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Jammu News: ड्रोन से हथियार भेजने की बदली रणनीति, 200 फुट की ऊंचाई से फेंके जा रहे हथियार

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अजय मीनिया
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जम्मू। पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों ने अपनी गतिविधियां चलाने के लिए रणनीति बदल दी है। अब एक तरफ जहां हथियार भेजने के लिए अधिक ऊंचाई से ड्रोन के जरिए हथियार फेंके जा रहे हैं वहीं, दूसरी तरफ इन हथियारों को आतंकियों तक पहुंचाने के लिए हाइब्रिड मददगारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनका सुरक्षा एजेंसियों के कोई रिकॉर्ड नहीं है। यहां तक कि इन हथियारों को भेजने के लिए कुछ लोगों को एक कुरियर के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है।
सूत्रों का कहना है कि विजयपुर एम्स के पास जो हथियार ड्रोन के जरिए फेंके गए थे उनको करीब 250 फुट की ऊंचाई से नीचे फेंका गया, ताकि ड्रोन की मूवमेंट ही ट्रेस न हो। यह भी जानकारी सामने आई है कि यह हथियार लेकर ड्रोन एम्स से सटे एक नाले के बीचोबीच से आया था, ताकि उसकी मूवमेंट न देखी जाए। उक्त पैकेट में तीन पिस्टल, ग्रेनेड और अन्य सामान मिला था। उसके साथ एक 80 मीटर लंबी रस्सी भी मिली है। इससे पता चला है कि ड्रोन के जरिए बांधा गया पैकेट 250 फुट की ऊंचाई से फेंका गया था। आमतौर पर ड्रोन हथियार फेंकने के लिए जमीन के करीब 15 से 20 फुट तक पहुंचता है।
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हैंड टू हैंड डिलीवरी नहीं
आतंकी संगठनों ने ड्रोन से हथियार फेंकने की ही रणनीति नहीं बदली है, बल्कि इन्हें आतंकियों तक पहुंचाने की रणनीति भी बदलाव किया गया है। दरअसल, हथियार फेंकने के बाद इसकी जानकारी रिसीवर तक पहुंचाई जाती है। रिसीवर को बस इतना ही बताया जाता है कि उसे हथियार कहां से उठाने हैं और कहां पर रखने हैं, ताकि उसके बारे किसी को पता न चले। यहीं नहीं, रिसीवर के तौर पर भी ऐसे लोग लिए जा रहे हैं, जिनका सुरक्षा एजेंसियों में कोई आतंकी संबंधित रिकार्ड नहीं है।
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काफी ऊंचाई से हथियार फेंके
विजयपुर में हथियार काफी ऊंचाई से फेंके गए हैं। पैकेट के साथ एक 50 से 70 फुट लंबी रस्सी भी मिली है। जिससे पता चलता है कि पैकेट काफी ऊंचाई से फेंका गया। निश्चित तौर पर इसे लेने के लिए किसी न किसी ने तो पहुंचना ही था। शक है कि हथियारों को हाइब्रिड मददगार ने लेने आना था।
- सुरेंद्र चौधरी, एएसपी, सांबा
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