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Jammu News: अखनूर जियापोता घाट पर डोगरा राज का स्थापना दिवस मनाया
Tue, 18 Jun 2024 05:17 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Tue, 18 Jun 2024 05:17 AM IST
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17 जून 1822 ई को महाराज गुलाब सिंह के राजतिलक से हुई थी डोगरा राज की स्थापना
संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। डोगरा राज का 202वां स्थापना दिवस सोमवार को जिया पोता घाट अखनूर में धूमधाम से मनाया गया। महाराजा गुलाब सिंह राजतिलक सेलिब्रेशन कमेटी ने महाराजा गुलाब सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस मौके पर मुख्य अतिथि जिला विकास परिषद जम्मू के अध्यक्ष भारत भूषण, जबकि डोगरा सदर सभा के प्रधान गुलचैन सिंह चाढ़क सम्मानित अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। इनके अलावा एसडीएम लेख राज, युवा राजपूत के अध्यक्ष विक्रम सिंह व पूर्व अध्यक्ष राजन सिंह हैप्पी भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
जम्मू-कश्मीर के लिए यह ऐतिहासिक दिन है। 17 जून 1822 में शेर-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह ने अखनूर के जियो पोता घाट पर जियो पोता वृक्ष के नीचे महाराज गुलाब सिंह का राज तिलक कर जम्मू-कश्मीर का पहला डोगरा राजा बनाया था। इस ऐतिहासिक दिन को 202 साल पूरे हो गए हैं।
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इस मौके पर मुख्यातिथि भारत भूषण ने कहा कि यहीं महाराजा गुलाब सिंह ने डोगरा राज्य की नींव रखकर डोगरा राज की शुरूआत की थी। उन्होंने कहा कि देश के अन्य शासकों ने देश के भीतर अपने राज्यों का विस्तार किया। महाराजा गुलाब सिंह ने देश की सीमाओं को लद्दाख और तिब्बत तक पहुंचाया। युवा राजपूत के पूर्व प्रधान राजन सिंह हैप्पी ने कहा कि महाराज गुलाब सिंह एक वीर योद्धा थे, जिनकी वीरता को देखते हुए महाराजा रणजीत सिंह ने उन्हें अलग डोगरा रियासत का पहला राजा बनाया। उन्होंने कहा कि आज महाराजा गुलाब सिंह की डोगरा रियासत को केंद्रीय शासित प्रदेश बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम मांग करते है की जम्मू कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा मिले और महाराज गुलाब सिंह की डोगरा रियासत का जो हिस्सा पाकिस्तान के पास उसे भी जल्द हासिल किया जाए। गुलचैन सिंह चाढ़क ने कहा कि महाराजा गुलाब सिंह की ओर से स्थापित किए इस राज्य की पूरे भारत देश में अलग ही पहचान है। हमारे जम्मू कश्मीर में विभिन्न संभागों में विभिन्न प्रकार का पहनावा, विभिन्न प्रकार का मौसम, भाषा और धर्म है। बावजूद इसके भी सभी आपस में प्रेम भाव और भाईचारे के साथ रहते हैं। राज तिलक सेलिब्रेशन कमेटी के चेयरमैन केपी सिंह ने कहा कि महाराजा गुलाब सिंह के नेतृत्व में हमारी सरहदें तिब्बत-लद्दाख तक फैलीं। यहां पर आज युद्ध जैसे हालात बने हैं। इस मौके पर कर्नल जेपी सिंह, सुरिंदर सिंह, अशोक मिश्रा, पंकज गुप्ता, मोहन सिंह जम्वाल, सुरिंदर सिंह गिल्ली, कर्ण सिंह, रजिंदर सिंह जम्वाल आदि मुख्य रूप से मौजूद थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। डोगरा राज का 202वां स्थापना दिवस सोमवार को जिया पोता घाट अखनूर में धूमधाम से मनाया गया। महाराजा गुलाब सिंह राजतिलक सेलिब्रेशन कमेटी ने महाराजा गुलाब सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस मौके पर मुख्य अतिथि जिला विकास परिषद जम्मू के अध्यक्ष भारत भूषण, जबकि डोगरा सदर सभा के प्रधान गुलचैन सिंह चाढ़क सम्मानित अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। इनके अलावा एसडीएम लेख राज, युवा राजपूत के अध्यक्ष विक्रम सिंह व पूर्व अध्यक्ष राजन सिंह हैप्पी भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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जम्मू-कश्मीर के लिए यह ऐतिहासिक दिन है। 17 जून 1822 में शेर-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह ने अखनूर के जियो पोता घाट पर जियो पोता वृक्ष के नीचे महाराज गुलाब सिंह का राज तिलक कर जम्मू-कश्मीर का पहला डोगरा राजा बनाया था। इस ऐतिहासिक दिन को 202 साल पूरे हो गए हैं।
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इस मौके पर मुख्यातिथि भारत भूषण ने कहा कि यहीं महाराजा गुलाब सिंह ने डोगरा राज्य की नींव रखकर डोगरा राज की शुरूआत की थी। उन्होंने कहा कि देश के अन्य शासकों ने देश के भीतर अपने राज्यों का विस्तार किया। महाराजा गुलाब सिंह ने देश की सीमाओं को लद्दाख और तिब्बत तक पहुंचाया। युवा राजपूत के पूर्व प्रधान राजन सिंह हैप्पी ने कहा कि महाराज गुलाब सिंह एक वीर योद्धा थे, जिनकी वीरता को देखते हुए महाराजा रणजीत सिंह ने उन्हें अलग डोगरा रियासत का पहला राजा बनाया। उन्होंने कहा कि आज महाराजा गुलाब सिंह की डोगरा रियासत को केंद्रीय शासित प्रदेश बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम मांग करते है की जम्मू कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा मिले और महाराज गुलाब सिंह की डोगरा रियासत का जो हिस्सा पाकिस्तान के पास उसे भी जल्द हासिल किया जाए। गुलचैन सिंह चाढ़क ने कहा कि महाराजा गुलाब सिंह की ओर से स्थापित किए इस राज्य की पूरे भारत देश में अलग ही पहचान है। हमारे जम्मू कश्मीर में विभिन्न संभागों में विभिन्न प्रकार का पहनावा, विभिन्न प्रकार का मौसम, भाषा और धर्म है। बावजूद इसके भी सभी आपस में प्रेम भाव और भाईचारे के साथ रहते हैं। राज तिलक सेलिब्रेशन कमेटी के चेयरमैन केपी सिंह ने कहा कि महाराजा गुलाब सिंह के नेतृत्व में हमारी सरहदें तिब्बत-लद्दाख तक फैलीं। यहां पर आज युद्ध जैसे हालात बने हैं। इस मौके पर कर्नल जेपी सिंह, सुरिंदर सिंह, अशोक मिश्रा, पंकज गुप्ता, मोहन सिंह जम्वाल, सुरिंदर सिंह गिल्ली, कर्ण सिंह, रजिंदर सिंह जम्वाल आदि मुख्य रूप से मौजूद थे।