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कश्मीर में पूर्व आतंकी और पत्थरबाज भी शांति बहाली के पक्ष में

Thu, 24 Nov 2016 11:17 AM IST
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 24 Nov 2016 11:17 AM IST
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Former militants took part in Former militants took part in the Conference
कश्मीर में हिंसा - फोटो : File Photo
घाटी के पूर्व आतंकवादी और पत्थरबाज भी मौजूदा हालात से खिन्न हैं। उनका मानना है कि घाटी में स्थायी शांति बहाली के लिए प्रयास किए जाने चाहिएं। कैद की जिंदगी से छुटकारा मिलना चाहिए।
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घाटी में शांति, सौहार्र्द तथा समृद्धि के लिए 100 से अधिक पूर्व आतंकियों और पूर्व पत्थरबाजों ने इसके लिए हामी भरी। इसके साथ ही 50 से अधिक परिवारों की पीड़ित महिलाएं जिन्होंने आतंकवाद के चलते अपने पति, पिता या भाई को खोया है, ने भी शांति बहाली के प्रति सहमति जताई। 
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श्रीश्री रविशंकर की मौजूदगी में कश्मीर में शांति की तलाश में 72 पूर्व आतंकियों और 35 पूर्व पत्थरबाजों ने हिस्सा लिया। आर्ट आफ लिविंग की ओर से कश्मीर बैक टू पैराडाइज विषय पर आयोजित कांफ्रेंस में अनंतनाग, शोपियां, कुलगाम, पुलवामा, श्रीनगर, बडगाम, त्राल, बारामुला, कुपवाड़ा, सोपोर, टंगधार, करनाह, गुरेज से पहुंचे लोगों का कहना था कि वे पिछले कई दशक से उत्पीड़न का दंश झेल रहे हैं। हर समय असुरक्षा का वातावरण रहता है। बच्चों की तालीम नहीं हो पा रही है। बेरोजगारी चरम पर है। आखिर कब तक यह सब चलता रहेगा। उन्हें भी शांति से जीना है। रोज-रोज की हिंसा से अब तक तो कोई हल नहीं निकल सका है।
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'पत्थरबाजी किसी समस्या का हल नहीं'

Former militants took part in Former militants took part in the Conference
कांफ्रेंस में लोगों के साथ मौजूद श्री श्री रविशंकर - फोटो : Amar Ujala
कुपवाड़ा निवासी हिजबुल के पूर्व आतंकी जावेद मलिक का कहना है कि घाटी में शांति बहाल होनी चाहिए। हिंसा तथा आतंकवाद का रास्ता बंद होना चाहिए। इससे अवाम को काफी नुकसान पहुंच रहा है।

पुलवामा के पूर्व पत्थरबाज इरफान का मानना है कि पत्थरबाजी से किसी समस्या का हल नहीं होने वाला है। बहुत समय से पत्थरबाजी देख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। 

कांफ्रेंस में शामिल होने आईं सोपोर की शकीना बानो ने बताया कि उन्होंने आतंकवाद में अपना पिता खोया है। उस समय वह काफी छोटी थी। तब से अब तक परिवार संभल नहीं पाया है। परिवार ने जो परेशानियां और तंगी झेली है, उसका वर्णन कर पाना मुश्किल है। अब और लोग इस दर्द को न झेलें, इसके लिए शांति बहाल होनी चाहिए।

आतंकवाद पर पूरी तरह अंकुश लगना चाहिए। श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके के गुलाम मोहम्मद वानी का कहना है कि 1947 से लेकर अब तक कश्मीर अवाम को धोखे में रखा गया है। सब लोग शांति चाहते हैं। सब लोग सौहार्र्द के पक्ष में हैं, लेकिन केंद्र सरकार को भी इसके बारे में सोचना चाहिए। उनका कहना है कि जवाहर लाल नेहरू ने लाल चौक से जो वादा किया था, उसे पूरा किया जाना चाहिए। 
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