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जम्मू-कश्मीर में अब साल में दो बार पेश होगा आर्थिक सर्वे
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 13 Nov 2016 12:16 PM IST
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सीएम और डिप्टी सीएम
- फोटो : Amar Ujala
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राज्य सरकार अब साल में दो बार आर्थिक सर्वे जारी करेगी। यह घोषणा वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने शनिवार को की। उन्होंने आर्थिक सर्वे संबंधी दस्तावेज की भाषा को सरल बनाने की हिदायत दी है, ताकि इस सामान्य जन आसानी से समझ सकें।
अर्थ तथा सांख्यिकी विभाग की ओर से वर्ष 2016-17 के आर्थिक सर्वे की तैयारी की समीक्षा बैठक में कहा कि अब हर साल जनवरी तथा जुलाई में आर्थिक सर्वे जारी किया जाएगा। जनवरी में पेश होने वाले सर्वे में आर्थिक परिदृश्य का पूरा ब्योरा होगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वे दस्तावेज बोर करने वाला नहीं होना चाहिए।
साथ ही जनसाधारण के फायदे वाला होना चाहिए। इसमें उसके हर सवाल का जवाब मिलना चाहिए। सर्वे नागरिक आधारित हो। सरकार के खर्चे, सृजित किए गए श्रम के अवसर तथा जनता को दी गई सरकारी सेवाओं का जिक्र होना चाहिए। योजना बनाने के दौरान बरती गई अनिश्चितता की वजह से देनदारियों का भी उल्लेख हो।
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उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि डाटा उपभोक्ता आधारित हो न कि उत्पादन आधारित। इससे सरकारी सेवाओं के लिए धन आवंटित करने में सहूलियत होगी। वर्ष 2004 से आर्थिक सर्वे सामान्य तौर पर विधानसभा में बजट पेश किए जाने से एक दिन पहले सदन के पटल पर रखा जाता रहा है। बैठक में योजना विबाग के वित्त आयुक्त बीबी व्यास, अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के डीजी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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अर्थ तथा सांख्यिकी विभाग की ओर से वर्ष 2016-17 के आर्थिक सर्वे की तैयारी की समीक्षा बैठक में कहा कि अब हर साल जनवरी तथा जुलाई में आर्थिक सर्वे जारी किया जाएगा। जनवरी में पेश होने वाले सर्वे में आर्थिक परिदृश्य का पूरा ब्योरा होगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वे दस्तावेज बोर करने वाला नहीं होना चाहिए।
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साथ ही जनसाधारण के फायदे वाला होना चाहिए। इसमें उसके हर सवाल का जवाब मिलना चाहिए। सर्वे नागरिक आधारित हो। सरकार के खर्चे, सृजित किए गए श्रम के अवसर तथा जनता को दी गई सरकारी सेवाओं का जिक्र होना चाहिए। योजना बनाने के दौरान बरती गई अनिश्चितता की वजह से देनदारियों का भी उल्लेख हो।
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उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि डाटा उपभोक्ता आधारित हो न कि उत्पादन आधारित। इससे सरकारी सेवाओं के लिए धन आवंटित करने में सहूलियत होगी। वर्ष 2004 से आर्थिक सर्वे सामान्य तौर पर विधानसभा में बजट पेश किए जाने से एक दिन पहले सदन के पटल पर रखा जाता रहा है। बैठक में योजना विबाग के वित्त आयुक्त बीबी व्यास, अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के डीजी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।