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Jammu News: शिक्षा में कोई तो खेल है...मैदान नहीं फिर भी स्कूलों को मान्यता
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रति शर्मा
जम्मू। शहर में कई ऐसे स्कूल चल रहे हैं, जिन्हें मान्यता देते वक्त शिक्षा विभाग चिर निद्रा में था। न तो ये स्कूल इमारत को लेकर खरा उतरते हैं, न अग्निशमन और न ही खेल मैदान के नियमों पर। शहर के गांधी नगर और इससे सटे क्षेत्रों में कई ऐसे स्कूल हैं। यह वे इलाके हैं, जहां बड़े अधिकारी रहते हैं लेकिन कभी किसी ने इस बात पर गौर ही नहीं किया। ऐसा ही एक नामी स्कूल है, शिक्षा निकेतन गांधी नगर। स्कूल के पास अपना खेल मैदान नहीं है, पर यह चल रहा है। शिक्षा अधिकारी खुद मानते हैं कि बिना खेल मैदान के मान्यता का सवाल ही पैदा नहीं होता, लेकिन यहां यह नियम नहीं देखा गया। इमारत भी कुछ मरले में है। सीढ़ियां संकरी हैं। शौचालय तक सही नहीं हैं। बिजली का खंभा स्कूल की दीवार से सटा है। तारें पास से निकली हैं। इससे भी खतरनाक यह है कि तीन मंजिला स्कूल में ऊंची ग्रिल नहीं है। अगर किसी बच्चे से दूसरे को धक्का लग जाए तो हादसा हो सकता है। संवाद
शौचालय ठीक नहीं, पूछा तो डायरेक्टर बोले-छुट्टियों में सही करवा देंगे
स्कूल में छात्राएं भी हैं, लेकिन शौचालय की हालत ऐसी है कि तस्वीरों में इसे नहीं तक दिखा सकते। बदबू के चलते कई बच्चे इसे मजबूरन इस्तेमाल करते हैं या फिर करना ही छोड़ दिया है। अभिभावकों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि मैनेजमेंट को आपत्ति दर्ज करवाते हैं तो उस समय वह पानी फिंकवाकर सफाई करवा देते हैं, लेकिन हालात फिर वही हो जाते हैं। उनके बच्चे कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं। अब तो बच्चे वॉशरूम को इस्तेमाल ही नहीं करते।
स्कूल घरों और इमारतों से घिरा, गली संकरी, आग की सूरत में मुख्य गेट से निकासी
नियम कहते हैं कि स्कूल बनाते वक्त इमारत का नक्शा पास होता है। अग्निशमन की एनओसी चाहिए होती है, पर संभाग के बहुत से स्कूलों में इस बात का ख्याल नहीं रखा गया है। शिक्षा निकेतन के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। यहां पास में लगे खंभे से स्कूल को तारें जा रही हैं, अन्य तारें भी हैं। अगर किसी कारण से आगजनी होती है तो निकासी के लिए केवल मुख्य गेट ही है। आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी संकरी गलियों में नहीं घुस पाएगी।
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सार्वजनिक पार्क बना मैदान
रिहायशी क्षेत्र में चल रहे स्कूल ने सार्वजनिक पार्क को ही खेल का मैदान बना लिया है। यहीं पर बच्चों की खेल गतिविधियां करवाई जाती हैं जबकि अभिभावकों से पैसा पूरा लिया जाता है। अमर उजाला के पास इसकी तस्वीरें भी हैं। जब इसे लेकर प्रबंधन से पूछा तो उन्होंने भी माना कि उनके पास मैदान नहीं है और खेल गतिविधियां पार्क में ही करवाई जाती हैं। हालांकि बच्चों के यहां खेलने को लेकर प्रशासन को भी खास आपत्ति नहीं है।
काम जुगाड़ का और सख्ती पूरी... आधी छुट्टी पर टीननुमा शेड में भेज देते हैं बच्चे, बाल थोड़े भी बड़े तो 2 नंबर काट देते हैं
स्कूल में 513 छात्र-छात्राएं हैं लेकिन स्कूल की जगह इतने बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है। हाफ डे में उनको शिफ्ट में तीसरी मंजिल पर बनाए गए टीननुमा शेड में भेज दिया जाता है। गर्मी के दिनों में हाफ डे का आनंद वह तीसरी मंजिल की तपती टीन के नीचे लेते हैं। एक अभिभावक ने बताया कि उनका बच्चा नौवीं कक्षा में है। उसके बाल थोड़े बड़े हो गए तो मार्क्सशीट में फर्क आ गया। बच्चा जितना मर्जी मेहनत से पढ़ाई कर ले बाल बड़े तो उसके 2 नंबर काट देते हैं। खुद स्कूल नियमों को लेकर सख्त है लेकिन सुविधा के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं।
