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तकनीकी प्रगति में सक्रिय भागीदार बने किसान : सतीश शर्मा
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खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले, सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के कृषि क्षेत्र को अत्याधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से बदलने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
मंत्री पीआई-राही, उत्तरी क्षेत्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लस्टर द्वारा जम्मू-कश्मीर विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्कॉस्ट-के) के सहयोग से आयोजित कश्मीर में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने हेतु एक उच्च-स्तरीय हितधारक बैठक को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “आज का ध्यान कश्मीर में एक गतिशील विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर है। हमारे किसानों को न केवल सरकारी सहायता का लाभार्थी होना चाहिए, बल्कि तकनीकी प्रगति में सक्रिय भागीदार भी बनना चाहिए।” सतीश शर्मा ने शेर-ए-कश्मीर शेख अब्दुल्ला की दूरदर्शी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा, जिन्होंने ऐतिहासिक भूमि-से-किसान कानून लागू किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान में स्मार्ट तकनीकों और आधुनिक वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से कृषि में समान परिवर्तन लाने पर ध्यान केंद्रित है।
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मंत्री ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार की कृषि परिवर्तन एजेंडा के कई प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया, जिनमें स्मार्ट खेती समाधान, जैव प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप, फसलोत्तर प्रबंधन और मूल्यवर्धन, कृषि में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, ई-कॉमर्स और किसानों के लिए प्रत्यक्ष बाजार पहुंच, कौशल विकास, क्षमता निर्माण और मजबूत अनुसंधान और विकास शामिल हैं।
सतीश शर्मा ने स्कॉस्ट-के के युवा नवप्रवर्तकों द्वारा चार नए स्टार्ट-अप्स का शुभारंभ भी किया, जो कृषि-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में युवा नेतृत्व वाली उद्यमिता के लिए सरकार के समर्थन का प्रतीक है। उन्होंने कश्मीर के युवाओं की नवाचार भावना की सराहना की और अनुसंधान और नवाचार के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, हमारे पास ऐसे दिमाग हैं जो चमत्कार कर सकते हैं। उन्हें बस सही माहौल की जरूरत है, जैसे एक बीज को खिलने के लिए सूरज और पानी की जरूरत होती है।
इस अवसर पर स्कॉस्ट-के के कुलपति ने एक जीवंत कृषि-प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए विश्वविद्यालय की पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये कदम रोजगार योग्यता बढ़ाने, उपज में सुधार और किसान समुदाय की आय को बढ़ाने की दिशा में हैं।
सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी, डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी ने सरकार और अकादमिक जगत के बीच की खाई को पाटने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि युवा शोधकर्ताओं को उनके नवाचारों को बढ़ाने में सक्षम बनाया जा सके।
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मंत्री पीआई-राही, उत्तरी क्षेत्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लस्टर द्वारा जम्मू-कश्मीर विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्कॉस्ट-के) के सहयोग से आयोजित कश्मीर में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने हेतु एक उच्च-स्तरीय हितधारक बैठक को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा, “आज का ध्यान कश्मीर में एक गतिशील विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर है। हमारे किसानों को न केवल सरकारी सहायता का लाभार्थी होना चाहिए, बल्कि तकनीकी प्रगति में सक्रिय भागीदार भी बनना चाहिए।” सतीश शर्मा ने शेर-ए-कश्मीर शेख अब्दुल्ला की दूरदर्शी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा, जिन्होंने ऐतिहासिक भूमि-से-किसान कानून लागू किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान में स्मार्ट तकनीकों और आधुनिक वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से कृषि में समान परिवर्तन लाने पर ध्यान केंद्रित है।
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मंत्री ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार की कृषि परिवर्तन एजेंडा के कई प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया, जिनमें स्मार्ट खेती समाधान, जैव प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप, फसलोत्तर प्रबंधन और मूल्यवर्धन, कृषि में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, ई-कॉमर्स और किसानों के लिए प्रत्यक्ष बाजार पहुंच, कौशल विकास, क्षमता निर्माण और मजबूत अनुसंधान और विकास शामिल हैं।
सतीश शर्मा ने स्कॉस्ट-के के युवा नवप्रवर्तकों द्वारा चार नए स्टार्ट-अप्स का शुभारंभ भी किया, जो कृषि-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में युवा नेतृत्व वाली उद्यमिता के लिए सरकार के समर्थन का प्रतीक है। उन्होंने कश्मीर के युवाओं की नवाचार भावना की सराहना की और अनुसंधान और नवाचार के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, हमारे पास ऐसे दिमाग हैं जो चमत्कार कर सकते हैं। उन्हें बस सही माहौल की जरूरत है, जैसे एक बीज को खिलने के लिए सूरज और पानी की जरूरत होती है।
इस अवसर पर स्कॉस्ट-के के कुलपति ने एक जीवंत कृषि-प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए विश्वविद्यालय की पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये कदम रोजगार योग्यता बढ़ाने, उपज में सुधार और किसान समुदाय की आय को बढ़ाने की दिशा में हैं।
सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी, डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी ने सरकार और अकादमिक जगत के बीच की खाई को पाटने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि युवा शोधकर्ताओं को उनके नवाचारों को बढ़ाने में सक्षम बनाया जा सके।