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डोगरी को थोपने से नहीं मिलेगी इसके प्रचार-प्रसार में मदद : डाॅ. जितेंद्र
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जम्मू। डोगरी को थोपने या उपदेश देने से इसके प्रचार-प्रसार में मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि डोगरी में लिखित संचार बहुत कम होता है। इसे लेकर जमीनी प्रयास की जरूरत है।
यह बात मंगलवार को जम्मू विश्वविद्यालय में कुंवर वियोगी स्मृति व्याख्यान देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही। उन्होंने सफलता की कहानियां सुनाते हुए डोगरा युवाओं से नए अवसरों और स्टार्टअप से जुड़ने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि डोगरा विरासत को देश की मुख्यधारा के साथ जोड़ने का समय आ गया है। अगर डोगरा क्षेत्र ऐसा कर पाता है तो यही डोगरा संस्कृति और गौरव को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करेगा।
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पाठ्यक्रम समेत अन्य माध्यमों से डोगरी भाषा को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हुए डॉ. सिंह ने जम्मू विवि जैसे शैक्षणिक संस्थानों से इस कार्य को करने का आग्रह किया। कहा कि बेशक डोगरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है और इसे शैक्षणिक संस्थानों में एक विषय के रूप पढ़ाया भी जा रहा है, इसके बावजूद अभी इसे बढ़ावा देने के लिए बहुत कार्य किए जाने की आवश्यकता है। ब्यूरो
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यह बात मंगलवार को जम्मू विश्वविद्यालय में कुंवर वियोगी स्मृति व्याख्यान देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही। उन्होंने सफलता की कहानियां सुनाते हुए डोगरा युवाओं से नए अवसरों और स्टार्टअप से जुड़ने का आग्रह किया।
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उन्होंने कहा कि डोगरा विरासत को देश की मुख्यधारा के साथ जोड़ने का समय आ गया है। अगर डोगरा क्षेत्र ऐसा कर पाता है तो यही डोगरा संस्कृति और गौरव को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करेगा।
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पाठ्यक्रम समेत अन्य माध्यमों से डोगरी भाषा को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हुए डॉ. सिंह ने जम्मू विवि जैसे शैक्षणिक संस्थानों से इस कार्य को करने का आग्रह किया। कहा कि बेशक डोगरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है और इसे शैक्षणिक संस्थानों में एक विषय के रूप पढ़ाया भी जा रहा है, इसके बावजूद अभी इसे बढ़ावा देने के लिए बहुत कार्य किए जाने की आवश्यकता है। ब्यूरो