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Liver Day: फैटी लीवर बिगाड़ रहा सेहत, जम्मू के अस्पतालों में 20% तक लीवर संबंधी बीमारियों के मरीज पहुंच रहे
Wed, 19 Apr 2023 12:12 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Wed, 19 Apr 2023 12:12 PM IST
सार
जम्मू शहर के अस्पतालों की मेडिसिन ओपीडी में रोजाना लीवर समस्या संबंधी 20 प्रतिशत मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोग प्रभावित हैं। किसी सामान्य व्यक्ति के लीवर में फैट की मात्रा सामान्य या फिर न के बराबर होती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में गैर संचारी रोगों (एनसीडी) में लोगों में फैटी लीवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले माना जाता था कि शराब का अधिक सेवन करने वालों का ही लीवर खराब होता है। लेकिन, मौजूदा जीवनशैली में इसके विपरीत अन्य कारणों से फैटी लीवर की शिकायत हो रही है।
मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरायड, धूम्रपान, व्यायाम की कमी, प्रोसेस फूड का सेवन करने, लंबे समय तक असंतुलित भोजन करने, अधिक तेलयुक्त पदार्थों का सेवन, जंक फूड, नशे की लत को पूरा करने के लिए सामूहिक सिरिंज का इस्तेमाल, हेपेटाइटिस आदि से यह समस्या हो रही है।
जम्मू शहर के अस्पतालों की मेडिसिन ओपीडी में रोजाना लीवर समस्या संबंधी 20 प्रतिशत मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोग प्रभावित हैं। किसी सामान्य व्यक्ति के लीवर में फैट की मात्रा सामान्य या फिर न के बराबर होती है। लेकिन, जब लीवर की कोशिकाओं में फैट जमने लगता है, तो धीरे-धीरे लीवर में सूजन आ जाती है। इससे फैटी लीवर की समस्या होती है।
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फैट में बदल जाती है कैलोरी
फैटी लीवर में कैलोरी की मात्रा फैट में तब्दील हो जाती है, जो लीवर की कोशिकाओं में जमने लगती हैं। फैटी लीवर की समस्या अधिक गंभीर होने पर लीवर के खराब होने का खतरा रहता है। जब शरीर में वसा की मात्रा लीवर के वजन से 10 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, तो ऐसी परिस्थिति में लीवर फैटी लीवर में बदल जाता है। इसका पाचन तंत्र पर असर पड़ता है। इसमें अधिकांश मामलों में पीड़ित को पता ही नहीं होता है कि वह इस समस्या से ग्रस्त हो चुका है।
गांधीनगर में जब हुई लीवर की स्क्रीनिंग
गांधीनगर अस्पताल में हाल में लगाए गए एक विशेष शिविर में 62 लोगों के लीवर की स्क्रीनिंग की गई। इसमें दो मरीज ऐसे पाए गए, जिन्हें लीवर प्रत्यारोपण की जरूरत थी, जबकि सिरोसिस की बीमारी (एडवांस लीवर की बीमारी) के 6, लीवर के सिकुड़ने संबंधी 15 और फैटी लीवर के 17 मामले पाए गए। अस्पताल में मेडिसिन की करीब 150 ओपीडी में 15 से 20 प्रतिशत मरीज लीवर संबंधी बीमारियों को लेकर आ रहे हैं।
बीमारी को शुरुआत में पकड़ना जरूरी
यही हाल जीएमसी में भी है। फाइब्रोस्केन (विशेष अल्ट्रासाउंड) में पता चलता है कि पीड़ित का लीवर कितना क्षतिग्रस्त हो चुका है। गांधीनगर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण योगराज ने कहा कि गैर मादक वसायुक्त यकृत रोग में तेजी से बदल रहे फैटी लीवर की समस्या चिंताजनक है। इसके बचाव के लिए इसे एडवांस स्टेज में पकड़ना जरूरी है।
क्या हैं लक्षण
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मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरायड, धूम्रपान, व्यायाम की कमी, प्रोसेस फूड का सेवन करने, लंबे समय तक असंतुलित भोजन करने, अधिक तेलयुक्त पदार्थों का सेवन, जंक फूड, नशे की लत को पूरा करने के लिए सामूहिक सिरिंज का इस्तेमाल, हेपेटाइटिस आदि से यह समस्या हो रही है।
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जम्मू शहर के अस्पतालों की मेडिसिन ओपीडी में रोजाना लीवर समस्या संबंधी 20 प्रतिशत मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोग प्रभावित हैं। किसी सामान्य व्यक्ति के लीवर में फैट की मात्रा सामान्य या फिर न के बराबर होती है। लेकिन, जब लीवर की कोशिकाओं में फैट जमने लगता है, तो धीरे-धीरे लीवर में सूजन आ जाती है। इससे फैटी लीवर की समस्या होती है।
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फैट में बदल जाती है कैलोरी
फैटी लीवर में कैलोरी की मात्रा फैट में तब्दील हो जाती है, जो लीवर की कोशिकाओं में जमने लगती हैं। फैटी लीवर की समस्या अधिक गंभीर होने पर लीवर के खराब होने का खतरा रहता है। जब शरीर में वसा की मात्रा लीवर के वजन से 10 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, तो ऐसी परिस्थिति में लीवर फैटी लीवर में बदल जाता है। इसका पाचन तंत्र पर असर पड़ता है। इसमें अधिकांश मामलों में पीड़ित को पता ही नहीं होता है कि वह इस समस्या से ग्रस्त हो चुका है।
गांधीनगर में जब हुई लीवर की स्क्रीनिंग
गांधीनगर अस्पताल में हाल में लगाए गए एक विशेष शिविर में 62 लोगों के लीवर की स्क्रीनिंग की गई। इसमें दो मरीज ऐसे पाए गए, जिन्हें लीवर प्रत्यारोपण की जरूरत थी, जबकि सिरोसिस की बीमारी (एडवांस लीवर की बीमारी) के 6, लीवर के सिकुड़ने संबंधी 15 और फैटी लीवर के 17 मामले पाए गए। अस्पताल में मेडिसिन की करीब 150 ओपीडी में 15 से 20 प्रतिशत मरीज लीवर संबंधी बीमारियों को लेकर आ रहे हैं।
बीमारी को शुरुआत में पकड़ना जरूरी
यही हाल जीएमसी में भी है। फाइब्रोस्केन (विशेष अल्ट्रासाउंड) में पता चलता है कि पीड़ित का लीवर कितना क्षतिग्रस्त हो चुका है। गांधीनगर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण योगराज ने कहा कि गैर मादक वसायुक्त यकृत रोग में तेजी से बदल रहे फैटी लीवर की समस्या चिंताजनक है। इसके बचाव के लिए इसे एडवांस स्टेज में पकड़ना जरूरी है।
क्या हैं लक्षण
- फैटी लीवर होने पर लीवर के हिस्से में सूजन आ जाती है।
- फैटी लीवर होने पर शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती। इससे व्यक्ति थका महसूस करता है।
- ध्यान केंद्रित करने में समस्या होती है और व्यक्ति को काफी कमजोरी का अहसास होता है।
- वजन का घटना या बढ़ना भी फैटी लीवर सिंड्रोम का एक लक्षण हो सकता है।
- लंबे समय तक दवाइयों का सेवन करना और वायरल हेपेटाइटिस से समस्या हो सकती है।
- वसा से भरपूर खानपान और मसालेदार भोजन का सेवन।
- पारिवारिक इतिहास में कई सदस्यों को फैटी लीवर की समस्या हो सकती है।