फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   effect of Corona epidemic in education institutions Jammu and Kashmir

जम्मू-कश्मीर: महामारी ने शिक्षा संस्थान बंद करवाए तो पढ़ाई के हाईटेक तरीके भी सिखाए

Wed, 24 Mar 2021 07:45 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Wed, 24 Mar 2021 07:45 PM IST
विज्ञापन
effect of Corona epidemic in education institutions Jammu and Kashmir
जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला

कोरोना काल की पाबंदियों में लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई का संकट खड़ा हो गया। अचानक उपजे हालात में स्कूल-कॉलेज बंद होने पर ऑनलाइन कक्षाएं, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के मंच सहारा बने। 2जी स्पीड में शुरू की गई ऑनलाइन पढ़ाई का दौर एक साल बाद अब 4जी सेवा के साथ बेहतर विकल्प के रूप में स्थापित हो रहा है। आईआईटी जम्मू के विद्यार्थियों ने हाईब्रिड क्लासरूम तैयार किया, जिसे जम्मू विश्वविद्यालय समेत कई कॉलेजों में अपनाकर ऑनलाइन वर्चुअल क्लास चलाई जा रही हैं।

विज्ञापन


दूरदराज इलाकों में टीवी, रेडियो के साथ सामुदायिक कक्षाओं का विकल्प भी कारगर रहा। भविष्य में जरूरत पड़ने पर हाईटेक पढ़ाई के यह तमाम तरीके पहले की तुलना में अब ज्यादा कारगर बन गए हैं। 2जी स्पीड में ऑनलाइन कक्षाओं में पढ़ने और पढ़ाने वालों ने व्यवस्था को संतोषजनक नहीं बताया, लेकिन 4जी सेवाएं शुरू होने के बाद कई बाधाएं दूर हुई हैं। 
विज्ञापन


ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक पहुंच के लिए रेडियो को बनाया माध्यम
दूरदराज गांवों में रहने वाले विद्यार्थियों तक पहुंच के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने रेडियो और टीवी जैसे माध्यम का उपयोग किया और नियमित कक्षाएं शुरू कीं। हालांकि यह कक्षाएं कितनी प्रभावी और लाभदायक रही, इसको लेकर विद्यार्थियों और स्कूल शिक्षा विभाग के तर्क में बड़ा अंतर है। विभाग ने पहली बार ऐसा कोई प्रयास किया था, जिसमें अधिक से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ा जाएगा। टीवी और रेडियो पर प्रतिदिन विषय के हिसाब से कक्षाएं लगती थीं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

विद्यार्थी बोले - नाम की ही थी ऑनलाइन पढ़ाई 

2जी में ऑनलाइन शिक्षा सिर्फ दिखावा था। अध्यापक यूट्यूब का लिंक व्हाट्स एप पर भेजते थे,  लेकिन वह खुल ही नहीं पाता था। गूगल मीट और जूम पर ऑनलाइन क्लासेज के दौरान इंटरनेट की स्पीड कम होने से बफरिंग होती थी और कुछ समझ ही नहीं आता था। 
- रजत कुमार, छात्र 

कभी-कभी अध्यापक पीडीएफ भेजते थे, वह इतनी मुश्किल होती थी कि उसे समझना बड़ा मुश्किल था। अध्यापक सिर्फ ऑनलाइन क्लास में जुड़ने पर जोर देते थे, जबकि पढ़ाई कुछ नहीं होती थी। हमने खुद ही पढ़ाई कर परीक्षा की तैयारी की थी। 
-अमन कुमार, छात्र 

मेरी बोर्ड की परीक्षा थी। स्कूल खुलते ही लॉकडाउन शुरू हो गया था। पढ़ाई के लिए न किताबें थीं, न स्कूल। ऑनलाइन पढ़ाई तो सिर्फ नाम की थी। मेरे पास तो मोबाइल ही नहीं था, पापा के मोबाइल पर ऑनलाइन क्लास में जुड़ता था, लेकिन इंटरनेट की स्पीड कम होने से कुछ समझ नहीं आता था। पूरे साल में दो से तीन बार ही ऑनलाइन क्लास लगी होगी। 
-सचिन कुमार, छात्र 

मेरा स्कूल विंटर जोन में है। हमारी परीक्षा नवंबर में थी, ऐसे में बिना स्कूल के बोर्ड की परीक्षा पास करना मेेरे लिए बड़ी चुनौती थी। ऑनलाइन पढ़ाई तो सिर्फ नाम की थी, जिसमें हमें कुछ पीडीएफ और वीडियो लिंक भेजते थे, जिन्हें समझना बड़ा मुश्किल होता था। 
-अंकित कुमार, छात्र 
 

इंटरनेट काम न आया तो सामुदायिक कक्षाएं से पढ़ाया 

लॉकडाउन जब लंबा चला तो स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने की योजना बनाई। इसमें सबसे पहले व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक पेज बनाए, जिसमें बच्चों को जोड़ा गया। फिर विषय वार पढ़ाई शुरू की। इस दौरान इंटरनेट बड़ी समस्या थी। 2जी मोबाइल इंटरनेट होने से बच्चों को उस तरह का लाभ नहीं मिला, जैसे मिलना चाहिए था। 
- भारत भूषण, शिक्षक

मेरी पोस्टिंग राजोरी जिले के दूरदराज इलाके में है, जहां मोबाइल इंटरनेट की कनेक्टिविटी कम होने के साथ लोगों के पास एंड्रायड मोबाइल भी नहीं है। ऐसे में हमने बच्चों के लिए कम्युनिटी क्लासेज शुरू की थीं, जिसमें काफी काफी संख्या में बच्चे जुड़े। कम्युनिटी क्लासेज का अनुभव हमारे लिए काफी अच्छा रहा। बच्चों के सिलेबस को काफी हद तक पूरा करने की कोशिश की थी। 
- हरनाम सिंह जमवाल, शिक्षक राजोरी 

किश्तवाड़ जिले के ऐसे गांव में ड्यूटी है जहां इंटरनेट तो दूर फोन पर सिग्नल तक नहीं आता। लॉकडाउन में बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाना दूरी की बात थी। हमने कम्यूनिटी क्लासेज से बच्चों को जोड़ा और उन्हें पढ़ाया। इससे बच्चों को काफी लाभ भी मिला, इसी वजह से स्कूल के बच्चों का परिणाम काफी अच्छा रहा। 
- संजीत शर्मा, शिक्षक, किश्तवाड़

अचानक सामने आई चुनौती में शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन कक्षाएं और ग्रामीण इलाकों में रेडियो, टीवी और सामुदायिक कक्षाएं चलाई गईं। कुछ खामियां जरूर रहीं लेकिन कुलमिलाकर इसके अच्छे नतीजे सामने आए। शिक्षा विभाग अब ऑनलाइन पढ़ाने के लिहाज से पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
- एचआर पखरू, संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा विभाग जम्मू

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed