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उधमपुर जिले के 250 किसान उगा रहे यूरोपियन मशरूम
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय
Updated Tue, 21 Nov 2017 07:50 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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यूरोपियन बटन मशरूम को अक्टूबर से मार्च महीने तक लगाया जाता है। मौजूदा समय में इसकी पैदावार के लिए किसान और विभाग जोरशोर से जुटा हुआ है। इसके लिए विभाग ने 22 क्विंटल कंपोस्ट तैयार किया गया है, जिसमें करीब पांच क्विंटल मशरूम की पैदावार होगी।
इस कंपोस्ट को तैयार करने में लगभग एक महीने का समय लगा, जिसके बाद एक महीना पिन हेड फारमेशन होते ही मशरूम तैयार हो जाता है। पहले मशरूम को तैयार करने के लिए किसान व विभाग ट्रे का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन वर्तमान में इसे लगाने के लिए डेढ़ फीट चौड़े व दो फीट लंबे पालीथिन बेग में मशरूम को तैयार किया जा रहा है।
इसके लिए कमरों में लोहे, लकड़ी व बांस से रेक में रखा जा सकता है। मशरूम को तैयार करने के लिए लगभग पच्चीस हजार रुपये का खर्च आता है। जिसके चलते किसान कम खर्च कर अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं। यह किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता हैै। यदि किसान इसकी खेती को अपनाए तो एक तो वह खुद का स्वरोजगार शुरू करने के साथ ही अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुधार सकते हैं।
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मशरूम को तैैयार करने के लिए 16 से 25 डिग्री का तापमान तथा 80 से 90 नमीं जरूरत पड़ती है। तापमान के अनुकुल इसकी पैदावार होती है। वर्तमान में जिला के लगभग 250 किसान मशरूम की पैदावार कर रहे हैं।
ढाई सौ बैग में यूरोपियन बटन मशरूम लगाए गए हैं। हर बैग से डेढ़ से तीन किलो मशरूम की पैदावार होती है। यदि कोई इसका प्रशिक्षण लेना चाहता है तो वह ट्रेनिंग सेंटर मेें आकर प्रशिक्षण ले सकता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करनी है। इसके लिए विभाग समय-समय पर जागरूकता कैंप लगा कर किसानों को जागरूक करता रहता है।
राजन शर्मा, आफिसर, मशरूम डेवलपमेंट
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इस कंपोस्ट को तैयार करने में लगभग एक महीने का समय लगा, जिसके बाद एक महीना पिन हेड फारमेशन होते ही मशरूम तैयार हो जाता है। पहले मशरूम को तैयार करने के लिए किसान व विभाग ट्रे का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन वर्तमान में इसे लगाने के लिए डेढ़ फीट चौड़े व दो फीट लंबे पालीथिन बेग में मशरूम को तैयार किया जा रहा है।
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इसके लिए कमरों में लोहे, लकड़ी व बांस से रेक में रखा जा सकता है। मशरूम को तैयार करने के लिए लगभग पच्चीस हजार रुपये का खर्च आता है। जिसके चलते किसान कम खर्च कर अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं। यह किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता हैै। यदि किसान इसकी खेती को अपनाए तो एक तो वह खुद का स्वरोजगार शुरू करने के साथ ही अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुधार सकते हैं।
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मशरूम को तैैयार करने के लिए 16 से 25 डिग्री का तापमान तथा 80 से 90 नमीं जरूरत पड़ती है। तापमान के अनुकुल इसकी पैदावार होती है। वर्तमान में जिला के लगभग 250 किसान मशरूम की पैदावार कर रहे हैं।
ढाई सौ बैग में यूरोपियन बटन मशरूम लगाए गए हैं। हर बैग से डेढ़ से तीन किलो मशरूम की पैदावार होती है। यदि कोई इसका प्रशिक्षण लेना चाहता है तो वह ट्रेनिंग सेंटर मेें आकर प्रशिक्षण ले सकता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करनी है। इसके लिए विभाग समय-समय पर जागरूकता कैंप लगा कर किसानों को जागरूक करता रहता है।
राजन शर्मा, आफिसर, मशरूम डेवलपमेंट