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‘धरती की जन्नत’ में तबाही का आलम

Tue, 31 Mar 2015 01:55 AM IST
Updated Tue, 31 Mar 2015 01:55 AM IST
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flood: kashmir is no more heaven

‘धरती की जन्नत’ कश्मीर में इन दिनों फिर चारो ओर तबाही का आलम है। श्रीनगर के हर क्षेत्र में जलभराव दुर्दशा की कहानी बयां कर रहा है। तमाम बाजार बंद हैं। लोग अपने घरों की ऊपरी मंजिल में बैठ चारो ओर जमा पानी को देख भयभीत हैं। कहीं यह सितंबर की तबाही की शुरूआत तो नहीं।

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लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने तीन अप्रैल तक मौसम खराब होने का अनुमान जता कर लोगों की धड़कन बढ़ा दी है। लोग परिवार समेत सुरक्षित स्थानों की ओर निकल रहे हैं। पर्यटकों से हमेशा गुलजार रहने वाले डल लेक इलाके से भी रौनक गायब है। डल झील का जल स्तर भी ऊंचा हो चुका है।
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इसके बावजूद लेक के किनारे शिकारे वाले पर्यटकों का इंतजार कर रहे हैं। श्रीनगर में फंसे पर्यटक जल्द से जल्द परिवार समेत वापस लौटने की जुगत में हैं। कई होटलों की एडवांस बुकिंग कैंसल हो गई है।
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जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे बंद होने से लोग एयरपोर्ट का रुख कर रहे हैं, ताकि किसी तरह घाटी से निकला जा सके। झेलम का जल खतरे के निशान के ऊपर पहुंच चुका है। खासकर हमदानिया कालोनी, बेमिना में सबसे बुरा हाल है।

बीते साल जैसी ही आपदा

flood: kashmir is no more heaven

यहां एक फ्लड चैनल टूट जाने से इलाके में पानी भर गया। तमाम मकान साढ़े तीन फुट पानी में हैं। पानी निकासी के लिए पंप सेट लगाए गए हैं, लेकिन वह पर्याप्त नहीं हैं। बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। सरकार ने एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों को बाहर न निकलने और उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी है।

कई स्कूलों में पानी भरा होने और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छुट्टियां घोषित हो चुकी हैं। सोनावार, इंदिरा नगर, राजबाग, जवाहर नगर, जहांगीर चौक, बटमालू में सड़कें तालाब का रूप ले चुकी हैं।

सितंबर 2014 में आई आपदा और वर्तमान हालात में फर्क इतना है कि उस समय आपदा से नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेसी की गठबंधन सरकार संघर्ष कर रही थी, जबकि इस बार पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार लोगों को राहत देने में जुटी है।

खुद मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद सोमवार को श्रीनगर के इलाकों का जायजा लेते और अफसरों को निर्देश देते नजर आए। स्थानीय लोगों के पुराने जख्मी अभी भरे भी नहीं है कि नए घाव ने दर्द देना शुरू कर दिया है।

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