फारूक बोले: पाकिस्तान से बातचीत कर सुधरेंगे कश्मीर के हालात, सरकार न होने के कारण प्रदेश को हो रहा भारी नुकसान
डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि सवाल यह है कि जी20 देशों से आने वाले पर्यटन से हमें फायदा होगा। ऐसा तब तक नहीं हो सकता जब तक यहां के हालात नहीं सुधरते। जब तक कि दो बड़े देश इस बात पर बातचीत नहीं करते कि इस देश के भविष्य को कैसे आकार दिया जाए।
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नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा, कश्मीर में जी20 कार्यक्रम करने से घाटी में पर्यटन के हालात नहीं सुधरेंगे, बल्कि इसके लिए भारत और पाकिस्तान को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर बातचीत करनी होगी। निर्वाचित सरकार न होने के कारण जम्मू-कश्मीर को भारी नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा, एक एलजी और उनके सलाहकार पूरे राज्य की देखभाल नहीं कर सकते। इस काम को विधायक ही अच्छी तरह से कर सकते हैं, क्योंकि यह उनका कर्तव्य है। नौकरशाहों को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उन्हें 60 साल की उम्र में रिटायर हो जाना होता है।
एक विधायक को हर पांच साल में जनता के पास जाना होता है। वह काम नहीं करेगा तो वोट नहीं मिलेगा। इसलिए चुनाव बेहद जरूरी हैं। उनकी पार्टी किसी भी समय चुनाव के लिए तैयार है। डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि सवाल यह है कि जी20 देशों से आने वाले पर्यटन से हमें फायदा होगा।
ऐसा तब तक नहीं हो सकता जब तक यहां के हालात नहीं सुधरते और हालात तब तक नहीं सुधरेंगे जब तक कि दो बड़े देश इस बात पर बातचीत नहीं करते कि इस देश के भविष्य को कैसे आकार दिया जाए।
वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या श्रीनगर में जी20 बैठक आयोजित करने से केंद्र शासित प्रदेश को फायदा होगा।
एलजी के बयान पर कहा, क्या इनके पास साधन नहीं
लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के इस बयान पर कि कश्मीर में कुछ दलों ने अतीत में चुनावों को हाईजैक कर लिया था, अब्दुल्ला ने कहा, क्या उनके पास इसका मुकाबला करने का साधन नहीं है? वे उच्च न्यायालय या चुनाव आयोग से संपर्क कर सकते हैं। हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
रेल हादसे की जांच होनी चाहिए
ओडिशा ट्रेन हादसे पर उन्होंने कहा कि यह दुनिया की बड़ी आपदाओं में से एक है। 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों अन्य घायल हैं। इस बात की जांच होनी चाहिए कि यह कैसे हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।