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रेवड़ियों की तरह नौकरियां बांटने पर पूर्व उपकुलपति, रजिस्ट्रार को सजा
Wed, 05 Jun 2019 04:58 AM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: राजेश सैनी
Updated Wed, 05 Jun 2019 04:58 AM IST
सार
-शेरे कृषि एवं तकनीकी विज्ञान विश्वविद्यालय जम्मू का मामला, दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
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विस्तार
शेरे कृषि एवं तकनीकी विज्ञान विश्वविद्यालय(स्कास्ट जम्मू) के पूर्व उपकुलपति नागेंद्र शर्मा और पूर्व रजिस्ट्रार अशोक कुमार कौल को कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई। दोनों पर भ्रष्टाचार का केस चल रहा था। एंटी करप्शन कोर्ट के स्पेशल जज वाईपी बौर्ने ने मंगलवार को इस मामले से जुड़ी याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। आरोप है कि दोनों ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर अवैध रूप से नियुक्तियां की।
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नागेंद्र शर्मा वर्ष 2005 से 2008 तक स्कास्ट जम्मू के उपकुलपति रहे हैं। नागेंद्र शर्मा उत्तर प्रदेश के बरेली, आईवीआरआई रोड इज्जतनगर की शिव नगर कालोनी निवासी हैं। वर्तमान में वह जम्मू के पलौड़ा में रहते हैं। दोनों पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले के अन्य आरोपी तत्कालीन इस्टेट आफिसर इकबाल सिंह, कंट्रोलर विजय कुमार और लाभ लेने वाले विशाल टंडन, विनायक विक्रम, नरिंद्र कुमार रैना, अंकुर शर्मा सहित अन्य दो लाभार्थियों को आरोपों से मुक्त कर दिया। विजिलेंस के पास यह केस दर्ज हुआ था।
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जांच में यह पाया गया कि नागेंद्र शर्मा ने रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की। कई को अस्थायी से स्थायी कर दिया। रिकार्ड के साथ छेड़छाड़ की गई। जो पद थे ही नहीं, उन पर नियुक्ति कर दी गईं। नियुक्तियों के लिए अतिरिक्त पद बढ़ाए गए। मामले पर दोनों तरफ की बहस हुई। कहा गया कि एक तरफ देश में बेरोजगारी फैली हुई है। हर कोई त्रस्त है। दूसरी तरफ से इस तरह के अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए कई युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जज ने दलीलें सुनने के बाद महसूस किया कि आरोपी अधिकारियों के खिलाफ पेश की गई तीनों चार्जशीट में उनके खिलाफ आरोप पूरी तरह से साबित होते हैं। जबकि अन्य के खिलाफ कोई दस्तावेज नहीं मिला। इसलिए पूर्व उपकुलपति और रजिस्ट्रार को सजा सुनाई।
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