को प्रश्नकाल के समय हल्की नोंक झोक हो गई। मामला यूं शुरू हुआ कि मंत्री के जेब में हाथ डालकर जवाब देने पर सडोत्रा ने आपत्ति की।
इसके बाद द्राबू ने अपनी जेब से हाथ निकालते हुए कहा कि किसी की जेब में नहीं अपनी जेब में रखा था हाथ। मंत्री के इतना कहते हुए सदन में मौजूद सत्तापक्ष के सदस्यों और मंत्रियों ने मेज थपथपाकर खूब ठहाके लगाए।
न सिफारिश, न सिफारिशी लोग...
अपने बेबाक अंदाज के लिए चर्चित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री चौधरी लाल सिंह ने विधान परिषद में एक सवाल के जवाब में कहा कि उनके रहते विभाग में न सिफारिश और न ही सिफारिशी लोग रहेंगे। मंत्री के इतना कहते ही सदन में खूब ठहाके लगे।
अरे भाई फोन सुनने गए थे...
विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा शुरू होने के बाद दोपहर करीब एक बजे सदन में मौजूद अकेले मंत्री ग्रामीण विकास मंत्री अब्दुल हक खान भी जब सदन से चल दिए तो सदस्यों ने कोई मंत्री मौजूद न होने पर ऐतराज जताते हुए सदन की कार्यवाही को स्थगित करने की मांग चेयरमैन से की।
चेयरमैन अमृत मल्होत्रा भी जब कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा करने ही लगे तो मंत्री सदन में पहुंच गए और कहा कि विधानसभा से कॉल आने पर वह उसे सुनने के लिए गए थे।
बदलते-बदलते मैं न बदल जाऊं...
शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने विधान परिषद में ध्यान आकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि शिक्षा विभाग में सुधार की बेहद जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई बार सोचता हूं कि शिक्षा विभाग को बदलते-बदलते कहीं मैं न बदल जाऊं। कोशिश करूंगा कि पूरी ईमानदारी के साथ अपने फर्ज का निर्वाह करूं।
जनमत की आवाज को सुनना...
विधान परिषद में स्वास्थ्य मंत्री चौधरी लाल
सिंह के जवाब के लंबा खींचने का विरोध कर रहे नेकां सदस्य शेख गुलाम कादिर
परदेसी को जवाब देते हुए पीडीपी सदस्य फिरदोस टाक ने कहा कि अब विपक्ष को
जनमत की आवाज को सुनना ही पड़ेगा।