मैं जानता हूं बच्चों को दिक्कत है, शौचालय ठीक करवा दूंगा
शिक्षा निकेतन गांधी नगर के डायरेक्टर ऋषि मेंगी ने माना कि वॉशरूम को लेकर बच्चों को दिक्कत है। गर्मी की छुट्टियां पड़ने के बाद स्कूल के शौचालय ठीक करवा दूंगा। अभी करवाना मुश्किल है क्योंकि फिर बच्चों को वह सुविधा नहीं मिल पाएगी। बालों की कटिंग की बात कहें तो वह भी सही है। हम सिर्फ यूनिट टेस्ट में ही नहीं, अपितु अर्धवार्षिक परीक्षा में भी 2 नंबर काट रहे हैं। यह दंड स्वरूप है। हमारे पास खेल का मैदान नहीं है। यह भी ठीक है कि हम पार्क में बच्चों को खेलने भेजते हैं।
स्प्रिंगडेल्स हायर सेकेंडरी स्कूल...मैदान तो दूर जगह इतनी कम कि शिफ्ट में होती है प्रार्थना
जम्मू। कृष्णा नगर के स्प्रिंगडेल्स हायर स्केंडरी स्कूल की बात करें तो यह भी बिना खेल मैदान के चल रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में मैदान नहीं होने से बच्चों को खेलने की जगह नहीं मिलती। स्कूल को मैदान नहीं होने की कोई चिंता नहीं है। एडमिन अधिकारी ने नाम नहीं बताया लेकिन यह कहा कि हमारे बच्चे अच्छा खेलते हैं। वे मेडल भी लाए हैं। जगह कम होने पर उन्होंने माना कि हम बच्चों की सुबह की प्रार्थना शिफ्ट में करवाते हैं। रही बात खेलने की तो पास के साइंस कॉलेज के मैदान का इस्तेमाल करते हैं। कुछ बच्चे एमए स्टेडियम में स्कूल के बाद खेलने जाते हैं। अधिकारी ने प्रिंसिपल का नंबर देने से मना कर दिया और टालमटोल करते रहे। इस बात की रिकार्डिंग अमर उजाला के पास सुरक्षित है।
आरएन टैगोर ...मंदिर में खेलते हैं बच्चे, स्कूल में बहती है गंदी नाली
आरएन टैगोर हायर सकेंडरी स्कूल नानक नगर भी बिना खेल मैदान के 12वीं कक्षा तक चल रहा है। खेलना हो तो बच्चों को पास स्थित मंदिर में भेज दिया जाता है। आग बुझाने के लिए स्कूल में एक ही अग्निशमन यंत्र है। अभिभावकों के अनुसार स्कूल में आपातकालीन गेट नहीं है, जबकि प्रबंधकों का कहना है कि गेट है। अभिभावकों के अनुसार स्कूल से गंदे पानी की नाली गुजरती है। इस पर जंगला जरूर है लेकिन इस पर से बच्चे गिर जाते हैं।
कुछ समस्याएं तो हैं लेकिन विभाग यह जानता है। शिक्षा विभाग ने मीटिंग में कई बार हमें यह बोला है कि कोई कार्यक्रम करवाना हो तो सरकारी स्कूल की ग्राउंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस स्कूल में 423 बच्चे पढ़ते हैं और हमारी पढ़ाई में किसी को कोई समस्या नहीं आएगी।
डॉ. हितेश महाजन, प्रधानाचार्य
मैदान संबंधी ये नियम
एसआरओ 123 के तहत प्रावधान है कि प्री-प्राइमरी, प्राथमिक, मिडिल, हाई, हायर सकेंडरी स्कूल के लिए खेल मैदान जरूरी है। प्री-प्राइमरी के लिए भी 150 वर्ग फुट का खेलने का कमरा या फिर मैदान होना जरूरी है। इन विभागों से मिली है मान्यता ः राजस्व विभाग, अग्निशमन और आपातकालीन विभाग, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, यातायात विभाग, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड।
कोई स्वत: संज्ञान नहीं, शिकायत मिलने का इंतजार कर रहा शिक्षा विभाग
शिक्षा विभाग जम्मू के सीईओ सूरज सिंह ने बताया कि स्कूलों में खेल का मैदान होना अति आवश्यक है। इसके बिना स्कूल को मान्यता मिलती ही नहीं है। यह नियमों के विरुद्ध है। हमें जहां कभी भी कोई शिकायत मिलती है, उस पर कार्रवाई जरूर करेंगे। हम स्कूल खुलने से पहले सभी प्रकार की औपचारिकताओं को ध्यान में रखते हैं और यह भी देखते हैं कि क्या वे पूरी हैं। अलग-अलग विभाग भी इस पर ध्यान देते हैं।
