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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Even after a month, the signs of destruction remain, victims are waiting for relief.

Jammu: एक माह बाद भी बर्बादी के निशां बाकी, पीड़ित देख रहे राहत की राह, मलबा और सीलन से घर और हालात बदतर

Sun, 28 Sep 2025 03:34 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sun, 28 Sep 2025 03:34 PM IST
सार

एक माह बाद भी राजीव कॉलोनी, गुज्जर नगर और मंगू चक के बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत नहीं मिली है, घरों में सीलन और मलबा बरकरार है। सरकारी सहायता न मिलने से रोज कमाने वाले परिवार आर्थिक तंगी में हैं और मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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Even after a month, the signs of destruction remain, victims are waiting for relief.
राजीव कॉलोनी की खस्ताहाल सड़क को दिखाते स्थानीय लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आसमान से एक माह पहले बरसी आफत ने जिस तरह तबाही मचाई उसे याद कर राजीव कॉलोनी, गुज्जर नगर व पीरखो मोहल्ले में लोग आज भी सिहर उठते हैं। आपदा के एक माह बाद भी इन पीड़ित परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ है।

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सड़कें खराब हैं। घरों में बाढ़ का पानी घुसने के बाद सीलन अभी भी कम नहीं हुई है। गलियों से मलबा निकालना बाकी है। राजीव कॉलोनी और गुज्जर नगर के लोग पेजयल के लिए नगर निगम के टैंकर पर निर्भर हैं। पाइप लाइन दुरुस्त नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि मलबा निकालने के लिए ही 10 से 15 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं। अब सरकार से मदद मिलने की आस लगाए बैठे हैं।
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26 अगस्त को बारिश के बाद तवी नदी में आई बाढ़ से राजीव कॉलोनी, गुज्जर नगर व पीरखो में लोगों को सर्वाधिक नुकसान उठाना पड़ा था। अमर उजाला ने शनिवार को एक माह बाद स्थिति देखने के लिए इन इलाकों को दौरा किया। लोगों से बात कर हाल जाना, सरकारी स्तर पर क्या मदद मिली। टीम सबसे पहले बिक्रम चौक से सटी राजीव कॉलोनी में पहुंची।
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यह मोहल्ला तवी नदी के किनारे बसा है और 200 से अधिक घर हैं। अधिकतर परिवार रोज मेहनत मजदूरी कर अपनी जीविका चला रहे हैं। एक माह पहले तक प्रोविजन स्टोर चला रहे मोहम्मद रियाज ने बताया कि बाढ़ ने दुकान को भी अपने आगोश में ले लिया। इस समय कोई काम नहीं है। गलियों में अभी भी मलबा भरा है।

लोग इसे अपने स्तर पर निकाल रहे हैं। प्रशासन की तरफ से भी मजदूर लगाए गए हैं। तवी नदी के किनारे वाली सड़क पूरी तरह टूट गई है। पीने के पानी के लिए अभी नगर निगम के टैंकर पर निर्भर हैं। सरकार से कोई मदद नहीं मिली है।

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घर सीलन से भरा, सारा सामान बर्बाद हो गया
भारी बारिश ने घर का सारा सामान खराब कर दिया। एक महीने बाद भी अब तक सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। पीने के पानी के लिए पैदल बाल्टी भरकर लानी पड़ रही है। टूटी पाइप लाइन को सुधारा नहीं जा सका है। प्रशासन के अधिकारी आए थे तो आस जगी थी कि मदद मिलेगी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला। -प्रमिला देवी, राजीव कॉलोनी

गलियों में गाद और कीचड़, लोग परेशान
एक महीने बाद भी कोई राहत नहीं है। गलियों में कीचड़ व गाद भरी हुई है। सरकार से मदद की आस है लेकिन अभी तक मिली नहीं है। अधिकारी आए और नाम लिखकर ले गए थे। पता नहीं कब आर्थिक मदद मिलेगी। गरीब परिवारों का काफी नुकसान पहुंचा है। रोज ठेला लगाकर कमाने-खाने वाले लोग हैं। कब तक इस तरह गुजारा होगा। सरकार को मदद करने में अब देर नहीं करनी चाहिए। बिशन लाल शर्मा, राजीव काॅलोनी

घरों में 12 फुट तक भर गया था मलबा
गुज्जर नगर में भारी बारिश के बाद तवी नदी का पानी 15 फुट से ऊपर तक आ गया था। घर में 12 फुट तक मलबा आ गया था। कमरों में अभी भी सीलन है। मलबा निकालने के लिए 10 हजार रुपये से अधिक खर्च हो गए है। पूरा सामान गद्दे, बेड व अलमारी सहित फ्रिज खराब हो गए हैं। सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द मदद दे। खेमराज शर्मा, गुज्जर नगर

सामान खराब हो गया, मदद कब मिलेगी पता नहीं
-घर के सभी कमरों में बाढ़ से गाद भर गई थी। इसे अब तक निकाला नहीं जा सका है। सामान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। प्रशासन को चाहिए कि जो मदद का आश्वासन दिया है उसे पूरा करे। गरीब परिवार इस आपदा में परेशान हैं। दो वक्त की रोटी भी नहीं जुटा पा रहे हैं। पूरा दिन घर में सफाई करने में ही बीत जा रहा है। एक महीने बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो सका है। - मीनाक्षी, गुज्जर नगर

रोज कमाने वालों की टूट चुकी है कमर
इस आपदा से रोज कमाने-खाने वाले परिवार अधिक प्रभावित हुए हैं। सरकार व प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द मदद के लिए मुआवाजा घोषित करे। गुज्जर नगर में लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। अभी तक मकानों में गाद निकाल रहे हैं। मजदूरों के साथ ही खुद भी जुटना पड़ रहा है। - आशीष शर्मा, गुज्जर नगर

मंगू चक में बाढ़ प्रभावित लोग सहायता से वंचित
मीरां साहिब। 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के एक माह बाद भी मंगू चक गांव के लोग सरकारी सहायता राशि से वंचित हैं। हालांकि बिजली और पानी जैसी मूलभूत सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को आर्थिक मुआवजा नहीं मिल पाया है।

गांव के निवासी भान सिंह ने बताया कि यहां करीब 53 परिवारों की 300 की आबादी है। बाढ़ के बाद कई सामाजिक संगठनों ने खाना, कपड़े और पानी बांटकर कुछ राहत दी थी, लेकिन किसानों की फसलें बह जाने के बावजूद अब तक कोई राहत राशि नहीं दी गई। नंबरदार सतपाल ने बताया कि खेतों में रेत और पानी भर जाने से चारा न मिलने पर पशुपालक परेशान हैं। गृहिणी मीनू देवी ने कहा कि उनका परिवार खेती पर निर्भर था, लेकिन अब जमीन खेती योग्य नहीं रही। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से उम्मीद जगी थी, पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

पूर्व पंच चैन दास ने रिंग रोड निर्माण को बाढ़ का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि गांव नीचे होने से बाढ़ का पानी सीधे घरों और खेतों में भर गया। ग्रामीणों ने केंद्रीय टीम के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है।

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