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बाढ़ भी नहीं छू सकी इस हिंदू मंदिर को, एक बार जरूर आएं यहां

Sun, 19 Oct 2014 05:10 PM IST
Updated Sun, 19 Oct 2014 05:10 PM IST
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feature story on martand dev surya mandir in kashmir anantnag

सितंबर में जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ में सब कुछ तबाह हो चुका है। बाढ़ के बाद से रियासत का पर्यटन उद्योग पर भारी मार पड़ी है। देश दुनिया के लोगों ने कश्मीर से मुंह मोड़ लिया है लेकिन अभी भी कश्मीर में कई ऐसे पर्यटन क्षेत्र हैं जहां जाया जा सकता है।

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अनंतनाग का मार्तण्ड सूर्य मंदिर भी ऐसा ही मंदिर है जहां बाढ़ का पानी नहीं गया और मंदिर पूरी तरह से सुरक्षित है। मार्तण्ड सूर्य मंदिर जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में स्थित है। मार्तण्ड मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है।
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इलाके में जैसे ही सूर्य की पहली किरण आती है वैसे ही मंदिर में पूजा शुरू हो जाती है। मंदिर की उत्तरी दिशा से मनमोहक पर्वतों का दृश्य दिखाई देता है। मंदिर का स्थानीय महत्व तो है ही लेकिन साथ ही मंदिर विश्व के सुंदर मंदिरों में खास महत्व रखता है।

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आगे जान‌िए, किसने कराया था मंदिर का निमार्ण

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मार्तण्ड मंदिर का निर्माण कर्कोटक वंश के राजा ललितादित्य मुक्तापीड ने कराया था। यह मंदिर सातवीं-आठवीं शताब्दी पूर्व का है। यह मंदिर सन् 725-756 ई. के मध्य बना था।

मार्तंड मंदिर कश्मीर के दक्षिणी भाग में अनंतनाग से पहलगाम के रास्ते में मार्तण्ड (वर्तमान बिगड़ कर बने मटन) नामक स्थान पर है। इस मंदिर में एक बड़ा सरोवर भी है, जिसमें मछलियां हैं। इसकी संभावित निर्माण तिथि 490-555 ई. रही होगी।

आगे जान‌िए, क्यों खास है मंदिर की वास्तुकला

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मार्तण्ड सूर्य मंदिर का आंगन 220 फुट x 142 फुट है। यह मंदिर 60 फुट लम्बा और 38 फुट चौड़ा था। इसके चतुर्दिक लगभग 80 प्रकोष्ठों के अवशेष वर्तमान में हैं। इस मंदिर के पूर्वी किनारे पर मुख्य प्रवेश द्वार का मंडप है। इसके द्वारों पर त्रिपार्श्वित चाप (मेहराब) थे, जो इस मंदिर की वास्तुकला की विशेषता है।

द्वारमंडप तथा मंदिर के स्तम्भों की वास्तु-शैली रोम की डोरिक शैली से कुछ अंशों में मिलती-जुलती है। मार्तण्ड मंदिर अपनी वास्तुकला के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है। यह मंदिर कश्मीरी हिंदू राजाओं की स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना है। कश्मीर का यह मंदिर वहां की निर्माण शैली को व्यक्त करता है। इसके स्तंभों में ग्रीक सरंचना का इस्तेमाल भी करा गया है।

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