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जंगलों की सुरक्षा के लिए वनकर्मियों को ‘नो होलीडे’

Tue, 03 May 2016 11:53 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Tue, 03 May 2016 11:53 PM IST
सार

  • जंगलों में लग रही आग की वजह से कर्चचारियों की छुट्टियां रद्द
  • सभी वन्यजीव सेंचुरी और पार्क में 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम स्थापित
  • संरक्षित क्षेत्रों में रहते हैं पांच हजार से अधिक प्रजातियों के पशु और पक्षी 

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forest Staff holidays canceled
आग की सबसे ज्यादा आशंका चीड़ के जंगलों में होती है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जंगलों में आग की घटनाओं से वन्यजीवों को बचाने के लिए राज्य वन्यजीव विभाग के सभी कर्मचरियों की छट्टियां रद्द कर दी गईं हैं। हालात सामान्य होने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी। इसके लिए सभी वन्यजीव सेंचुरी और पार्कों में 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं। 
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राज्य में 15 वाइल्डाइफ सेंचुरी और पांच नेशनल पार्क हैं। वाइल्डलाइफ पार्क में बालटाल थजवास, चंगताग, गुलमर्ग, हीरपोरा, हुकरसर, जसरोटा, काराकोरम, लछीपोरा, लिंबर, ओवेरा अरू, नंदिनी, रामनगर, सुर्रइंसदर और त्रिकुटा शामिल हैं।
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नेशनल पार्क में सिटी फारेस्ट (सलीम अली) नेशनल पार्क 9 वर्ग किलोमीटर, दाचीगाम 141 वर्ग किलोमीटर, हेमिस 3350 वर्ग किलोमीटर और 425 वर्ग किलोमीटर में फैला किश्तवाड़ पार्क शामिल हैं। राज्य वन्यजीव विभाग के पास 15086.87 वर्ग किलोमीटर संरक्षित क्षेत्र है।
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​रिहायशी इलाकों को बचाने की भी कोशिश

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जंगल में आग - फोटो : FILE PHOTO
जहां पशुओं की 60 मुख्य प्रजातियां मौजूद हैं। 37 वन्यजीव संरक्षित आरक्षित क्षेत्र भी हैं। इनमें करीब पांच हजार से अधिक प्रजातियों के पशु, पक्षी मौजूद हैं। वन्यजीव विभाग के क्षेत्रीय वार्डन अश्विनी कुमार का कहना है कि जंगलों में लग रही आग की वजह से वन्यजीव भी आफत में हैं।

जब तक आग की घटनाएं शांत नहीं होतीं, तब तक कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द रहेंगी। सभी जगह करीब 50 कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जहां 24 घंटे तत्काल कार्रवाई के लिए कर्मचारी मौजूद रहेंगे। 

जंगलों में आग लगने के बाद वन्यजीव रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे में कंट्रोल रूम में एक ट्रैप पिंजरे के साथ टीम तैनात की गई है। रिहायशी इलाके में वन्यजीव के घुसने पर उसे पकड़ कर सुरक्षित जगह छोड़ा जाएगा। इसके अलावा कंट्रोल रूम में दमकल वाहनों और पानी के अन्य स्रोतों को जमा करके रखा जा रहा है। 
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