जम्मू-कश्मीर: चार विभागों की कड़ी निगरानी, फिर भी नहीं रुक रही निजी स्कूलों की मनमानी, अभिभावक हो रहे परेशान
निजी स्कूल सभी नियमों और दिशानिर्देशों को ताक पर रखकर अभिभावकों को लूटने में लगे हैं। बावजूद विभाग कार्रवाई करने में विफल हैं। इसका सीधा असर अभिभावकों पर पड़ रहा है।
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मार्च में बच्चों की परीक्षा तो अप्रैल में निजी स्कूलों की मनमानी के आगे अभिभावकों को भी धैर्य की परीक्षा देनी पड़ रही है। किताबों, कॉपियों, ड्रेस, जूतों के लिए अभिभावकों की दौड़ स्कूल और स्कूल की ओर से बताई गई दुकानों के बीच लगी रहती है। निजी स्कूलों की इस मनमानी को रोकने के लिए यूं तो तीन विभागों की निगरानी है।
निजी स्कूल सभी नियमों और दिशानिर्देशों को ताक पर रखकर अभिभावकों को लूट रहे हैं। बावजूद इसके विभाग कार्रवाई करने में विफल हैं। निजी स्कूलों की फीस तय करने के लिए फीस निर्धारण समिति है, लेकिन समिति के निर्देशों को ताक पर रखकर स्कूल अभिभावकों से अतिरिक्त वार्षिक और मासिक फीस ले रहे हैं।
ये स्कूल बच्चों को कौन सी किताबें पढ़ा रहे हैं इसकी निगरानी के लिए जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड है। बोर्ड हर बार आदेश जारी कर स्कूलों को नेशनल नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की पुस्तकें पढ़ाने के लिए कहता है, लेकिन निजी स्कूल बोर्ड के आदेशों को ताक पर रखकर प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें पढ़ा रहे हैं।
ये किताबें एक ही दुकान पर मिलती हैं और इनकी कीमत भी काफी अधिक है। निजी स्कूलों पर निगरानी का जिम्मा जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा निदेशालय का भी है, लेकिन इनकी ओर से भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आदेश ही जारी किए जा रहे हैं।
आठ से 15 हजार तक कॉपी-किताब का सेट
निजी स्कूलों व पुस्तक विक्रेताओं के गठजोड़ से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। स्कूलों में एनसीईआरटी के साथ खासमखास प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं, ताकि उनसे मोटी रकम प्राप्त हो सके। ऐसे में नर्सरी से 12वीं कक्षा तक कॉपी-किताब प्रति बच्चे के अभिभावक को आठ से 15 हजार रुपये में मिल रही है।
जेके स्कूल शिक्षा बोर्ड ने कक्षा छठी से 8वीं तक सभी निजी व सरकारी स्कूलों में बोर्ड द्वारा प्रकाशित पुस्तकों को पढ़ाने के लिए कहा है। इसके बावजूद कई निजी स्कूल बोर्ड की पुस्तकों के अलावा पांच से छह पुस्तकें अभिभावकों को खरीदने के लिए कह रहे हैं। जेके बोर्ड की पुस्तकें सस्ती हैं, लेकिन निजी प्रकाशकों की किताबों की कीमत इतनी ज्यादा है कि खरीदने में अभिभावकों के पसीने तक छूट रहे हैं।
स्कूल एजुकेशन से जुड़े हर विभाग की ओर से निजी स्कूलों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। फीस ज्यादा लेने के खिलाफ शिकायत के लिए अभिभावक के पास फोन, इमेल और व्यक्तिगत तौर पर विभागीय कार्यालयों में आने की सुविधा है। निजी स्कूलों के खिलाफ किसी भी प्रकार की शिकायत का निवारण विभाग की ओर से किया जाएगा। -आलोक कुमार, मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग