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ई-वेस्ट: दुनिया के लिए बड़ा संकट बनता जा रहा है, मानकों पर खरा न उतरने वाले संस्थान बंद होंगे

Fri, 18 Jun 2021 02:30 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 18 Jun 2021 02:30 PM IST
सार

जेएंडके पीसीसी जम्मू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सईद नदीम हुसैन ने बताया कि बल्क उपभोक्ताओं को ई-वेस्ट से जुड़े सभी तरह के प्रबंधन की वार्षिक रिपोर्ट देना जरूरी होगा। इसमें संबंधित संस्थानों में मानकों का निरीक्षण किया जाएगा। ई-वेस्ट के प्रबंधन से पर्यावरण को किसी तरह से नुकसान न होने को सुनिश्चित बनाया जाएगा। 

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E waste is becoming a big problem for world surveillance has been increased in Jammu and Kashmir
ई-वेस्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आधुनिकीकरण की गति में ई-वेस्ट के बढ़ते खतरों को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में इसकी निगरानी को बढ़ाया गया है। अब सरकारी व निजी स्तर पर ई-वेस्ट के बल्क उपभोक्ताओं को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) को वार्षिक रिपोर्ट देनी होगी। इसमें ई-वेस्ट से जुड़े प्रबंधन का सारा ब्योरा देना होगा। ई वेस्ट के मानकों पर खरा न उतरने वाले संस्थानों को बंद करने का प्रावधान होगा। 

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पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (पीसीसी) की ओर से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत ई-वेस्ट, प्रबंधन संशोधन नियम, 2018 में जारी नोटिस के अनुसार ई वेस्ट से जुड़े बल्क उपभोक्ताओं को एसपीसीबी को फार्म-3 के तहत हर साल 30 जून से पहले वार्षिक रिटर्न जमा करवानी होगी। इसमें विभिन्न श्रेणी में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक एक्विपमेंट (ईईई) शामिल हैं। बल्क उपभोक्ताओं को ई वेस्ट के प्रबंधन और निस्तारण का ब्योरा देना होगा। बल्क उपभोक्ताओं में केंद्र सरकार/राज्य सरकारी विभाग, पब्लिक सेक्टर बैंक, शिक्षण संस्थान, मल्टीनेशनल संगठन, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, पार्टनरशिप व पब्लिक व प्राइवेट कंपनियां, जो फैक्टरी अधिनियम, 1948 और कंपनीज अधिनियम 2013 के तहत पंजीकृत हैं और जिनका टर्नओवर एक करोड़ से अधिक व बीस से अधिक कर्मचारी हैं, शामिल होंगे। बल्क उपभोक्ताओं को ई-वेस्ट से जुड़े सभी तरह के रिकॉर्ड को रखना होगा। 
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क्या है ई-वेस्ट
ई-वेस्ट इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का कचरा होता है। ये वे उत्पाद होते हैं, जिन्हें खराब होने पर इस्तेमाल नहीं किया जाता और इलेक्ट्रॉनिक कचरे में तब्दील होते जाते हैं। प्रौद्योगिकी की दुनिया में ई-वेस्ट दुनिया के लिए बड़ा संकट बनता जा रहा है। जनसंख्या बढ़ने के साथ हमारी जरूरतों के तहत ई-वेस्ट की मात्रा भी बढ़ती जा रही है। अगर ई-वेस्ट का उचित निस्तारण या रिसाइकिल नहीं किया जाता तो ये भविष्य के लिए खतरा बन सकता है। ई-वेस्ट में खराब होने वाले उत्पादों में सामान्य तौर पर कंप्यूटर, टीवी, मॉनिटर, सेल फोन, पीडीएएस, वीसीआर, सीडी प्लेयर, फैक्स मशीन, प्रिंटर आदि होते हैं।  
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