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जम्मू। शहर में कई ऐसे स्कूल चल रहे हैं, जिन्हें मान्यता देते वक्त शिक्षा विभाग चिर निद्रा में था। न तो ये स्कूल इमारत को लेकर खरा उतरते हैं, न अग्निशमन और न ही खेल मैदान के नियमों पर। शहर के गांधी नगर और इससे सटे क्षेत्रों में कई ऐसे स्कूल हैं। यह वे इलाके हैं, जहां बड़े अधिकारी रहते हैं लेकिन कभी किसी ने इस बात पर गौर ही नहीं किया। ऐसा ही एक नामी स्कूल है, शिक्षा निकेतन गांधी नगर। स्कूल के पास अपना खेल मैदान नहीं है, पर यह चल रहा है। शिक्षा अधिकारी खुद मानते हैं कि बिना खेल मैदान के मान्यता का सवाल ही पैदा नहीं होता, लेकिन यहां यह नियम नहीं देखा गया। इमारत भी कुछ मरले में है। सीढ़ियां संकरी हैं। शौचालय तक सही नहीं हैं। बिजली का खंभा स्कूल की दीवार से सटा है। तारें पास से निकली हैं। इससे भी खतरनाक यह है कि तीन मंजिला स्कूल में ऊंची ग्रिल नहीं है। अगर किसी बच्चे से दूसरे को धक्का लग जाए तो हादसा हो सकता है। संवाद
शौचालय ठीक नहीं, पूछा तो डायरेक्टर बोले-छुट्टियों में सही करवा देंगे
स्कूल में छात्राएं भी हैं, लेकिन शौचालय की हालत ऐसी है कि तस्वीरों में इसे नहीं तक दिखा सकते। बदबू के चलते कई बच्चे इसे मजबूरन इस्तेमाल करते हैं या फिर करना ही छोड़ दिया है। अभिभावकों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि मैनेजमेंट को आपत्ति दर्ज करवाते हैं तो उस समय वह पानी फिंकवाकर सफाई करवा देते हैं, लेकिन हालात फिर वही हो जाते हैं। उनके बच्चे कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं। अब तो बच्चे वॉशरूम को इस्तेमाल ही नहीं करते।
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स्कूल घरों और इमारतों से घिरा, गली संकरी, आग की सूरत में मुख्य गेट से निकासी
नियम कहते हैं कि स्कूल बनाते वक्त इमारत का नक्शा पास होता है। अग्निशमन की एनओसी चाहिए होती है, पर संभाग के बहुत से स्कूलों में इस बात का ख्याल नहीं रखा गया है। शिक्षा निकेतन के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। यहां पास में लगे खंभे से स्कूल को तारें जा रही हैं, अन्य तारें भी हैं। अगर किसी कारण से आगजनी होती है तो निकासी के लिए केवल मुख्य गेट ही है। आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी संकरी गलियों में नहीं घुस पाएगी।
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सार्वजनिक पार्क बना मैदान
रिहायशी क्षेत्र में चल रहे स्कूल ने सार्वजनिक पार्क को ही खेल का मैदान बना लिया है। यहीं पर बच्चों की खेल गतिविधियां करवाई जाती हैं जबकि अभिभावकों से पैसा पूरा लिया जाता है। अमर उजाला के पास इसकी तस्वीरें भी हैं। जब इसे लेकर प्रबंधन से पूछा तो उन्होंने भी माना कि उनके पास मैदान नहीं है और खेल गतिविधियां पार्क में ही करवाई जाती हैं। हालांकि बच्चों के यहां खेलने को लेकर प्रशासन को भी खास आपत्ति नहीं है।
काम जुगाड़ का और सख्ती पूरी... आधी छुट्टी पर टीननुमा शेड में भेज देते हैं बच्चे, बाल थोड़े भी बड़े तो 2 नंबर काट देते हैं
स्कूल में 513 छात्र-छात्राएं हैं लेकिन स्कूल की जगह इतने बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है। हाफ डे में उनको शिफ्ट में तीसरी मंजिल पर बनाए गए टीननुमा शेड में भेज दिया जाता है। गर्मी के दिनों में हाफ डे का आनंद वह तीसरी मंजिल की तपती टीन के नीचे लेते हैं। एक अभिभावक ने बताया कि उनका बच्चा नौवीं कक्षा में है। उसके बाल थोड़े बड़े हो गए तो मार्क्सशीट में फर्क आ गया। बच्चा जितना मर्जी मेहनत से पढ़ाई कर ले बाल बड़े तो उसके 2 नंबर काट देते हैं। खुद स्कूल नियमों को लेकर सख्त है लेकिन सुविधा के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं।
