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Jammu News: गांव की माटी से अंतरराष्ट्रीय मंच तक खो-खो खिलाड़ियों ने भरी उड़ान
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- जम्मू-कश्मीर के युवा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दिखा रहे दम
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। कभी गांवों और स्कूलों के मैदानों तक सीमित रहने वाला खो-खो खेल अब जम्मू-कश्मीर के युवाओं के सपनों का खेल बन रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में खिलाड़ी इस खेल से जुड़ रहे हैं जिसमें जम्मू जिला आगे है। तेज गति, फुर्ती और रणनीति से खेले जाने वाले इस पारंपरिक खेल के माध्यम से युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
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स्नेहा का विश्व कप में खेलने का सपना
कठुआ की स्नेहा महाजन (22) पिछले 10 वर्षों से खो-खो खेल रही हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में नेपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। वह पांच राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। जिला स्तर पर उनके नाम दो स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य सहित सात पदक हैं। साई क्लब की ओर से खेलने वाली स्नेहा खेल कोटे से नौकरी हासिल करने और खो-खो विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखती हैं।
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सुमित की ओलंपिक पदक पर नजर
अखनूर के सुमित छिब्बर (19) छह राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। इनमें महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और तेलंगाना में हुई प्रतियोगिताएं शामिल हैं। वह कानपुर में दो अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में भी खेले हैं। जिला स्तर पर पांच स्वर्ण और एक रजत पदक जीत चुके सुमित की इच्छा है कि खो-खो एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और ओलंपिक में शामिल हो, ताकि वह इन मंचों पर देश और प्रदेश के लिए पदक जीत सकें।
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एसोसिएशन को नई पहचान की उम्मीद
जम्मू-कश्मीर खो-खो एसोसिएशन के महासचिव अमरिंदर पाल सिंह के अनुसार बीएस तीर्थी ने वर्ष 1983 में एसोसिएशन की स्थापना की थी। कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है और विभिन्न आयु वर्गों की प्रतियोगिताओं से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। आगामी महीनों में खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित होने वाली राष्ट्रमंडल खो-खो चैंपियनशिप से खेल को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। कभी गांवों और स्कूलों के मैदानों तक सीमित रहने वाला खो-खो खेल अब जम्मू-कश्मीर के युवाओं के सपनों का खेल बन रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में खिलाड़ी इस खेल से जुड़ रहे हैं जिसमें जम्मू जिला आगे है। तेज गति, फुर्ती और रणनीति से खेले जाने वाले इस पारंपरिक खेल के माध्यम से युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
स्नेहा का विश्व कप में खेलने का सपना
कठुआ की स्नेहा महाजन (22) पिछले 10 वर्षों से खो-खो खेल रही हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में नेपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। वह पांच राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। जिला स्तर पर उनके नाम दो स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य सहित सात पदक हैं। साई क्लब की ओर से खेलने वाली स्नेहा खेल कोटे से नौकरी हासिल करने और खो-खो विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखती हैं।
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सुमित की ओलंपिक पदक पर नजर
अखनूर के सुमित छिब्बर (19) छह राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। इनमें महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और तेलंगाना में हुई प्रतियोगिताएं शामिल हैं। वह कानपुर में दो अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में भी खेले हैं। जिला स्तर पर पांच स्वर्ण और एक रजत पदक जीत चुके सुमित की इच्छा है कि खो-खो एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और ओलंपिक में शामिल हो, ताकि वह इन मंचों पर देश और प्रदेश के लिए पदक जीत सकें।
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एसोसिएशन को नई पहचान की उम्मीद
जम्मू-कश्मीर खो-खो एसोसिएशन के महासचिव अमरिंदर पाल सिंह के अनुसार बीएस तीर्थी ने वर्ष 1983 में एसोसिएशन की स्थापना की थी। कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है और विभिन्न आयु वर्गों की प्रतियोगिताओं से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। आगामी महीनों में खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित होने वाली राष्ट्रमंडल खो-खो चैंपियनशिप से खेल को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।