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दो पेपर में मिले अंकों के आधार पर बोर्ड हमारा भविष्य तय नहीं कर सकता
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जम्मू। दसवीं कक्षा के परिणाम को लेकर लगातार परीक्षार्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वीरवार को रिहाड़ी स्थित बोर्ड कार्यालय पहुंचे असंतुष्ट परीक्षार्थियों ने बोर्ड के मूल्यांकन फार्मूले को लेकर प्रदर्शन किया। इसमें ज्यादातर असफल परीक्षार्थी थे। उन्होंने कहा कि बोर्ड दो पेपर में हासिल किए अंक के आधार पर हमारा भविष्य तय नहीं कर सकता। बोर्ड ने मूल्यांकन के लिए जो फार्मूला तैयार किया, वह हमे मंजूर नहीं है, या तो बोर्ड हमें भी पास करे या फिर सभी के पेपर दोबारा आयोजित करे।
जेके बोर्ड ने पहली बार अनुपातिक आधार पर दसवीं कक्षा का परिणाम जारी किया। परीक्षा रद्द होने से पहले हुए दो पेपर में मिले अंकों की औसत के आधार पर अन्य पेपर में अंक दिए। दसवीं में 12 हजार से अधिक परीक्षार्थी असफल रहे। इनमें ज्यादातर ऐसे परीक्षार्थी थे जो एक ही पेपर में पास हो पाए। वीरवार को ऐसे सभी परीक्षार्थी अभिभावकों के साथ बोर्ड कार्यालय पहुंचे। इस दौरान अभिभावकों ने कहा कि स्कूल हमसे कहते थे बोर्ड इस बार सभी बच्चों को पास करेगा। स्कूलों के कहने पर ही हमने बच्चों की 11वीं मेें एडमिशन करवा ली। जब रिजल्ट आया तो पता चला वह बच्चे पास ही नहीं हुए। स्कूल संचालक करते हैं बोर्ड में जाकर पूछो और बोर्ड अधिकारी कहते हैं स्कूल से पूछो।
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परिणाम फार्मूले को लेकर जागरूकता की कमी
दसवीं के ज्यादातर परीक्षार्थी बोर्ड द्वारा तय किए मूल्यांकन फार्मूले से जागरूक नहीं हैं। परीक्षार्थी समझ नहीं पा रहे है कि आखिर बोर्ड ने कैसे नंबर दिए हैं। अपने परिणाम से असफल परीक्षार्थी पुनर्मूल्यांकन करवा सकते हैं।
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जेके बोर्ड ने पहली बार अनुपातिक आधार पर दसवीं कक्षा का परिणाम जारी किया। परीक्षा रद्द होने से पहले हुए दो पेपर में मिले अंकों की औसत के आधार पर अन्य पेपर में अंक दिए। दसवीं में 12 हजार से अधिक परीक्षार्थी असफल रहे। इनमें ज्यादातर ऐसे परीक्षार्थी थे जो एक ही पेपर में पास हो पाए। वीरवार को ऐसे सभी परीक्षार्थी अभिभावकों के साथ बोर्ड कार्यालय पहुंचे। इस दौरान अभिभावकों ने कहा कि स्कूल हमसे कहते थे बोर्ड इस बार सभी बच्चों को पास करेगा। स्कूलों के कहने पर ही हमने बच्चों की 11वीं मेें एडमिशन करवा ली। जब रिजल्ट आया तो पता चला वह बच्चे पास ही नहीं हुए। स्कूल संचालक करते हैं बोर्ड में जाकर पूछो और बोर्ड अधिकारी कहते हैं स्कूल से पूछो।
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परिणाम फार्मूले को लेकर जागरूकता की कमी
दसवीं के ज्यादातर परीक्षार्थी बोर्ड द्वारा तय किए मूल्यांकन फार्मूले से जागरूक नहीं हैं। परीक्षार्थी समझ नहीं पा रहे है कि आखिर बोर्ड ने कैसे नंबर दिए हैं। अपने परिणाम से असफल परीक्षार्थी पुनर्मूल्यांकन करवा सकते हैं।
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