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फारूक बोले: जम्मू-कश्मीर में तानाशाही से थक चुके लोगों को लोकप्रिय सरकार की जरूरत 

Wed, 08 Dec 2021 08:18 PM IST
विमल शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Wed, 08 Dec 2021 08:18 PM IST
सार


पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नौकरशाही शासन लोकप्रिय सरकार का विकल्प नहीं है। यहां के लोग तानाशाही से थक चुके हैं और उन्हें अब सरकार की जरूरत है। सत्तावादी और प्रशासन के कुशासन से लोग अपना धैर्य खो रहे हैं।

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Farooq said: People tired of dictatorship in Jammu and Kashmir need popular government
जम्मू में बैठक के दौरान फारूक अब्दुल्ला। - फोटो : निखिल मेहता

विस्तार

नेकां प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के बाद चुनाव करवाने की बात कही जा रही थी। परिसीमन की प्रक्रिया छह मार्च, 2022 तक पूरी करने का वादा किया गया था। बताया गया था कि इसकी समय सीमा का विस्तार नहीं किया जाएगा। लेकिन अब संसद में बोला जा रहा है कि परिसीमन की कोई समय सीमा तय नहीं है।

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भाजपा की कथनी और करनी में अंतर
हम भी इसके सदस्य हैं, लेकिन आज तक हमसे कुछ नहीं पूछा गया। कोई रिपोर्ट नहीं दिखाई गई। भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। डॉ. फारूक बुधवार को शेर-ए-कश्मीर भवन जम्मू में पार्टी के ओबीसी सेल जम्मू संभाग के एक दिवसीय सम्मेलन में बोल रहे थे।  

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उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नौकरशाही शासन लोकप्रिय सरकार का कोई विकल्प नहीं है। यहां के लोग तानाशाही से थक चुके हैं और उन्हें अब लोकप्रिय सरकार की जरूरत है। सत्तावादी और प्रशासन के कुशासन से लोग अपना धैर्य खो रहे हैं।
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परिसीमन में की जा रही  देरी 
जिस तरह से परिसीमन में देरी की जा रही है उससे लगता है कि सरकार का निकट भविष्य में चुनाव करवाने का इरादा नहीं है। कब तक लोगों पर जबरन फैसले थोपे जाएंगे। केंद्रीय नेता हाल ही में नागरिकों की हत्याओं के मद्देनजर कश्मीरी पंडितों के कश्मीर से जाने से इंकार कर रहे हैं। वे पर्यटन पुनरुद्वार के बारे में भी गुमराह कर रहे हैं। 
 

जम्मू कश्मीर के असलियत को नहीं दिखाया जा रहा 
अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर की सही असलियत को नहीं दिखाया जा रहा। आज जो बोलता है उसे जेलों में बंद कर दिया जाता है। महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। खासतौर पर ओबीसी के पिछड़े वर्ग की महिलाओं को अपने हक के लिए आगे आना चाहिए।

महात्मा गांधी ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर से उन्हें नई किरण दिखाई दी है। हमें हिम्मत नहीं छोड़नी है। अपने हक के लिए आवाज उठाना जारी रखेंगे। आरक्षण के लिए आवाज बुलंद करनी होगी। सम्मेललन में ओबीसी सेल के प्रांतीय अध्यक्ष अब्दुल गनी तेली ने चार सदस्यीय पैनल की घोषणा की। मौके पर डॉ. शेख मुस्तफा कमाल, अजय कुमार सडोत्रा, रतन लाल गुप्ता, शेख बशीर अहमद, एजाज जान आदि मौजूद रहे। 



तीन प्रस्तावों पर लगाई मुहर 
सम्मेलन में अनुच्छेद 370 के साथ जम्मू-कश्मीर राज्य का दर्जा बहाल करना, ओबीसी को एकमुश्त श्रेणी प्रमाणपत्र जारी करना, अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के समानता पर राजनीतिक आरक्षण से जुड़े तीन प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

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