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Jammu News: इंसान को नशे के अजगर से बचाने की सीख दे गया नाटक जाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। बलवंत ठाकुर के हिंदी नाटक जाल का मंचन मंगलवार को एक्साइज एंड टैक्सेशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट नगरोटा में किया गया। इसका निर्देशन नीरज कांत ने किया। जम्मू-कश्मीर एक्साइज विभाग के सहयोग से प्रस्तुत नाटक किसी एक कहानी पर आधारित नहीं था, बल्कि नशीली दवाओं के खतरे को एक जाल की तरह फैलाते हुए युवाओं पर इसकी मार के एक विषय में कई कहानियां बुनी हैं।
एक लड़के को कॉलेज में प्रवेश के बाद अच्छी कंपनी के लिए संघर्ष करते दिखाया गया। नशे का उपभोक्ता न होने के कारण उसे अलग-थलग कर दिया गया है। चारों ओर बच्चे की तरह व्यवहार किया जा रहा है। यह साबित करने के लिए कि वह व्यक्ति के रूप में बड़ा हो गया है। वह सबसे आसान तरीका ढूंढता है और विभिन्न प्रकार के नशे का सेवन कर वयस्क होने का प्रदर्शन करता है।
अन्य दृश्य में ग्रामीण आबादी विशेषकर पुरुषों को शराब की लत में डूबा हुआ दिखाया गया है। एक क्रम में एक ग्रामीण की दिनचर्या दिखाई, जो कमाई का सारा पैसा शराब की तलाश में लगा देता है। नशे में घर का रास्ता भूल जाता है। स्थानीय व्यक्ति उसके स्थान तक ले जाता है। स्वागत न करने पर आधी रात में वह पत्नी और बच्चों को पीटना शुरू कर देता है।
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नाटक के माध्यम से बलवंत ठाकुर ने मानव जाति को इस अजगर से बचाने की अपील करने की कोशिश की है। कलाकारों में नीरज कांत, आदेश धर, कननप्रीत कौर, विशाल शर्मा, अभिमन्यु चौधरी, संकेत भगत, कुशाल भट्ट, सुमित बंदराल, सिशांत सिंह चरक और मोहम्मद यासीन शामिल रहे।
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जम्मू। बलवंत ठाकुर के हिंदी नाटक जाल का मंचन मंगलवार को एक्साइज एंड टैक्सेशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट नगरोटा में किया गया। इसका निर्देशन नीरज कांत ने किया। जम्मू-कश्मीर एक्साइज विभाग के सहयोग से प्रस्तुत नाटक किसी एक कहानी पर आधारित नहीं था, बल्कि नशीली दवाओं के खतरे को एक जाल की तरह फैलाते हुए युवाओं पर इसकी मार के एक विषय में कई कहानियां बुनी हैं।
एक लड़के को कॉलेज में प्रवेश के बाद अच्छी कंपनी के लिए संघर्ष करते दिखाया गया। नशे का उपभोक्ता न होने के कारण उसे अलग-थलग कर दिया गया है। चारों ओर बच्चे की तरह व्यवहार किया जा रहा है। यह साबित करने के लिए कि वह व्यक्ति के रूप में बड़ा हो गया है। वह सबसे आसान तरीका ढूंढता है और विभिन्न प्रकार के नशे का सेवन कर वयस्क होने का प्रदर्शन करता है।
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अन्य दृश्य में ग्रामीण आबादी विशेषकर पुरुषों को शराब की लत में डूबा हुआ दिखाया गया है। एक क्रम में एक ग्रामीण की दिनचर्या दिखाई, जो कमाई का सारा पैसा शराब की तलाश में लगा देता है। नशे में घर का रास्ता भूल जाता है। स्थानीय व्यक्ति उसके स्थान तक ले जाता है। स्वागत न करने पर आधी रात में वह पत्नी और बच्चों को पीटना शुरू कर देता है।
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नाटक के माध्यम से बलवंत ठाकुर ने मानव जाति को इस अजगर से बचाने की अपील करने की कोशिश की है। कलाकारों में नीरज कांत, आदेश धर, कननप्रीत कौर, विशाल शर्मा, अभिमन्यु चौधरी, संकेत भगत, कुशाल भट्ट, सुमित बंदराल, सिशांत सिंह चरक और मोहम्मद यासीन शामिल रहे।