जम्मू-कश्मीर: विधानसभा चुनाव में भाजपा, पीडीपी और नेकां को इनसे मिलेगी कड़ी टक्कर, हुआ नया गठबंधन
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पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल की जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) और पूर्व विधायक इंजीनियर रशीद की अवामी इत्तेहाद पार्टी ने चुनाव पूर्व गठबंधन की घोषणा की है। दोनों दलों ने गठबंधन कर पीपुल्स यूनाइटेड फ्रंट (पीयूएफ) का गठन किया गया है। आगामी विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगे। यह जानकारी दोनों नेताओं ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में दी।
मंगलवार को उन्होंने पत्रकारों को बताया कि राज्य में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आवामी इत्तेहाद पार्टी और जेकेपीएम ने चुनाव पूर्व गठबंधन करने और पीपुल्स यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले एकजुट होने का फैसला किया है। फैसल ने बताया कि गठबंधन करना राज्य में मौजूदा राजनीतिक अनिश्चितता को देखते हुए, राज्य के विशेष दर्जे को खत्म करने की आशंका और विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प के अभाव की वजह से जरूरी हो गया है।
इंजीनियर रशीद ने कहा कि पीपुल्स यूनाइटेड फ्रंट धर्म, क्षेत्र, जाति से ऊपर उठकर राज्य के लोगों को एकजुट करने का पूरा प्रयास करेगा। साथ ही राज्य के नागरिकों को समान अवसर व सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय मुहैया कराने की कोशिश करेगा। ज्ञात हो कि 2010 के आईएएस टॉपर शाह फैसल ने इस साल जनवरी में सरकारी नौकरी छोड़ दी थी। पूर्व जेएनयू अध्यक्ष शेहला रशीद समेत कई लोगों ने शाह फैसल की पार्टी का दामन थामा है। फैसल ने लोकसभा चुनाव के दौरान बारामुला से लड़ रहे इंजीनियर रशीद को समर्थन दिया था।
जावेद मुस्तफा मीर कोआर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष
पूर्व मंत्री जावेद मुस्तफा मीर को पीयूएफ के तीन सदस्यीय कोआर्डिनेशन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोई ऐसी राजनीतिक शक्ति नहीं है जो बेहतर प्रशासन दे सके और राजनीतिक शून्यता को भर सके। इस वजह से राज्य के हालात तथा राजनीतिक अनिश्चितता को देखते हुए गठबंधन का फैसला किया गया है।
पीयूएफ का 45 सूत्री कॉमन एजेंडा
पीयूएफ ने गठबंधन का 45 सूत्री कॉमन एजेंडा भी पेश किया। इसका उद्देश्य राज्य के लोगों की भावनाओं व आकांक्षाओं के अनुरूप कश्मीर समस्या का शांतिपूर्ण हल ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में किया जा सके। भारत-पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली के कदम उठाए जा सकें ताकि सीमा पार के दोनों ओर के लोग सुरक्षित रह सकें और राहत महसूस करें। एजेंडा में क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करना, विशेष दर्जे को बचाना, कश्मीरी पंडितों की घर वापसी का रास्ता प्रशस्त करना तथा सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करना भी शामिल है।