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Maharaja Hari Singh Jayanti: एलओसी पार भी महाराजा के मुरीद, बोले- पीओजेके में भी हो सरकारी छुट्टी

ओमपाल सांब्याल, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 23 Sep 2022 02:04 AM IST
सार

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से कई लोग सोशल मीडिया के जरिये महाराजा हरि सिंह की  जयंती पर छुट्टी के बधाई संदेश भेज रहे हैं। उनका कहना है कि जम्मू में लोग महाराजा को चाहते हैं, लेकिन महाराजा की जयंती पर सरकारी छुट्टी की घोषणा को सात दशक से भी ज्यादा समय लग गया।

जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह
जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह - फोटो : परिजन
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विस्तार

जम्मू-कश्मीर के अंतिम महाराजा हरि सिंह की जयंती की सरकारी छुट्टी पर जश्न के माहौल के बीच एलओसी पार से भी मुबारकबाद आ रही हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से कई लोग सोशल मीडिया के जरिये जयंती पर छुट्टी के बधाई संदेश भेज रहे हैं।

छुट्टी की घोषणा को सात दशक से भी ज्यादा समय लगा

किसी ने कहा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में भी सरकारी छुट्टी होनी चाहिए तो किसी ने सवाल किया, महाराजा के नाम की सरकारी छुट्टी में 75 साल क्यों लग गए। रावलाकोट के जियाब खान ने लिखा - जम्मू में लोग महाराजा को चाहते हैं, लेकिन महाराजा की जयंती पर सरकारी छुट्टी की घोषणा को सात दशक से भी ज्यादा समय लग गया।

जम्मू में उनके लिए उतनी आवाज क्यों नहीं उठाई

जियाब ने कहा कि महाराजा कश्मीर केंद्रित सियासत का शिकार हुए थे लेकिन जम्मू में उनके लिए उतनी आवाज क्यों नहीं उठाई गई। रावलाकोट से ही अली खलीक ने जयंती की छुट्टी पर मुबारकबाद संदेश के साथ लिखा - मेरा मानना है कि महाराजा की जयंती पर पीओजेके में भी छुट्टी होनी चाहिए।

महाराजा महान लीडर थे

दुबई में रह रहे रावलाकोट निवासी शहजाद हाकिम अवान ने कहा, महाराजा महान लीडर थे। वे कश्मीर परस्त और मुहिब ए वतन राजा थे जिसे अपने मुल्क से प्यार था। सोशल मीडिया की प्रोफाइल के अनुसार पीओजेके सरकार के पूर्व सचिव मीरपुर निवासी शौकत मजीद, मीरपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर इरफान खान, सैयद नजीर काजमी ने भी महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी के लिए लिखा - सभी को इस फैसले की मुबारकबाद।

कानूनी रूप से भारतीय क्षेत्र है पीओजेके

संसद के दोनों सदनों में 22 फरवरी 1994 को पारित प्रस्ताव के अनुसार समूचा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। पुनर्गठन के बाद संसद में 11 मार्च 2020 को दिए गए जवाब के अनुसार दोनों केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का समूचा क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा।

पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय भूभाग पर भी सरकार की लगातार नजर और निगरानी रहती है। भारत की ओर से निरंतर पाकिस्तान को कहा जाता है कि वो अवैध और जबरन कब्जाए गए क्षेत्र को खाली कर मानवाधिकार हनन को रोके और क्षेत्र में किसी भी तरह से बदलाव से दूर रहे।

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