एलजी बोले: जम्मू कश्मीर में शिक्षा का अधिकार लागू, सरकारी स्कूलों में 14.5 फीसदी बढ़ा बच्चों का नामांकन
श्रीनगर में कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि शिक्षा का अधिकार पूरे देश में लागू था, लेकिन इसे जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं किया गया। अगस्त 2019 के बाद स्थिति में बदलाव आया और इसे सभी 890 केंद्रीय कानूनों के साथ प्रदेश में लागू कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर में पिछले दो वर्षों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के प्रयास किए गए हैं।
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जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में दो साल में बच्चों का 14.5 फीसदी नामांकन बढ़ा है। इस वर्ष 2000 किंडरगार्टन स्थापित किए जाएंगे। 14,000 लड़कियों को नीट की कोचिंग दी जाएगी, जिसका खर्च प्रदेश प्रशासन उठाएगा। यह बात उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर की देवकी आर्य पुत्री पाठशाला के वार्षिक समारोह में कही।
उन्होंने कहा, 1910 से स्थापित इस स्कूल ने समाज के वंचित वर्गों की बेटियों को शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्कूली शिक्षा में एक नई सोच की जरूरत है। छात्रों के वैज्ञानिक स्वभाव को विकसित किया जाना चाहिए और जिज्ञासा और रचनात्मकता पैदा करने के लिए एक-से-एक सलाह को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
एलजी ने कहा, बुद्धिमान और चिंतनशील छात्र सभी क्षेत्रों में नवाचार और विकास का इंजन बनेंगे। नई पीढ़ी को यह जानने की जरूरत है कि जम्मू-कश्मीर की महिलाओं ने राष्ट्र निर्माण के कई क्षेत्रों में योगदान दिया है। सिन्हा ने पंडित मदन मोहन मालवीय को याद करते कहा कि वह महिला सशक्तीकरण और महिला शिक्षा के अग्रणी थे।
स्वतंत्रता के बाद के वर्षों में, कठोर कानूनों के कारण महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया था। शिक्षा का अधिकार पूरे देश में लागू था, लेकिन इसे जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं किया गया। अगस्त 2019 के बाद स्थिति में बदलाव आया और इसे सभी 890 केंद्रीय कानूनों के साथ प्रदेश में लागू कर दिया गया।
जम्मू-कश्मीर में पिछले दो वर्षों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के प्रयास किए गए हैं। आओ स्कूल चलें अभियान के तहत एक साल में यूटी प्रशासन ने 1.65 लाख बच्चों का नामांकन किया है। स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान के लिए ‘तलाश‘ ऐप शुरू की है।
अब तक 86000 ऐसे बच्चों की पहचान की जा चुकी है, और अब इनका स्कूलों में दाखिला कराया जा रहा है। कोरोना की बाधाओं के बावजूद 1.24 लाख बच्चों को प्रारंभिक बाल देखभाल शिक्षा के लिए नामांकित किया गया।
एनसीसी कैडेट ने एलजी को दिया गार्ड ऑफ ऑनर
डीएपीपी हाई स्कूल की अध्यक्ष वीना चंडोक ने कहा कि 1910 से स्थापित स्कूल की यात्रा और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्कूल ने 112 साल पूरे कर लिए हैं। कार्यक्रम के दौरान स्कूल की एनसीसी कैडेट्स ने उपराज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। गायिका एवं स्कूल पूर्व छात्रा कैलाश मेहरा ने एक कश्मीरी सूफी गीत प्रस्तुत किया। 10वीं कक्षा के छात्र सोहेल नासिर ने कोविड-19 के विषय पर बात की और इसे रोकने के तरीकों के बारे में जानकारी दी।