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अरनिया फिर आग ने मचाया तांडव
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अरनिया। कृषि प्रधान क्षेत्र अरनिया के किसानों के लिए सप्ताह का तीसरा दिन भी कष्ट दायक रहा। बुधवार को भी करीब 8000 कनाल खेतों में खड़ी गेहूं फसल आग की भेंट चढ़ गई।
जानकारी के अनुसार दोपहर बाद करीव 1.30 बजे सीमवर्ती गांव चक्क बुल्ले में कंबाइन मशीन से गेहूं कटाई जारी थी। इसी दौरान ऊपर से जा रही एचटी (11 केवी) से मशीन का संपर्क हो गया। इससे निकली चिंगारी ने गेहूं फसल को अपनी चपेट में ले लिया। उसके बाद आग की लपटों ने तेजी से आगे बढ़ते हुए देवीगढ़, नेकोवाल, कोटली काजियां, सेई व जबोयाल सहित करीब 10 गांवों के खेतों तक पहुंच कर खूब तांडव मचाया।
हालांकि देर शाम खबर लिखे जाने तक दमकल व स्थानीय प्रशासन से नुकसान का पूरा विवरण नहीं मिल पाया, मगर प्रभावित किसानों के अनुसार सैकड़ों किसानों की करीब 8000 (आठ हजार कनाल) गेहूं फसल जल कर राख हो चुकी है। जबकि जबोयाल से आग पर पूरी तरह से काबू पाकर तरेवा व इससे आगे वाले गांवों के किसानों की फसल को बचा लिया गया। नहीं तो यह आंकड़ा दोगुना हो जाता।
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आग ने पांच किलोमीटर तक किया तांडव
अरनिया। सीमावर्ती गांव चक्क बुल्ले में कटाई में लगी कंबाइन मशीन बिजली की तारों के संपर्क में आ गई। गेहूं की फसल में लगी आग की लपटों ने करीब पांच किलोमीटर तक खूब तांडव किया।
इस बीच सूचना मिलते ही करीब एक घंटे बाद पहुंची मात्र एक दमकल गाड़ी इन लपटों के आगे बेबस दिखी। करीब दो घंटे के बाद जम्मू से पहुंची अतिरिक्त तीन गाड़ियों ने बमुश्किल आग पर काबू पाया। मगर इन चार घंटे में विकराल रूप धारण करते हुए करीब पांच किलोमीटर का सफर तय करते हुए जबोयाल को भी अपनी चपेट में लेकर करीब आठ हजार कनाल रकवे को जलाकर राख कर दिया। गनीमत रही कि दमकल विभाग ने लाभकारी नीति अपनाते हुए जबोयाल गांव के अंतिम छोर को लक्ष्य मानते हुए आग बुझाने का काम शुरू कर, जिससे उन्हें सफलता भी मिली, जिससे साथ लगते तरेवा गांव के खेतों में खड़ी गेहूं फसल को बचा लिया गया। अनुमान के अनुसार करीब छह हजार कनाल चक्क बुल्ले से देवी गढ़ व चार हजार कनाल इससे आगे से तरेवा गांव तक करीब दो हजार कनाल गेहूं फसल जल चुकी है।
वही बुधवार को हुआ यह पहला मामला नहीं है। इस साल का इसी तरह का यह दूसरा मामला है। मात्र चार दिन पहले ही गांव कूल खुर्द में इसी तरह का हादसा होने पर चालीस कनाल गेहूं फसल जलकर राख हो गई थी।
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जानकारी के अनुसार दोपहर बाद करीव 1.30 बजे सीमवर्ती गांव चक्क बुल्ले में कंबाइन मशीन से गेहूं कटाई जारी थी। इसी दौरान ऊपर से जा रही एचटी (11 केवी) से मशीन का संपर्क हो गया। इससे निकली चिंगारी ने गेहूं फसल को अपनी चपेट में ले लिया। उसके बाद आग की लपटों ने तेजी से आगे बढ़ते हुए देवीगढ़, नेकोवाल, कोटली काजियां, सेई व जबोयाल सहित करीब 10 गांवों के खेतों तक पहुंच कर खूब तांडव मचाया।
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हालांकि देर शाम खबर लिखे जाने तक दमकल व स्थानीय प्रशासन से नुकसान का पूरा विवरण नहीं मिल पाया, मगर प्रभावित किसानों के अनुसार सैकड़ों किसानों की करीब 8000 (आठ हजार कनाल) गेहूं फसल जल कर राख हो चुकी है। जबकि जबोयाल से आग पर पूरी तरह से काबू पाकर तरेवा व इससे आगे वाले गांवों के किसानों की फसल को बचा लिया गया। नहीं तो यह आंकड़ा दोगुना हो जाता।
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आग ने पांच किलोमीटर तक किया तांडव
अरनिया। सीमावर्ती गांव चक्क बुल्ले में कटाई में लगी कंबाइन मशीन बिजली की तारों के संपर्क में आ गई। गेहूं की फसल में लगी आग की लपटों ने करीब पांच किलोमीटर तक खूब तांडव किया।
इस बीच सूचना मिलते ही करीब एक घंटे बाद पहुंची मात्र एक दमकल गाड़ी इन लपटों के आगे बेबस दिखी। करीब दो घंटे के बाद जम्मू से पहुंची अतिरिक्त तीन गाड़ियों ने बमुश्किल आग पर काबू पाया। मगर इन चार घंटे में विकराल रूप धारण करते हुए करीब पांच किलोमीटर का सफर तय करते हुए जबोयाल को भी अपनी चपेट में लेकर करीब आठ हजार कनाल रकवे को जलाकर राख कर दिया। गनीमत रही कि दमकल विभाग ने लाभकारी नीति अपनाते हुए जबोयाल गांव के अंतिम छोर को लक्ष्य मानते हुए आग बुझाने का काम शुरू कर, जिससे उन्हें सफलता भी मिली, जिससे साथ लगते तरेवा गांव के खेतों में खड़ी गेहूं फसल को बचा लिया गया। अनुमान के अनुसार करीब छह हजार कनाल चक्क बुल्ले से देवी गढ़ व चार हजार कनाल इससे आगे से तरेवा गांव तक करीब दो हजार कनाल गेहूं फसल जल चुकी है।
वही बुधवार को हुआ यह पहला मामला नहीं है। इस साल का इसी तरह का यह दूसरा मामला है। मात्र चार दिन पहले ही गांव कूल खुर्द में इसी तरह का हादसा होने पर चालीस कनाल गेहूं फसल जलकर राख हो गई थी।