मैं जानता हूं बच्चों को दिक्कत है, शौचालय ठीक करवा दूंगा
शिक्षा निकेतन गांधी नगर के डायरेक्टर ऋषि मेंगी ने माना कि वॉशरूम को लेकर बच्चों को दिक्कत है। गर्मी की छुट्टियां पड़ने के बाद स्कूल के शौचालय ठीक करवा दूंगा। अभी करवाना मुश्किल है क्योंकि फिर बच्चों को वह सुविधा नहीं मिल पाएगी। बालों की कटिंग की बात कहें तो वह भी सही है। हम सिर्फ यूनिट टेस्ट में ही नहीं, अपितु अर्धवार्षिक परीक्षा में भी 2 नंबर काट रहे हैं। यह दंड स्वरूप है। हमारे पास खेल का मैदान नहीं है। यह भी ठीक है कि हम पार्क में बच्चों को खेलने भेजते हैं।
स्प्रिंगडेल्स हायर सेकेंडरी स्कूल...मैदान तो दूर जगह इतनी कम कि शिफ्ट में होती है प्रार्थना
जम्मू। कृष्णा नगर के स्प्रिंगडेल्स हायर स्केंडरी स्कूल की बात करें तो यह भी बिना खेल मैदान के चल रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में मैदान नहीं होने से बच्चों को खेलने की जगह नहीं मिलती। स्कूल को मैदान नहीं होने की कोई चिंता नहीं है। एडमिन अधिकारी ने नाम नहीं बताया लेकिन यह कहा कि हमारे बच्चे अच्छा खेलते हैं। वे मेडल भी लाए हैं। जगह कम होने पर उन्होंने माना कि हम बच्चों की सुबह की प्रार्थना शिफ्ट में करवाते हैं। रही बात खेलने की तो पास के साइंस कॉलेज के मैदान का इस्तेमाल करते हैं। कुछ बच्चे एमए स्टेडियम में स्कूल के बाद खेलने जाते हैं। अधिकारी ने प्रिंसिपल का नंबर देने से मना कर दिया और टालमटोल करते रहे। इस बात की रिकार्डिंग अमर उजाला के पास सुरक्षित है।
आरएन टैगोर ...मंदिर में खेलते हैं बच्चे, स्कूल में बहती है गंदी नाली
आरएन टैगोर हायर सकेंडरी स्कूल नानक नगर भी बिना खेल मैदान के 12वीं कक्षा तक चल रहा है। खेलना हो तो बच्चों को पास स्थित मंदिर में भेज दिया जाता है। आग बुझाने के लिए स्कूल में एक ही अग्निशमन यंत्र है। अभिभावकों के अनुसार स्कूल में आपातकालीन गेट नहीं है, जबकि प्रबंधकों का कहना है कि गेट है। अभिभावकों के अनुसार स्कूल से गंदे पानी की नाली गुजरती है। इस पर जंगला जरूर है लेकिन इस पर से बच्चे गिर जाते हैं।
कुछ समस्याएं तो हैं लेकिन विभाग यह जानता है। शिक्षा विभाग ने मीटिंग में कई बार हमें यह बोला है कि कोई कार्यक्रम करवाना हो तो सरकारी स्कूल की ग्राउंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस स्कूल में 423 बच्चे पढ़ते हैं और हमारी पढ़ाई में किसी को कोई समस्या नहीं आएगी।
डॉ. हितेश महाजन, प्रधानाचार्य
मैदान संबंधी ये नियम
एसआरओ 123 के तहत प्रावधान है कि प्री-प्राइमरी, प्राथमिक, मिडिल, हाई, हायर सकेंडरी स्कूल के लिए खेल मैदान जरूरी है। प्री-प्राइमरी के लिए भी 150 वर्ग फुट का खेलने का कमरा या फिर मैदान होना जरूरी है। इन विभागों से मिली है मान्यता ः राजस्व विभाग, अग्निशमन और आपातकालीन विभाग, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, यातायात विभाग, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड।
कोई स्वत: संज्ञान नहीं, शिकायत मिलने का इंतजार कर रहा शिक्षा विभाग
शिक्षा विभाग जम्मू के सीईओ सूरज सिंह ने बताया कि स्कूलों में खेल का मैदान होना अति आवश्यक है। इसके बिना स्कूल को मान्यता मिलती ही नहीं है। यह नियमों के विरुद्ध है। हमें जहां कभी भी कोई शिकायत मिलती है, उस पर कार्रवाई जरूर करेंगे। हम स्कूल खुलने से पहले सभी प्रकार की औपचारिकताओं को ध्यान में रखते हैं और यह भी देखते हैं कि क्या वे पूरी हैं। अलग-अलग विभाग भी इस पर ध्यान देते हैं।