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Jammu News: 21 में से बस एक गवाह से पूछताछ, पीड़िता भी बयान से पलटी, दुष्कर्म के आरोपी को जमानत
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जम्मू। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। आरोपी एक साल से जेल में है। अभियोजन 21 गवाहों में से केवल एक ही गवाह से पूछताछ कर पाया। नाबालिग भी बयान से पलट चुकी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को हिरासत में रखना बगैर सुनवाई सजा और उसकी आजादी छीनने जैसा होगा।
स्पेशल जज रेणु डोगरा बुधवार को मोहसिन अली निवासी डोडा बनाम पुलिस स्टेशन बख्शी नगर और सीनियर सुपरिंटेंडेंट सेंट्रल जेल कोट भलवाल (जम्मू) मामले में सुनवाई कर रही थीं। आरोपी ने अर्जी में कहा कि पुलिस ने झूठा और बेबुनियाद केस दर्ज किया है। वह सितंबर से सेंट्रल जेल कोट भलवाल में बंद है।
पीड़िता से भी पूछताछ हो चुकी है और उसने कोई ऐसा बयान नहीं दिया है जो अपराध में संलिप्तता जाहिर करे। प्रतिवादी ने जघन्य अपराध में शामिल होने की बात कहते हुए अर्जी का विरोध किया। कहा कि अगर आरोपी को बेल पर रिहा किया जाता है तो वह गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करेगा।
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कोर्ट ने पाया कि अभियोजन ने सूचीबद्ध 21 में से सिर्फ एक गवाह यानी पीड़िता से पूछताछ की है। वह भी बयान से पलट गई है। अगर हालात इजाजत देते हों, जहां पीड़ित खुद ही मुकर गया हो और मेडिकल रिपोर्ट में नए या पुराने संबंध का सबूत न मिला हो तो जमानत बनती है। आरोपी को तब तक बेगुनाह माना जाना चाहिए जब तक गुनाह साबित न हो जाए।
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स्पेशल जज रेणु डोगरा बुधवार को मोहसिन अली निवासी डोडा बनाम पुलिस स्टेशन बख्शी नगर और सीनियर सुपरिंटेंडेंट सेंट्रल जेल कोट भलवाल (जम्मू) मामले में सुनवाई कर रही थीं। आरोपी ने अर्जी में कहा कि पुलिस ने झूठा और बेबुनियाद केस दर्ज किया है। वह सितंबर से सेंट्रल जेल कोट भलवाल में बंद है।
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पीड़िता से भी पूछताछ हो चुकी है और उसने कोई ऐसा बयान नहीं दिया है जो अपराध में संलिप्तता जाहिर करे। प्रतिवादी ने जघन्य अपराध में शामिल होने की बात कहते हुए अर्जी का विरोध किया। कहा कि अगर आरोपी को बेल पर रिहा किया जाता है तो वह गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करेगा।
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कोर्ट ने पाया कि अभियोजन ने सूचीबद्ध 21 में से सिर्फ एक गवाह यानी पीड़िता से पूछताछ की है। वह भी बयान से पलट गई है। अगर हालात इजाजत देते हों, जहां पीड़ित खुद ही मुकर गया हो और मेडिकल रिपोर्ट में नए या पुराने संबंध का सबूत न मिला हो तो जमानत बनती है। आरोपी को तब तक बेगुनाह माना जाना चाहिए जब तक गुनाह साबित न हो जाए।