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काश! सस्ती दवाइयां परोसे आम बजट

Fri, 27 Feb 2015 11:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Fri, 27 Feb 2015 11:46 AM IST
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expectations of education and medical sector in budget

28 फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा, जिसको लेकर आम बजट से शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में उम्मीदें जगी हैं कि इनके विकास की दिशा मजबूत होगी। लोगों को उम्मीद है कि इस बार केंद्र के आम बजट में सस्ती दवाइयां होंगी और शिक्षा पर भी कुछ बेहतर हो। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रिंसिपल डा. किरण बख्शी का कहना है कि बजट में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा से रोजगार को जोड़ने के प्रति विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है, ताकि बेरोजगारी दूर हो सके।

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रोजगारोन्मुख शिक्षा की जरूरतों पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि कालेजों में ढांचागत सुविधाओं को बढ़ावा मिलना चाहिए। कालेजों में फीजिकल इन्फ्रास्टक्चर क ा प्रावधान होना चाहिए। आम बजट में हेल्थ सेक्टर में राहत की जनता में उम्मीदें लगी हैं। उनका मानना है बजट में हेल्थ सेक्टर में ज्यादा राहत दी जानी चाहिए। लोगों तक सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने को सरल बनाना सुनिश्चित किया जाए।
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रिष्ठ मनोचिकित्सक डा. जगदीश थापा का कहना है कि बजट में इमरजेंसी दवाइयों की कीमतों में कटौती की जानी चाहिए, ताकि ये दवाइयां हर वर्ग के लोगों की पहुंच में रहें। इसके अलावा कैंसर, किडनी जैसी लंबी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाकर उनपर आर्थिक बोझ कम किया जाए।
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रियासत में नए मेडिकल कालेज खोलना स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास की दृष्टि से बेहतर कदम है, लेकिन ऐसे कालेजों को खोलने से पहले पर्याप्त फैकल्टी की नियुक्ति की जानी चाहिए। मनोचिकित्सकों की संख्या बढ़ाने को गंभीरता से लिया जाए। जम्मू संभाग की ही लाखों की आबादी पर सिर्फ चार मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं।


इसके लिए काउंसिलरों और मनोचिकित्सकों के पदों को बढ़ाया जाए। डा. अशोक शर्मा ने कहा कि बजट में लोगों के लिए सबसे अहम हेल्थ सेक्टर रहता है। ऐसे में महंगी दवाइयों की कीमतों को कम किया जाए।

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